Fact Check: तमिलनाडु का दो महीना पुराना वीडियो विजय के सीएम पद की शपथ लेने के बाद का बताकर किया जा रहा शेयर
Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया तमिलनाडु में विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद हिंदी विरोधी नफरत देखने को मिल रही है। हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है।
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विस्तार
'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) के संस्थापक सी जोसेफ विजय ने रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। चेन्नई के जवाहर लाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग रेलवे स्टेशन पर हिंदी में लिखे शब्दों को मिटा रहे हैं। वीडियो को शेयर दावा किया जा रहा है कि तमिलनाडु में हिंदी विरोधी नफरत टीवीके विजय के शपथ ग्रहण के बाद शुरू हुई।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो दो महीना पुराना है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि विजय के मुख्यमंत्री बनते ही राज्य में हिंदी विरोधी नफरत शुरू हो गई है।
भक्त प्रहलाद (@RakeshKishore_l) नाम के एक्स यूजर ने लिखा, "तमिलनाडु में हिंदी विरोधी नफरत टीवीके विजय के शपथ ग्रहण के बाद शुरू हुई। उन्हें बस यही पता है और वे भाजपा को सांप्रदायिक पार्टी कहते हैं।’ पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें इंस्टाग्राम पर sunnews की एक पोस्ट मिली। यहां हमें वायरल वीडियो देखने को मिला। यह वीडियो 12 मार्च 2026 को साझा किया गया है। इसके साथ ही यहां बताया गया है कि 17 मई आंदोलन के सदस्यों ने चेन्नई रेलवे स्टेशन पर हिंदी में लिखी पट्टिकाओं पर कालिख पोतकर विरोध प्रदर्शन किया।
इसके बाद हमें इंडियन एक्सप्रेस तमिल की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 12 मार्च 2026 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि तमिलनाडु में हिंदी थोपे जाने के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं। इसी संदर्भ में, थिरुमुरुगन गांधी समेत 17 मई आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने चेन्नई रेलवे स्टेशनों पर हिंदी लेख नष्ट करके विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। इस संबंध में थिरुमुरुगन गांधी ने अपनी वेबसाइट पर लिखा, ‘17 मई आंदोलन के वरिष्ठ साथी शिवकुमार द्वारा शुरू किया गया हिंदी विरोधी विरोध प्रदर्शन और फैलेगा।’
आगे की पड़ताल में हमने 17 मई अंदोलन के बारे में सर्च किया। इस दौरान हमें 17 मई की वेबसाइट मिली। यहां बताया गया है कि 17 मई आंदोलन एक राजनीतिक और सामाजिक संगठन है, जो तमिल अधिकारों के लिए काम करता है। 17 मई 2009 को तमिल ईलम नरसंहार की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में यह आंदोलन शुरू हुआ। यह संगठन लोकतांत्रिक और बौद्धिक वातावरण में काम करते हुए तमिल ईलम के तमिलों के स्वतंत्रता के अधिकार के न्याय को विश्व तक पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा नकारे गए तमिलों के अधिकारों को हासिल करने का प्रयास करता है। इसका प्राथमिक उद्देश्य तमिल समुदाय और अन्य समाजों में तमिल नरसंहार के पीछे की ताकतों, उद्देश्यों, संस्थानों, सरकारों और व्यक्तियों की व्यापक समझ विकसित करना और इसके माध्यम से तमिलों में राजनीतिक जागरूकता पैदा करना है।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को विजय के मुख्यमंत्री बनने के पहले का पाया है।