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Fact Check: वसुंधरा राजे ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर नहीं लिखा सरकार की आलोचना करने वाला कोई पत्र, पढ़ें सच

फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला Published by: Asmita Tripathi Updated Mon, 20 Apr 2026 01:00 PM IST
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सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक पत्र शेयर कर दावा किया जा रहा है कि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आरआरएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर महिला आरक्षण के मुद्दे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है।

Fact Check: Vasundhara Raje did not write a letter to the RSS chief on the issue of women's reservation
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक पर लंबी और गहन चर्चा के बाद शुक्रवार (17 अप्रैल) मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई। कुल 528 सांसदों ने वोट डाला, जिसमें 298 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विपक्ष में मतदान किया। हालांकि, संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट प्राप्त नहीं हो सके। जिसके कारण यह बिल पारित नहीं हो सका। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हो रहा है। पत्र को शेयर कर दावा किया जा रहा है राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आरआरएस  प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर सत्ताधारी पार्टी की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।  

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है। 

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क्या है दावा 

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आरआरएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर अपनी ही पार्टी की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।  

पंडित विशाल पांडेय (@Vkpandey7617)  नाम के एक्स यूजर ने लिखा, 'राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी ही पार्टी भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वसुंधरा राजे  ने आरआरएस के प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर पार्टी की  नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।' पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।


इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले कीवर्ड से सर्च किया। इस दौरान हमें वसुंधरा राजे के एक्स हैंडल पर एक पोस्ट मिला। यह पोस्ट 18 अप्रैल 2026 को साझा किया गया है। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि सांच को आंच की जरूरत नहीं है। वायरल पत्र शुभचिंतको की कारगुजारी मात्र है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी देने के प्रयास का मैं ही नहीं, देश की हर महिला स्वागत कर रही है। यह भी तय मान लीजिए कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करने वाले ऐसे लोग चौथी बार भी विपक्ष में ही बैठने की तैयारी कर चुके हैं। ऐसे लोग चाहे जितना भ्रम फैलाएं, बाधाएं उत्पन्न करें . . . देश की नारी शक्ति न रुकी है, न रुकेगी! 

इसके बाद हमें समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट में 18 अप्रैल 2026 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से लिखा गया एक कथित पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें महिला आरक्षण विधेयक जैसे मुद्दों पर भाजपा के रुख की आलोचना की गई थी। इसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं, लेकिन बाद में उन्होंने इसे फर्जी बताकर खारिज कर दिया। यह विवाद तब शुरू हुआ जब मोहन भगवत को संबोधित बताया जा रहा एक पत्र ऑनलाइन सामने आया। आरोप है कि पत्र में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन जैसे मुद्दों पर भाजपा के रुख की आलोचना की गई है। राजे ने कहा कि यह शरारती तत्वों का काम था।

 

आगे की पड़ताल में हमने अमर उजाला के न्यूज डेस्क से संपर्क किया। इस दौरान हमें एक रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 19 अप्रैल 2026 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से एक कथित पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस पत्र में संघ प्रमुख मोहन भागवत को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण बिल और परिसीमन जैसे मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग राय व्यक्त की गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री ने वायरल दावे को खंडन किया गया है। उन्होंने इसे फर्जी बताया है। 

 

पड़ताल का नतीजा 

हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को फर्जी पाया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरआरएस प्रमुख को ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है।

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