फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Officials stalled RTI for five years Faridabad Municipal Corporation fined ₹10,000 within 30 days

पांच साल तक आरटीआई आवेदन को घुमाते रहे अफसर: फरीदाबाद निगम पर 10 हजार का हर्जाना, 30 दिन में करना होगा भुगतान

Thu, 01 Oct 2026 11:34 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Thu, 01 Oct 2026 11:34 AM IST
सार

आवेदक गौरी मौलेखी ने 23 दिसंबर 2020 को आरटीआई लगाकर नगर निगम से निगरानी एवं क्रियान्वयन समिति के गठन, मास्टर प्लान, पशु जन्म नियंत्रण के लिए नियुक्त एजेंसी और भारतीय नस्ल के कुत्तों को गोद लेने को बढ़ावा देने के लिए उठाए कदमों की जानकारी मांगी थी।

विज्ञापन
Officials stalled RTI for five years Faridabad Municipal Corporation fined ₹10,000 within 30 days
सूचना का अधिकार (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फरीदाबाद नगर निगम में सूचना के अधिकार के एक आवेदन को पांच साल से ज्यादा समय तक एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में घुमाने का मामला सामने आया है। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने मामले में निगम को आरटीआई आवेदक को 10 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

विज्ञापन


मामला पशु जन्म नियंत्रण नियमों, 2001 के पालन से जुड़ी जानकारी का है। आवेदक गौरी मौलेखी ने 23 दिसंबर 2020 को आरटीआई लगाकर नगर निगम से निगरानी एवं क्रियान्वयन समिति के गठन, मास्टर प्लान, पशु जन्म नियंत्रण के लिए नियुक्त एजेंसी और भारतीय नस्ल के कुत्तों को गोद लेने को बढ़ावा देने के लिए उठाए कदमों की जानकारी मांगी थी।
विज्ञापन


मामला सूचना आयोग तक पहुंचा तो 21 दिसंबर 2021 से 23 जून 2026 तक कई बार आदेश जारी हुए। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, लेकिन पूरी जानकारी समय पर नहीं मिली। रिकॉर्ड के अनुसार कुछ जानकारी 21 अक्तूबर 2021 को और शेष जानकारी 17 जुलाई 2025 को दी गई। आयोग ने यह भी पाया कि दी गई जानकारी में भी कुछ बिंदुओं का पूरा जवाब नहीं था।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक-दूसरे के पाले में डालते रहे गेंद
आयोग ने कहा कि आरटीआई को अलग-अलग विभागों और शाखाओं के बीच भेजते रहना सूचना नहीं देने का उचित कारण नहीं हो सकता। संबंधित अधिकारियों के जवाब भी संतोषजनक नहीं पाए गए। यहां तक कि आयोग के व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश के बावजूद 11 सितंबर 2026 की सुनवाई में संबंधित सैनिटरी इंस्पेक्टर के बजाय एक सहायक सैनिटरी इंस्पेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुआ।

राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सुरा ने कहा कि आरटीआई का अधिकार प्रशासनिक देरी के कारण बेअसर नहीं किया जा सकता। आयोग ने नगर निगम आयुक्त को जिम्मेदार अधिकारियों की विभागीय जांच कराने को कहा है। जांच दो महीने में पूरी करनी होगी और 15 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट आयोग को देनी होगी।


इसके अलावा शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर समितियों में आरटीआई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को समयसीमा में आवेदन निपटाने और विभागों के बीच पत्राचार के नाम पर मामले लंबित न रखने की व्यवस्था बनाने को कहा गया है।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed