Fact Check: कैप्टन शिव कुमार को जकार्ता से वापस भारत बुलाए जाने का दावा झूठा, पड़ताल में पढ़ें सच
Fact Check: सोशल मीडिया पर एक पत्र शेयर कर दावा किया जा रहा है। इसे शेयर करके दावा किया जा रहा है कि गृह मंत्रालय की ओर से कैप्टन शिव कुमार को वापस भारत बुलाया जा रहा है। हमारी पड़ताल में वायरल दावा गलत साबित हुआ है।
विस्तार
बीते महीने इंडोनेशिया के जकार्ता में एक सेमिनार के बाद से भारतीय नौसेना के कैप्टन शिव कुमार चर्चा में हैं। उनसे जुड़ी कई खबरें भी वायरल हो रही हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ट्रांसफर ऑर्डर वायरल हो रहा है। पोस्ट को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि गृह मंत्रालय ने कैप्टन शिव कुमार के जकार्ता में दिए बयान के बाद से वापस भारत बुला लिया है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि गृह मंत्रालय की ओर से इस तरह का कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया है। बता दें कि इंडोनेशिया में एक सेमिनार में रक्षा अताशे कैप्टन शिव कुमार की प्रेजेंटेशन में कही बात को मीडिया ने गलत ढंग से पेश किया। इसके बाद से इंडोनेशिया में भारतीय दूतवासा ने इन रिपोर्ट को खारिज कर कहा था कि मीडिया बातों के संदर्भ को बदलकर पेश कर रही है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक ट्रांसफर ऑर्डर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि कैप्टन शिव कुमार को इंडोनेशिया से वापस भारत बुलाया जा रहा है।
यासीन मलिक (@YasinMa13) नाम के यूजर ने लिखा “इंडोनेशिया में भारत के रक्षा अताशे कैप्टन शिव कुमार सिंह को यह खुलासा करने के बाद वापस बुला लिया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई भारतीय वायुसेना के जेट, राफेल, जे-10 विमानों द्वारा गिराए गए थे। यह एक दुर्लभ सार्वजनिक स्वीकारोक्ति है जो सेना के भीतर आंतरिक असंतोष को उजागर करती है।” पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के कई अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
दावे की पड़ताल करने के लिए हमने इससे जुड़े कीवर्ड से सर्च किया। इस दौरान हमें वायरल दावे से जुड़ी कोई खबर नहीं मिली।
इसके बाद हमने गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर सर्च किया। इस दौरान हमें वायरल ट्रांसफर ऑर्डर से जुड़ी कोई प्रेस विज्ञप्ति नहीं मिली।
आगे की पड़ताल के दौरान हमें प्रेस सूचना ब्यूरो फैक्ट चेक के एक्स हैंडल पर एक पोस्ट मिली। पोस्ट 8 जुलाई को साझा की गई है। इसमें वायरल पोस्ट को गलत बताया गया है। आगे बताया गया है कि कैप्टन शिव कुमार जकार्ता में रक्षा अताशे के पद पर कार्यरत हैं। कैप्टन रैंक के भारतीय नौसेना अधिकारियों की पोस्टिंग रक्षा मंत्रालय (नौसेना) के मुख्यालय के अधिकार क्षेत्र में आती है। इसके साथ ही रक्षा अताशे की नियुक्ति या वापसी में गृह मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं होती है।
यहां से साफ है कि गृह मंत्रालय की ओर से कैप्टन शिव कुमार को वापस भारत नहीं बुलाया गया है। इसके साथ ही इसमें गृह मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल पत्र को गलत पाया है। इसे शेयर कर लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।