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श्राद्ध की श्रद्धा न पड़ जाए भारी: गोवंश को तैलीय भोजन से बचें, रूमन एसिडोसिस से खतरा; मौत भी हो सकती है

Thu, 01 Oct 2026 08:09 AM IST
Nivedita अरुण शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
अरुण शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Thu, 01 Oct 2026 08:09 AM IST
सार

हरियाणा पशु पालन एवं डेयरी विभाग से सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल बनवाला ने बताया कि गोवंश का प्राकृतिक भोजन सूखा या हरा चारा ही होता है। यदि उसे अनाज वाला तैलीय भोजन देंगे तो शरीर में अम्ल का स्तर घट जाता है।

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Feeding excessive rich food to cattle can prove fatal for them rumen acidosis
गोवंश को अधिक पकवान न खिलाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्राद्ध पक्ष के दौरान धार्मिक आस्था के चलते गोवंश को अधिक पकवान खिलाना उनकी मौत का कारण बन सकता है। अधिक तैलीय भोजन देने से गोवंश रूमन एसिडोसिस की चपेट में आ सकते हैं। इससे गोवंशों की आंतों में अम्ल (तेजाब) की अधिकता हो जाती है और पाचन शक्ति पर विपरीत असर पड़ता है। खून के साथ तेजाब का मिश्रण हो सकता है। फेफड़े और हृदय काम करना बंद कर देते हैं। सांस लेने में दिक्कत बढ़ जाती है। इससे गोवंश की मौत हो सकती है।
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हरियाणा पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निदेशक डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि गोवंश के पेट में भोजन पचाने के लिए सूक्ष्म जीव (रूमन माइक्रो फ्लोरा) काम करते हैं। तैलीय भोजन जैसे पूड़ी, हलवा आदि से इन सूक्ष्म जीवों पर वसा की परत चढ़ जाती है। इससे सूक्ष्म जीव भोजन पचाना बंद कर देते हैं। इस कारण से गोवंश के पेट में अफरा बनने लगता है।
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अम्ल का स्तर नीचे गिरने से होगी परेशानी
हरियाणा पशु पालन एवं डेयरी विभाग से सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल बनवाला ने बताया कि गोवंश का प्राकृतिक भोजन सूखा या हरा चारा ही होता है। यदि उसे अनाज वाला तैलीय भोजन देंगे तो शरीर में अम्ल का स्तर घट जाता है। यदि तैलीय भोजन बासी है तो फूड पॉइजनिंग हो सकती है जिससे गोवंश की मौत हो सकती है।
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गोवंश में अफरा के लक्षण
  • गोवंश सिर नीचे करके बैठा है। चलते समय लंगड़ा रहा है या बैठा है और जुगाली नहीं कर रहा।
  • गोवंश का पेट भी फूल जाता है और पेट दबाने पर पानी जैसी आवाज आती है।
  • दुधारू गोवंश का दूध उत्पादन कम हो जाता है। सुस्त रहने के साथ ही भोजन कम कर देता है।
  • गोबर में दुर्गंध आएगी। दस्त भी हो सकते हैं। 

प्राथमिक उपचार के रूप में गोवंश को गुनगुने पानी के साथ 50 से 100 ग्राम तक मीठा सोडा दे सकते हैं। भोजन में केवल सूखी घास या सूखी तूड़ी ही दें।
 
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