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Gen Z, Millennials और Baby Boomers: आखिर जनरेशन के नाम तय कैसे होते हैं? नामों के पीछे की दिलचस्प है ये कहानी

Thu, 30 Jul 2026 06:44 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नई दिल्ली। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Thu, 30 Jul 2026 06:44 PM IST
सार

   Baby Boomers, Gen X, Millennials और Gen Alpha जैसे नाम कैसे पड़े? हर पीढ़ी की पहचान जन्म वर्ष, ऐतिहासिक घटनाओं, तकनीकी बदलाव और सामाजिक माहौल से जुड़ी होती है। जानिए कौन-सी जनरेशन कब की है और उसकी सबसे बड़ी खासियत क्या है।

 

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Gen Z, Millennials, and Baby Boomers How exactly generation names decided Here fascinating story behind names.
जनरेशन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

नीट पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद हर तरफ Gen Z की चर्चा हो रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर Gen Z हैं कौन? इसे Gen Z क्यों कहा जाता है? और Baby Boomers, Gen X, Millennials यानी Gen Y जैसी दूसरी पीढ़ियों के नाम कैसे तय होते हैं? चलिए, समझते हैं हर पीढ़ी की कहानी? कौन-सी जनरेशन कब की है और उसकी सबसे बड़ी पहचान क्या है?

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पहले जानते हैं जनरेशन कैसे तय होती है?
आमतौर पर एक जनरेशन में करीब 20 साल के अंतराल में जन्मे लोगों को शामिल किया जाता है। हालांकि, यह सिर्फ जन्म के वर्ष का मामला नहीं है। किसी पीढ़ी को उसकी परवरिश, उस दौर की बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं, तकनीकी बदलावों और सामाजिक माहौल के आधार पर भी पहचाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक ही समय में बड़े होने वाले लोग अक्सर एक जैसे अनुभव, सोच और आदतें विकसित करते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग जनरेशन की पहचान, पसंद, काम करने का तरीका और जीवनशैली भी अलग होती है।

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1) ग्रेटेस्ट जनरेशन: The Greatest Generation (1901–1927)

जन्म वर्ष: 1901–1927
प्रमुख घटनाएं: महामंदी और द्वितीय विश्व युद्ध
खासियत: मेहनती, अनुशासित और संघर्षशील पीढ़ी
1901 से 1927 के बीच जन्मे लोगों को 'ग्रेटेस्ट जनरेशन' कहा जाता है। इस पीढ़ी ने 1930 के दशक की महामंदी (Great Depression) और प्रथम विश्व युद्ध (World War I) जैसी कठिनाइयों का सामना किया। यही कारण है कि इस पीढ़ी की पहचान कड़ी मेहनत, अनुशासन, धैर्य और जिम्मेदारी से जुड़ी रही। संगीत की दुनिया में इस दौर में जैज और स्विंग म्यूजिक काफी लोकप्रिय हुआ, लेकिन इस पीढ़ी को सबसे ज्यादा उनके संघर्ष और देश के लिए योगदान के कारण याद किया जाता है।

 

  

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2) साइलेंट जनरेशन: Silent Generation (1928–1945) 

जन्म वर्ष: 1928–1945
प्रमुख घटनाएं: द्वितीय विश्व युद्ध, रेड स्केयर और मैककार्थीवाद
खासियत: अनुशासित, मेहनती, नियमों का पालन करने वाली और कम बोलकर काम करने वाली पीढ़ी
1928 से 1945 के बीच जन्मे लोगों को 'साइलेंट जनरेशन' कहा जाता है। इस पीढ़ी का बचपन और युवावस्था आर्थिक चुनौतियों, द्वितीय विश्व युद्ध और राजनीतिक तनाव के दौर में बीती। अमेरिका में इस समय कम्युनिज्म के डर (Red Scare) और मैककार्थीवाद (McCarthyism) का माहौल था, इसलिए लोग खुलकर अपनी राय रखने से बचते थे। इसी वजह से इस पीढ़ी को 'साइलेंट जनरेशन' नाम दिया गया। इस पीढ़ी के लोगों को बचपन से कड़ी मेहनत, अनुशासन, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता का महत्व सिखाया गया। उनका मानना था कि मेहनत के दम पर ही जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है।

3) बेबी बूमर जनरेशन: Baby Boomers (1946–1964)

जन्म वर्ष: 1946–1964
प्रमुख घटनाएं: वियतनाम युद्ध का विरोध, सामाजिक बदलाव और 'समर ऑफ लव'
खासियत: बदलाव की सोच, परिवार में बच्चों की राय को महत्व देना और सामाजिक आंदोलनों में भागीदारी
1946 से 1964 के बीच जन्मे लोगों को 'बेबी बूमर्स' कहा जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद कई देशों में जन्म दर में अचानक तेज बढ़ोतरी हुई। इसी वजह से इस पीढ़ी का नाम बेबी बूमर्स पड़ा। युवावस्था में इस पीढ़ी ने कई बड़े सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में हिस्सा लिया। अमेरिका में वियतनाम युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन हुए और 'समर ऑफ लव' जैसे सांस्कृतिक आंदोलनों ने युवाओं की सोच और जीवनशैली को नई दिशा दी। परिवार के स्तर पर भी इस पीढ़ी ने बदलाव किया। बेबी बूमर्स ऐसे पहले माता-पिता माने जाते हैं, जिन्होंने बच्चों की राय और भावनाओं को महत्व देना शुरू किया। परिवार में बातचीत और फैमिली मीटिंग जैसी परंपराएं भी इसी दौर में लोकप्रिय हुईं।

4) जनरेशन एक्स: Generation X (1965–1980)  
 

जन्म वर्ष: 1965–1980
प्रमुख घटनाएं: एड्स महामारी, MTV संस्कृति का दौर, LGBTQ+ अधिकारों का उभार
खासियत: बदलावों के साथ ढलने वाली, प्रैक्टिकल थिंकिंग रखने वाली और बच्चों पर अधिक ध्यान रखने वाली पीढ़ी 
1965 से 1980 के बीच जन्मे लोगों को 'जनरेशन एक्स' कहा जाता है। इस पीढ़ी ने समाज और तकनीक में तेज बदलावों का दौर देखा। इनके समय में MTV संस्कृति का प्रभाव बढ़ा, एड्स महामारी (AIDS Epidemic) ने दुनिया को प्रभावित किया और LGBTQ+ अधिकारों को लेकर जागरूकता व आंदोलन तेज हुए। पालन-पोषण के मामले में भी यह पीढ़ी अलग रही। जनरेशन एक्स के माता-पिता को 'हेलीकॉप्टर पेरेंट्स' कहा गया, क्योंकि वे अपने बच्चों की पढ़ाई, गतिविधियों और सामाजिक जीवन में पहले की पीढ़ियों की तुलना में कहीं अधिक सक्रिय और शामिल रहने लगे।

 

5) मिलेनियल्स / जनरेशन Y: Millennials / Generation Y (1981–1996) 
 

जन्म वर्ष: 1981–1996
प्रमुख घटनाएं: इंटरनेट और ई-कॉमर्स का विस्तार
खासियत: डिजिटल बदलाव के गवाह, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक, बच्चों को खुलकर अपनी पहचान बनाने की आजादी देने वाली पीढ़ी
1981 से 1996 के बीच जन्मे लोगों को 'मिलेनियल्स' या 'जनरेशन Y' कहा जाता है। यह ऐसी पहली पीढ़ी है, जिसने इंटरनेट के बिना बचपन और इंटरनेट के साथ युवावस्था दोनों का अनुभव किया। इस पीढ़ी ने ई-कॉमर्स की शुरुआत और डिजिटल क्रांति जैसे बड़े बदलाव देखे। तकनीक के अधिक इस्तेमाल के कारण मिलेनियल्स को अक्सर आलोचना का सामना करना पड़ा लेकिन यह पीढ़ी पर्यावरण, सामाजिक मुद्दों और सामुदायिक सहयोग को लेकर जागरूक माने जाते हैं। बच्चों की परवरिश में मिलेनियल्स पहले की पीढ़ियों की तुलना में बच्चों की पसंद, पहचान और व्यक्तित्व को अधिक महत्व देते हैं। वे बच्चों को अपनी रुचि के अनुसार सीखने और आगे बढ़ने की आजादी देने में विश्वास रखते हैं।

 

6) जनरेशन Z: Generation Z (1997–2010) 

जन्म वर्ष: 1997–2010
प्रमुख घटनाएं: पहली डिजिटल-नेटिव पीढ़ी
खासियत: टेक-सेवी, सोशल मीडिया से जुड़ी, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक, नई सोच और बदलाव को अपनाने वाली पीढ़ी
1997 से 2010 के बीच जन्मे लोगों को 'जनरेशन Z' या 'Gen Z' कहा जाता है। यह पहली ऐसी पीढ़ी है, जिसका जन्म इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के दौर में हुआ। यानी इनकी पूरी परवरिश डिजिटल दुनिया के बीच हुई और ये बचपन से ही ऑनलाइन दुनिया से जुड़े रहे। Gen Z को टेक-सेवी (Tech-savvy), सोशल मीडिया फ्रेंडली और तेजी से बदलते ट्रेंड अपनाने वाली पीढ़ी माना जाता है। यह पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण, समानता जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। इसके साथ ही, राजनीति और सामाजिक घटनाओं में भी इसकी गहरी दिलचस्पी देखी जाती है।

7) जनरेशन अल्फा: Generation Alpha (2010–2024)

जन्म वर्ष: 2010–2024
प्रमुख घटनाएं: कोविड-19 महामारी, AI और डिजिटल शिक्षा का विस्तार
खासियत: सबसे अधिक टेक-सेवी, डिजिटल दुनिया में पली-बढ़ी, भविष्य की शिक्षा और वर्कलाइफ को बदलने की क्षमता रखने वाली पीढ़ी
2010 से 2024 के बीच जन्मे बच्चों को 'जनरेशन अल्फा' कहा जाता है। यह पहली ऐसी पीढ़ी है, जिसने सोशल मीडिया, स्मार्ट डिवाइस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों के साथ ही दुनिया देखी। इसलिए इन्हें अब तक की सबसे टेक-सेवी (Tech-savvy) पीढ़ी माना जाता है। इस पीढ़ी के कई बच्चों का जन्म कोविड-19 महामारी के दौरान हुआ। ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल शिक्षा और वर्चुअल दुनिया इनके बचपन का हिस्सा रही। हालांकि तकनीक की बढ़ती निर्भरता के कारण स्क्रीन टाइम बढ़ने, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और आमने-सामने सामाजिक मेलजोल कम होने जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जनरेशन अल्फा आने वाले समय में शिक्षा, तकनीक और काम करने के तरीकों में बड़े बदलाव ला सकती है।

 

8) जनरेशन बीटा- Generation Beta (2025–2039) 

जन्म वर्ष: 2025–2039
प्रमुख विशेषता: AI को अधिक समझने वाली पीढ़ी
खासियत: तकनीक में तेज, पर्यावरण के प्रति जागरूक और भविष्य की डिजिटल दुनिया को आगे बढ़ाने वाली पीढ़ी
2025 से 2039 के बीच जन्म लेने वाले बच्चों को 'जनरेशन बीटा' कहा जाता है। इस नई पीढ़ी को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों के बीच बड़ी होगी। जनरेशन बीटा के बच्चे ऐसी दुनिया में बड़े होंगे जहां AI, स्मार्ट डिवाइस और डिजिटल कनेक्टिविटी रोजमर्रा की जिंदगी का सामान्य हिस्सा होंगे। माना जा रहा है कि यह पीढ़ी तकनीक में माहिर, बदलावों के अनुसार खुद को ढालने वाली, पर्यावरण के प्रति जागरूक और अपनी अलग पहचान को महत्व देने वाली हो सकती है।

9)  जनरेशन गामा: Generation Gamma (2040–2054) (अनुमानित)

जन्म वर्ष: 2040–2054
संभावित दुनिया: AGI, स्मार्ट शहर, साझा अर्थव्यवस्था और जलवायु चुनौतियां
संभावित खासियत: कम उपभोग, तकनीक पर अधिक निर्भर , चीजों को मिल-बांट कर इस्तेमाल करने वाली पीढ़ी
2040 से 2054 के बीच जन्म लेने वाले बच्चों को भविष्य में 'जनरेशन गामा' कहा जा सकता है। हालांकि, यह अभी केवल एक अनुमानित पीढ़ी है और इसकी कोई आधिकारिक परिभाषा नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि जनरेशन गामा ऐसी दुनिया में बड़ी होगी जहां आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI), स्मार्ट शहर और साझा अर्थव्यवस्था (Sharing Economy) आम बात होगी। जलवायु परिवर्तन का असर भी उनके जीवन पर पहले से कहीं अधिक दिखाई दे सकता है। ऐसा भी माना जा रहा है कि इस पीढ़ी के लिए घर, कार या अन्य चीजों का मालिक होना उतना जरूरी नहीं होगा, क्योंकि जरूरत की अधिकांश चीजें साझा सेवाओं या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध हो सकती हैं।

 

पश्चिमी देशों से भारत में आया यह नाम

Baby Boomers, Gen X, Millennials और Gen Z जैसे नाम अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों के सामाजिक और ऐतिहासिक अनुभवों के आधार पर दिए गए थे। भारत में इन्हें केवल अपनाया है। भारत में तकनीक, इंटरनेट और सामाजिक बदलाव पश्चिमी देशों की तुलना में कुछ वर्षों बाद आए, इसलिए कई मामलों में भारतीय पीढ़ियों के अनुभव इन वैश्विक परिभाषाओं से अलग हो सकते हैं।

जनरेशन के साल क्यों बदलते रहते हैं?
पहले एक जनरेशन को करीब 20 से 30 साल का माना जाता था, क्योंकि लोगों की जीवनशैली, तकनीक और सामाजिक बदलाव बहुत धीरे-धीरे होते थे। लेकिन अब इंटरनेट, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और AI जैसी तकनीकों ने कुछ ही वर्षों में लोगों की सोच और जीवनशैली बदल दी है। इसी वजह से अब कई रिसर्च संस्थान करीब 15 से 18 साल के अंतराल पर नई जनरेशन की पहचान करने लगे हैं। हालांकि, इसकी कोई  कानूनी परिभाषा नहीं है। अलग-अलग संस्थान जन्म वर्षों में थोड़ा-बहुत अंतर भी बताते हैं।

 

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