Gen Z ने बदले नियम: मोबाइल को बनाया करियर का हथियार, 9 से 5 की नौकरी से दूर Creator बनने की ओर बढ़ा रहे कदम
Gen Z के बीच कंटेंट क्रिएशन तेजी से करियर का विकल्प बन रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 83% Gen Z खुद को क्रिएटर मानते हैं। छोटे शहरों के युवा भी इसमें आगे हैं। सस्ते इंटरनेट और स्मार्टफोन ने इस बदलाव को बढ़ावा दिया है।
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एक समय था जब लोग डॉक्टर, इंजीनियर बनना चाहते थे या सरकारी नौकरी पर अपना पूरा फोकस रखते थे। लेकिन आज के Gen Z इस मामले में थोड़ा अलग हैं। इनकी नई पसंद है ‘कंटेंट क्रिएटर’ बनना। कैमरा, मोबाइल और इंटरनेट के दम पर भारत के करोड़ों युवा अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
Gen Z एक नई डिजिटल क्रांति ला रहे हैं। जेन-जी के लिए कंटेंट क्रिएशन सिर्फ टाइमपास या सोशल मीडिया का शौक नहीं, बल्कि अपनी पहचान बनाने, करियर बनाने और कमाई का नया जरिया बन चुका है। YouTube India-SmithGeiger रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 83% Gen Z खुद को 'क्रिएटर' मानते हैं। खास बात यह है कि यह ट्रेंड सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों के युवा भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी पहचान बना रहे हैं।
क्या क्रिएटर बनना सिर्फ शौक है?
अब कंटेंट क्रिएशन सिर्फ टाइमपास या सोशल मीडिया के जरिए फेमस होने का जरिया नहीं रह गया है। Gen Z इसे एक बेहतरीन करियर के तौर पर देख रहे हैं। YouTube India-SmithGeiger की 2024 रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 75% भारतीय Gen Z क्रिएटर्स का मानना है कि कंटेंट क्रिएशन एक अच्छा करियर विकल्प है।

आज के युवा YouTube, Instagram और Shorts जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सिर्फ वीडियो पोस्ट करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी पहचान बनाने और कमाई के लिए भी कर रहे हैं। ब्रांड प्रमोशन, स्पॉन्सरशिप, विज्ञापन और दूसरे मोनेटाइजेशन के जरिए कई युवा अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। यही वजह है कि अब कंटेंट क्रिएशन को सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि एक ऐसे पेशे के रूप में देखा जा रहा है, जहां लोग अपनी पसंद का काम करते हुए अपना करियर भी बना सकते हैं।
क्या टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी है क्रेज?
रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि ज्यातर क्रिएटर टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण है सस्ते इंटरनेट, स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के विस्तार को माना जा रहा है। वे अपने घर से ही वीडियो, ब्लॉग, पॉडकास्ट, कॉमेडी, एजुकेशनल कंटेंट, गेमिंग और शॉर्ट्स बनाकर लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच रहे हैं। इसका एक असर यह हुआ है कि लोकल भाषा और संस्कृति को भी नई पहचान मिल रही है। करीब 42% Gen Z क्रिएटर्स मानते हैं कि उनका कंटेंट स्थानीय परंपराओं और क्षेत्रीय कहानियों को ग्लोबल पहचान दिलाने में मदद कर रहा है।
क्या Creator Economy में बढ़ रही महिलाओं की हिस्सेदारी?
Creator Economy में अब युवा महिलाएं भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो साल में YouTube पर महिला क्रिएटर्स की संख्या 40% बढ़ी है। महिलाएं सिर्फ फैशन और ब्यूटी से जुड़े वीडियो ही नहीं बना रहीं, बल्कि एजुकेशन, कुकिंग, व्लॉगिंग और अपनी पर्सनल स्टोरीज भी शेयर कर रही हैं।

Creator के लिए क्या चुनौतियां हैं?
Gen Z के लिए कंटेंट क्रिएशन अब करियर और कमाई का बड़ा जरिया बन चुका है। लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी आती है। रिपोर्ट के मुताबिक, गलत जानकारी, दिखावे और एल्गोरिदम के दबाव जैसी चुनौतियां क्रिएटर्स के सामने हैं। आज क्रिएटर्स समझते हैं कि उनके पास लोगों की सोच और राय पर असर डालने की ताकत है। इसलिए सिर्फ Likes, Views और Viral होने पर ध्यान देना काफी नहीं है। लंबे समय तक सफल वही क्रिएटर रह सकते हैं, जो अपनी असली पहचान के साथ अच्छा और जिम्मेदार कंटेंट बनाएं।
भारत के भविष्य को कैसे बदल रही है Gen Z?
अगर यह ट्रेंड आगे भी जारी रहा, तो Gen Z सिर्फ डिजिटल दुनिया का हिस्सा नहीं होंगे, बल्कि उसे नई दिशा भी देगी। युवा सिर्फ सोशल मीडिया पर कंटेंट देख नहीं रहे, बल्कि खुद कंटेंट बना रहे हैं और नई संस्कृति को आकार दे रहे हैं।