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Ambala News: खींचतान और सियासी दांव-पेंच में बीते 5 वर्ष, नहीं दूर हुई शहर की यह 5 बड़ी समस्याएं
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Mon, 12 Jan 2026 12:49 AM IST
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शहर के नई सब्जी रोड पर घूमते हुए लावारिस गोवंश। संवाद
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अंबाला सिटी। नगर निगम के गलियारों में पिछले पांच वर्ष विकास की बातों से ज्यादा खींचतान और सियासी दांव-पेंच में बीत गए। नतीजा यह है कि 2020 के आम चुनाव में जनता से जो बड़े वायदे किए गए थे, वह आज भी जस के तस बने हुए हैं। शहर की सूरत बदलने के दावे तो बहुत हुए, लेकिन धरातल पर सफाई से लेकर लावारिस गोवंश तक की समस्या और विकराल हो गई है।
साफ-सफाई : करोड़ों खर्च, फिर भी गंदगी का अंबार
नगर निगम हर महीने शहर की साफ-सफाई पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहा है, लेकिन गलियों और मुख्य सड़कों पर कूड़े के ढेर निगम के दावों की पोल खोल रहे हैं। शहर के रोजाना करीब 200 टन कूड़ा निकलता है। डंपिंग जोन में बदइंतजामी और वार्डों में नियमित सफाई न होना आमजन के लिए बड़ी मुसीबत बना हुआ है। यह समस्या पहले भी ऐसी ही थी और आज भी ऐसी है, इसमें सुधार के प्रयास विफल ही रहे, निगम की सिर्फ कागजों में सफाई हो रही है।
लावारिस गोवंश : सड़कों पर मौत का साया, गोशाला में जगह ही नहीं
शहर की सड़कों और बाजारों में घूमते लावारिस गोवंश हादसों का सबब बन रहे हैं। शहर के रामबाग रोड, लक्ष्मी नगर, सेक्टर, कपड़ा मार्केट, हिसार रोड जैसे व्यस्त इलाकों में इनका जमावड़ा रहता है। निगम ने गोशाला बनाने के वायदे तो कई बार किए, लेकिन फाइलों से बाहर आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। डंगडेहरी में गोशाला के लिए 4.50 करोड़ से कार्य शुरू होना था, लेकिन मामला हाइकोर्ट में चला गया।
लावारिस कुत्ते : नसबंदी अभियान भी पड़ा ठंडा, अभी शेड तक नहीं बना
शहर में लावारिस कुत्तों का आतंक इस कदर है कि रोजाना जिला नागरिक अस्पताल में कुत्ते के काटने के 60 से 70 मामले पहुंच रहे हैं। इन मामलों में रोजाना 20 नए मामले शामिल होते हैं। निगम का दिसंबर 2023 में नसबंदी अभियान बंद हुआ था। अभी तक यह अभियान दोबारा शुरू नहीं हुआ है। निगम ने नसबंदी के लिए दोबारा टेंडर किया है, लेकिन अभी तक नसबंदी के लिए शेड नहीं बन सका है। शेड बनाने के लिए 1 करोड़ का टेंडर अभी लगना है, इसको लेकर फाइल चल रही है, वहीं, कुत्तों की वजह से बच्चों और बुजुर्गों का सड़क पर निकलना दूभर हो गया है।
संपत्तिकर आईडी : एक लाख से ज्यादा लोग परेशान
करीब 1.23 लाख संपत्ति कर आईडी में नाम, पता, मोबाइल नंबर और एरिया (वर्गगज) की भारी गलतियां हैं। सर्वे के दौरान हुई इन खामियों को सुधारने के लिए शिविर तो लगाए गए, लेकिन अब भी 35 हजार के करीब आईडी ही सत्यापित हो पाई हैं। एनडीसी लेने के लिए लोग कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, इसमें सुधार के लिए कई बार शिविर लगाए गए, लेकिन अभियान भी बीच में ही दम तोड़ गया।
जलभराव : नालों की सफाई का इंतजार, कई तो गाद से भरे पड़े
हर बार चुनाव में ड्रेनेज सिस्टम सुधारने का वादा किया जाता है, लेकिन हल्की बारिश में भी शहर टापू बन जाता है। नालों की समय पर सफाई न होना और अतिक्रमण इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। जलभराव से निजात पाने को लेकर इस बार कार्य तो हुआ, मगर शहर के कई क्षेत्रों में बरसाती जलभराव के कारण लोगों को इस बार भी परेशान होना पड़ा। शहर के जंडली पुल के पास से इंको चौक की तरफ जाने वाले मुख्य मार्ग पर जलभराव के कारण सड़क खराब हो रही है। यहां साइड में जलभराव रहता है।
चुनाव तक अब अफसरों के हाथ में होगी पावर
- शहर नगर निगम में मेयर व पार्षदों का कार्यकाल 13 को हो जाएगा खत्म
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। अंबाला शहर नगर निगम के निर्वाचित बोर्ड मेयर व पार्षदों का कार्यकाल 13 जनवरी को खत्म हो जाएगा। इस कार्यकाल के खत्म होने के बाद चुनाव तक अफसरों के हाथ में ही पावर होगी। वहीं, नगर निगम अंबाला शहर में मेयर व पार्षदों का कार्यकाल खत्म होने के दो दिन पहले ही शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने प्रशासनिक कमान सौंपने को लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं। यह प्रशासनिक कमान नगर निगम आयुक्त के हाथों में होगी। नगर निगम के आयुक्त ही अब प्रशासक की भूमिका निभाएंगे। सरकार के इन निर्देशों के अनुसार यह व्यवस्था नए बोर्ड के गठन यानी निर्वाचित सदस्यों की पहली बैठक होने तक लागू रहेगी।
अब प्रशासक के स्तर पर तय होंगी फाइलें
नियमों के मुताबिक निगम सदन का 5 साल का कार्यकाल पहली बैठक की तारीख से गिना जाता है। पंचकूला निगम का कार्यकाल 4 जनवरी को ही पूरा हो चुका है, जबकि सोनीपत का 12 जनवरी और अंबाला शहर में निर्वाचित मेयर व पार्षदों की शक्तियां 13 जनवरी को समाप्त हो जाएंगी। अब शहर के विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों की पूरी फाइलें सीधे आयुक्त यानी प्रशासक के स्तर पर तय होंगी।
कार्यकाल खत्म होते ही संभालेंगे कमान
यह निर्देश निगम के 5 वर्ष के कार्यकाल की समाप्ति तिथि से प्रभावी होंगे। अंबाला नगर निगम में मेयर और पार्षदों का कार्यकाल 13 जनवरी को खत्म रहा है। वहीं, सरकार ने साफ किया है कि निगम आयुक्तों को यह जिम्मेदारी उनकी वर्तमान ड्यूटी के साथ ही निभानी होगी। इस अतिरिक्त कार्यभार के लिए उन्हें किसी भी प्रकार का अलग से मेहनताना या भत्ता नहीं दिया जाएगा।
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साफ-सफाई : करोड़ों खर्च, फिर भी गंदगी का अंबार
नगर निगम हर महीने शहर की साफ-सफाई पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहा है, लेकिन गलियों और मुख्य सड़कों पर कूड़े के ढेर निगम के दावों की पोल खोल रहे हैं। शहर के रोजाना करीब 200 टन कूड़ा निकलता है। डंपिंग जोन में बदइंतजामी और वार्डों में नियमित सफाई न होना आमजन के लिए बड़ी मुसीबत बना हुआ है। यह समस्या पहले भी ऐसी ही थी और आज भी ऐसी है, इसमें सुधार के प्रयास विफल ही रहे, निगम की सिर्फ कागजों में सफाई हो रही है।
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लावारिस गोवंश : सड़कों पर मौत का साया, गोशाला में जगह ही नहीं
शहर की सड़कों और बाजारों में घूमते लावारिस गोवंश हादसों का सबब बन रहे हैं। शहर के रामबाग रोड, लक्ष्मी नगर, सेक्टर, कपड़ा मार्केट, हिसार रोड जैसे व्यस्त इलाकों में इनका जमावड़ा रहता है। निगम ने गोशाला बनाने के वायदे तो कई बार किए, लेकिन फाइलों से बाहर आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। डंगडेहरी में गोशाला के लिए 4.50 करोड़ से कार्य शुरू होना था, लेकिन मामला हाइकोर्ट में चला गया।
लावारिस कुत्ते : नसबंदी अभियान भी पड़ा ठंडा, अभी शेड तक नहीं बना
शहर में लावारिस कुत्तों का आतंक इस कदर है कि रोजाना जिला नागरिक अस्पताल में कुत्ते के काटने के 60 से 70 मामले पहुंच रहे हैं। इन मामलों में रोजाना 20 नए मामले शामिल होते हैं। निगम का दिसंबर 2023 में नसबंदी अभियान बंद हुआ था। अभी तक यह अभियान दोबारा शुरू नहीं हुआ है। निगम ने नसबंदी के लिए दोबारा टेंडर किया है, लेकिन अभी तक नसबंदी के लिए शेड नहीं बन सका है। शेड बनाने के लिए 1 करोड़ का टेंडर अभी लगना है, इसको लेकर फाइल चल रही है, वहीं, कुत्तों की वजह से बच्चों और बुजुर्गों का सड़क पर निकलना दूभर हो गया है।
संपत्तिकर आईडी : एक लाख से ज्यादा लोग परेशान
करीब 1.23 लाख संपत्ति कर आईडी में नाम, पता, मोबाइल नंबर और एरिया (वर्गगज) की भारी गलतियां हैं। सर्वे के दौरान हुई इन खामियों को सुधारने के लिए शिविर तो लगाए गए, लेकिन अब भी 35 हजार के करीब आईडी ही सत्यापित हो पाई हैं। एनडीसी लेने के लिए लोग कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, इसमें सुधार के लिए कई बार शिविर लगाए गए, लेकिन अभियान भी बीच में ही दम तोड़ गया।
जलभराव : नालों की सफाई का इंतजार, कई तो गाद से भरे पड़े
हर बार चुनाव में ड्रेनेज सिस्टम सुधारने का वादा किया जाता है, लेकिन हल्की बारिश में भी शहर टापू बन जाता है। नालों की समय पर सफाई न होना और अतिक्रमण इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। जलभराव से निजात पाने को लेकर इस बार कार्य तो हुआ, मगर शहर के कई क्षेत्रों में बरसाती जलभराव के कारण लोगों को इस बार भी परेशान होना पड़ा। शहर के जंडली पुल के पास से इंको चौक की तरफ जाने वाले मुख्य मार्ग पर जलभराव के कारण सड़क खराब हो रही है। यहां साइड में जलभराव रहता है।
चुनाव तक अब अफसरों के हाथ में होगी पावर
- शहर नगर निगम में मेयर व पार्षदों का कार्यकाल 13 को हो जाएगा खत्म
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। अंबाला शहर नगर निगम के निर्वाचित बोर्ड मेयर व पार्षदों का कार्यकाल 13 जनवरी को खत्म हो जाएगा। इस कार्यकाल के खत्म होने के बाद चुनाव तक अफसरों के हाथ में ही पावर होगी। वहीं, नगर निगम अंबाला शहर में मेयर व पार्षदों का कार्यकाल खत्म होने के दो दिन पहले ही शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने प्रशासनिक कमान सौंपने को लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं। यह प्रशासनिक कमान नगर निगम आयुक्त के हाथों में होगी। नगर निगम के आयुक्त ही अब प्रशासक की भूमिका निभाएंगे। सरकार के इन निर्देशों के अनुसार यह व्यवस्था नए बोर्ड के गठन यानी निर्वाचित सदस्यों की पहली बैठक होने तक लागू रहेगी।
अब प्रशासक के स्तर पर तय होंगी फाइलें
नियमों के मुताबिक निगम सदन का 5 साल का कार्यकाल पहली बैठक की तारीख से गिना जाता है। पंचकूला निगम का कार्यकाल 4 जनवरी को ही पूरा हो चुका है, जबकि सोनीपत का 12 जनवरी और अंबाला शहर में निर्वाचित मेयर व पार्षदों की शक्तियां 13 जनवरी को समाप्त हो जाएंगी। अब शहर के विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों की पूरी फाइलें सीधे आयुक्त यानी प्रशासक के स्तर पर तय होंगी।
कार्यकाल खत्म होते ही संभालेंगे कमान
यह निर्देश निगम के 5 वर्ष के कार्यकाल की समाप्ति तिथि से प्रभावी होंगे। अंबाला नगर निगम में मेयर और पार्षदों का कार्यकाल 13 जनवरी को खत्म रहा है। वहीं, सरकार ने साफ किया है कि निगम आयुक्तों को यह जिम्मेदारी उनकी वर्तमान ड्यूटी के साथ ही निभानी होगी। इस अतिरिक्त कार्यभार के लिए उन्हें किसी भी प्रकार का अलग से मेहनताना या भत्ता नहीं दिया जाएगा।

शहर के नई सब्जी रोड पर घूमते हुए लावारिस गोवंश। संवाद

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शहर के नई सब्जी रोड पर घूमते हुए लावारिस गोवंश। संवाद

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शहर के नई सब्जी रोड पर घूमते हुए लावारिस गोवंश। संवाद

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