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Bhiwani News: जजों की कमी से लंबित केसों पर बोले न्यायमूर्ति सूर्यकांत-अब पहले जैसी स्थिति नहीं, बहुत सुधार हुआ आगे भी होगा
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सीबीएलयू में आयोजित पांचवां दीक्षांत समारोह को संबोधित करते सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न
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भिवानी। जजों की कमी से लंबित मामलों को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही, काफी सुधार हुआ है और आगे भी सुधार होता रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रणाली में एआई का प्रयोग होगा लेकिन फैसले जज अपने विवेक से ही सुनाएंगे।
शनिवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत भिवानी स्थित चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए और विद्यार्थियों को डिग्रियां वितरित कीं। समारोह की अध्यक्षता हरियाणा के राज्यपाल असीम घोष ने की। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और सीबीएलयू की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी भी मौजूद रहीं।
दीक्षांत समारोह में 500 मेधावी छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 43 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और 12 को पीएचडी की डिग्रियां दी गईं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि सीबीएलयू में अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं जिनके सामने सफलता के लिए शहरी विद्यार्थियों की तुलना में अधिक चुनौतियां होती हैं। ऐसे में यदि ग्रामीण विद्यार्थी कड़ी मेहनत, लगन और निष्ठा से कार्य करें तो वे निश्चित रूप से सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
एआई के प्रयोग पर उन्होंने कहा कि इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं। न्यायिक प्रणाली में इसका उपयोग किया जा रहा है लेकिन न्यायिक फैसले केवल जज अपने विवेक से ही लेंगे।
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शनिवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत भिवानी स्थित चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए और विद्यार्थियों को डिग्रियां वितरित कीं। समारोह की अध्यक्षता हरियाणा के राज्यपाल असीम घोष ने की। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और सीबीएलयू की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी भी मौजूद रहीं।
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दीक्षांत समारोह में 500 मेधावी छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 43 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और 12 को पीएचडी की डिग्रियां दी गईं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि सीबीएलयू में अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं जिनके सामने सफलता के लिए शहरी विद्यार्थियों की तुलना में अधिक चुनौतियां होती हैं। ऐसे में यदि ग्रामीण विद्यार्थी कड़ी मेहनत, लगन और निष्ठा से कार्य करें तो वे निश्चित रूप से सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
एआई के प्रयोग पर उन्होंने कहा कि इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं। न्यायिक प्रणाली में इसका उपयोग किया जा रहा है लेकिन न्यायिक फैसले केवल जज अपने विवेक से ही लेंगे।

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