Fact Check: मुस्लिम समुदाय की प्रजनन दर के आंकड़े जनसंख्या नियंत्रण कानून से जोड़कर हो रहे वायरल, जानें सच्चाई
Fact Check : सोशल मीडिया पर एक तालिका शेयर की जा रही है। इसमें दावा किया जा रहा है कि मुस्लिम समुदाय की महिलाओं में सबसे अधिक प्रजनन दर है। Boom ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है।
विस्तार
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल है जिसमें धर्म के आधार पर प्रजनन दर की एक तालिका शेयर की गई है। इसके साथ ही कहा गया है कि देश में जल्द से जल्द 'जनसंख्या नियंत्रण कानून' क्यों जरूरी है।
क्या है दावा
इस पोस्ट में प्रजनन दर के आंकड़े का हवाला देते हुए कहा गया है कि देश में जल्द से जल्द 'जनसंख्या नियंत्रण कानून' को लागू करने की बात की जा रही है।
बूम ने अपनी जांच में पाया कि पोस्ट में किया जा रहा दावा गलत है। इसमें मुस्लिम समुदाय की प्रजनन दर के आंकड़े गलत बताए गए हैं।
पोस्ट में दावा किया गया है कि भारत में धर्म के आधार पर प्रजनन दर निम्न है:-
हिंदू: 1.94
मुस्लिम: 4:4
सिख: 1:61
ईसाई: 1:88
जैन: 1:6
बौद्ध: 1:39
(पोस्ट का आर्काइव लिंक)
पड़ताल
बूम ने वायरल दावे की पड़ताल के लिए जब इस पोस्ट के साथ दिए गए आंकड़े की तुलना 2019-2021 की NFHS की रिपोर्ट से की तो बूम को इसमें कई विसंगतियां देखने को मिली।
वायरल पोस्ट में हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और बुद्ध की प्रजनन दर सही है जबकि मुस्लिमों की प्रजनन दर के आंकड़े के साथ हेर-फेर की गई है. नवीनतम NFHS रिपोर्ट में मुस्लिमों की प्रजनन दर 2.36 बताया गया है।
पांचवी NFHS (2019-22) रिपोर्ट यहां देखें.
NFHS की पुरानी रिपोर्ट देखने के बाद बूम ने पाया कि वायरल पोस्ट में मुसलमानों के लिए दी गई प्रजनन दर के आंकड़े 1992-93 NFHS के आंकड़े से मेल खाते हैं।
नीचे दी गई तालिका में NFHS की पहली और पांचवीं रिपोर्ट में धर्म के अनुसार प्रजनन दर की तुलना की गई है।
इससे पता चलता है कि वायरल पोस्ट में मुस्लिमों की प्रजनन दर का आंकड़ा NFHS की पहली रिपोर्ट (1992-1993) से लिया गया है जबकि हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध की प्रजनन दर का आंकड़ा 2019-2021 के NFHS-5 से लिया गया है और फिर इसे मिलाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है।
हालांकि, मुस्लिम समुदाय की प्रजनन दर NFHS-5 में भी अन्य धर्मों की तुलना में अधिक है, लेकिन आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मुस्लिम समुदाय की प्रजनन दर में सबसे अधिक गिरावट भी आई है।
(This story was originally published by Boom as part of the Shakti Collective. Except for the headline and opening introduction para this story has not been edited by Amar Ujala staff)
