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UP Health Sector: स्वास्थ्य शिक्षा से चिकित्सा इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने तक, कैसे बदल रहा उत्तर प्रदेश?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Sat, 18 Apr 2026 09:29 PM IST
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सार

मेडिकल कॉलेजों की संख्या में बढ़ोतरी: 1947 में राज्य में केवल दो मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या 2015 में बढ़कर 42 हो गई थी। 2024-25 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 90 तक पहुंच गया। 

Uttar Pradesh Health Sector from Infrastructure to Education know changes and development news and updates
यूपी का चिकित्सा क्षेत्र। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था में काफी बदलाव दर्ज किया गया है। फिर चाहे मेडिकल कॉलेज की संख्या बढ़ने की बात हो या स्वास्थ्य सेवा केंद्रों में इजाफे की, सभी सूचकांकों में यूपी का तेज बढ़ोतरी दर्ज करना जारी है। चिकित्सीय शिक्षा से लेकर इससे जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं की पहुंच तक लगभग हर क्षेत्र में बदलाव दिखता है। 
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आइये जानते हैं कैसे यूपी में स्वास्थ्य से जुड़े हर एक क्षेत्र में तेजी से बदलाव हुआ है...

1. चिकित्सीय शिक्षण क्षेत्र में

मेडिकल कॉलेजों की संख्या में बढ़ोतरी: 1947 में राज्य में केवल दो मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या 2015 में बढ़कर 42 हो गई थी। 2024-25 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 90 तक पहुंच गया। 
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एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज का लक्ष्य: राज्य सरकार हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने के अपने इस लक्ष्य के काफी करीब पहुंच गई है। वर्तमान में यूपी के 75 में से 59 जिलों में मेडिकल कॉलेज मौजूद हैं।

पीपीपी मॉडल के जरिए नए कॉलेजों का निर्माण: राज्य के 16 पिछड़े या कम सुविधा वाले जिलों में से 10 जिलों, जैसे- महोबा, मैनपुरी, बागपत, हमीरपुर, हाथरस और कासगंज में पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी)  मॉडल और भारत सरकार की वीजीएफ फंडिंग की मदद से मेडिकल कॉलेज शुरू करने की प्रक्रिया जारी है।

एमबीबीएस की सीटों में इजाफा: मौजूदा समय में राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 5,250 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं, जबकि निजी संस्थानों की तरफ से 6,350 सीटें प्रदान की जा रही हैं।

प्रमुख चिकित्सा संस्थानों की स्थापना: रायबरेली और गोरखपुर में एम्स की स्थापना और लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के शुरू होने से राज्य में उन्नत चिकित्सा प्रशिक्षण की क्षमता काफी मजबूत हुई है।

अन्य शैक्षणिक ढांचे: मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ, राज्य में 208 मेडिकल, बायो-टेक्नोलॉजी और फार्मेसी कॉलेज भी संचालित हैं, जो चिकित्सा क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन का एक बड़ा पूल तैयार करने में मदद कर रहे हैं।

2. स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे और पहुंच तक

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के इन्फ्रास्ट्रक्चर और आम लोगों तक उनकी पहुंच में व्यापक स्तर पर सुधार और विस्तार हुआ है।

स्वास्थ्य इकाइयों में बढोतरी: राज्य में प्रति 10,000 की आबादी पर स्वास्थ्य इकाइयों का घनत्व 2015 में 13.23 था, जो 2023-24 में काफी बढ़कर 35.71 तक पहुंच चुका है। 

मजबूत प्राथमिक ढांचा: वर्तमान में पूरे राज्य में 30,000 से ज्यादा चिकित्सा उप-केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और उप-जिला अस्पताल लोगों को सेवाएं दे रहे हैं।

आपातकालीन और एंबुलेंस सेवाएं: आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए 108 और 102 सेवा के तहत 4,500 से ज्यादा एंबुलेंस का एक बड़ा बेड़ा संचालित किया जा रहा है।

उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाएं: ग्रामीण और छोटे शहर में अब मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, क्योंकि राज्य के सभी 75 जिलों में डायलिसिस सेवाएं और 74 जिलों में सीटी स्कैन की सुविधाएं चालू कर दी गई हैं। इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों में पीपीपी मॉडल के जरिए भी सीटी स्कैन सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं।

टेलीमेडिसिन और ई-हेल्थ: दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ई-संजीवनी हब और स्पोक मॉडल लागू किया गया है। इस नेटवर्क के तहत 17,528 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर काम कर रहे हैं, जिनके जरिए रोजाना लगभग 45,000 टेली-कंसल्टेशन (ऑनलाइन चिकित्सकीय परामर्श) किए जा रहे हैं।

पीपीपी मॉडल के जरिए नई पहल: लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए राज्य के 18 चिह्नित जिलों में पीपीपी मॉडल पर निजी अस्पतालों का विकास किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कैंसर केयर (लीनियर एक्सीलरेटर, पीईटी स्कैन), रेडियोथेरेपी और कैथ लैब (कैथ लैब) जैसी महंगी और उन्नत चिकित्सा प्रक्रियाओं को भी पीपीपी मोड में शुरू किया जा रहा है ताकि आम जनता को कम खर्च में बेहतर इलाज मिल सके।

मातृ और जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य सूचकांक में भी सुधार
  • 2015-16 में राज्य में संस्थागत प्रसव दर केवल 67.8 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 96.10 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे यह राष्ट्रीय औसत के काफी करीब आ गया है।
  • उत्तर प्रदेश में 2014-16 के दौरान मातृ मृत्यु दर 201 थी, जो 2020-22 के आंकड़ों के मुताबिक, अब घटकर 142 पर आ गई है।
  • वर्ष 2016 से 2021 के बीच राज्य की शिशु मृत्यु दर में 13.95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
  • आजादी के समय राज्य में टीकाकरण दर केवल पांच प्रतिशत था, लेकिन 2021 तक यह बढ़कर 91.3 प्रतिशत हो गया है।

आयुष्मान भारत योजना से मिला यूपी को फायदा
यूपी में आयुष्मान योजना के तहत अब तक लगभग 56.30 लाख लाभार्थियों को योजना के तहत मुफ्त इलाज मिल चुका है। राज्य में पीएम-जन आरोग्य योजना (PM-JAY) और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 5.2 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश ने 13.18 करोड़ आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) आईडी बनाकर पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है।
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