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Chandigarh-Haryana News: 5 नवंबर को अमित शाह करेंगे एशिया के सबसे ऊंचे शहीद स्मारक का उद्घाटन
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- अंबाला में 22 एकड़ में 700 से 800 करोड़ रुपये से तैयार हुआ स्मारक
- 23 गैलरियों में दिखेगा 1857 की क्रांति का इतिहास, 700 से अधिक शहीदों के नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अंबाला छावनी में 1857 की पहली आजादी की लड़ाई को समर्पित एशिया के सबसे ऊंचे शहीद स्मारक का उद्घाटन पांच नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। करीब 22 एकड़ में 700 से 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस स्मारक को छह नवंबर से आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।उद्घाटन के बाद अंबाला छावनी के गांधी ग्राउंड में रैली भी होगी। ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने चंडीगढ़ स्थित सचिवालय में यह जानकारी दी।
विज ने दावा किया कि यह एशिया का सबसे ऊंचा शहीद स्मारक है। उन्होंने बताया कि स्मारक में 1857 की क्रांति का इतिहास आधुनिक तकनीक के माध्यम से दिखाया जाएगा। परिसर में 23 अत्याधुनिक गैलरियां बनाई गई हैं। इनमें 360 डिग्री प्रोजेक्शन मैपिंग के साथ ध्वनि और लेजर शो के जरिये इतिहास को समझने का अवसर मिलेगा। यहां 700 से अधिक अमर शहीदों के नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किए गए हैं। देश के 28 ऐतिहासिक स्थलों की पवित्र मिट्टी भी स्मारक में संग्रहित की गई है।
स्मारक में कमल के फूल के आकार का 63 मीटर ऊंचा मेमोरियल टावर बनाया गया है जो इसका प्रमुख आकर्षण होगा। सरकार ने प्रदेश के स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को भी यहां भ्रमण कराने के निर्देश दिए हैं ताकि नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की जानकारी मिल सके।
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- 23 गैलरियों में दिखेगा 1857 की क्रांति का इतिहास, 700 से अधिक शहीदों के नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अंबाला छावनी में 1857 की पहली आजादी की लड़ाई को समर्पित एशिया के सबसे ऊंचे शहीद स्मारक का उद्घाटन पांच नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। करीब 22 एकड़ में 700 से 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस स्मारक को छह नवंबर से आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।उद्घाटन के बाद अंबाला छावनी के गांधी ग्राउंड में रैली भी होगी। ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने चंडीगढ़ स्थित सचिवालय में यह जानकारी दी।
विज ने दावा किया कि यह एशिया का सबसे ऊंचा शहीद स्मारक है। उन्होंने बताया कि स्मारक में 1857 की क्रांति का इतिहास आधुनिक तकनीक के माध्यम से दिखाया जाएगा। परिसर में 23 अत्याधुनिक गैलरियां बनाई गई हैं। इनमें 360 डिग्री प्रोजेक्शन मैपिंग के साथ ध्वनि और लेजर शो के जरिये इतिहास को समझने का अवसर मिलेगा। यहां 700 से अधिक अमर शहीदों के नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किए गए हैं। देश के 28 ऐतिहासिक स्थलों की पवित्र मिट्टी भी स्मारक में संग्रहित की गई है।
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स्मारक में कमल के फूल के आकार का 63 मीटर ऊंचा मेमोरियल टावर बनाया गया है जो इसका प्रमुख आकर्षण होगा। सरकार ने प्रदेश के स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को भी यहां भ्रमण कराने के निर्देश दिए हैं ताकि नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की जानकारी मिल सके।
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