धरातल पर नहीं उतरी कागजी हरियाली: हरियाणा में पांच साल में तालाबों के किनारे लगे 39 लाख पौधे, बचे 16.50 लाख
मनरेगा स्कीम के तहत प्रदेश में तालाबों के आसपास ये पौधे लगाए गए थे। सही निगरानी नहीं होने से कुल 42 फीसदी पौधे ही जीवित बचे हैं। कई जिलों में पौधों का सर्वाइवल रेट 20 फीसदी से भी कम रहा।
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हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण और तालाबों के आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए पिछले पांच साल में करीब 39 लाख पौधे लगाए गए लेकिन उचित देखभाल नहीं होने से इनमें से सिर्फ 16.50 लाख पौधे ही जीवित बचे। यानी 100 में से महज 42। हरियाणा विधानसभा की पर्यावरण एवं प्रदूषण विषय समिति की पहली रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।
विधानसभा सत्र के दौरान सदन पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, मनरेगा स्कीम के तहत प्रदेश में तालाबों के आसपास ये पौधे लगाए गए थे। सही निगरानी नहीं होने से कुल 42 फीसदी पौधे ही जीवित बचे हैं। कई जिलों में पौधों का सर्वाइवल रेट 20 फीसदी से भी कम रहा। इससे पौधरोपण अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तालाबों के आसपास लगाए पौधों की उचित निगरानी नहीं हो रही है। सिरसा जिला इस मामले में सबसे आगे रहा। वहां 78.83 प्रतिशत पौधे जीवित रहे। वहीं, फतेहाबाद में केवल 11.06 प्रतिशत पौधे जीवित बचे, जो राज्य में सबसे कम है। ऐसी स्थिति फरीदाबाद की भी है, जहां सिर्फ 17 फीसदी पौधे ही जीवित रह पाए।
रिपोर्ट दर्शाती है कि कई जिलों में पोंड अथॉरिटी के माध्यम से भी हजारों पौधे लगाए गए, जिनका उद्देश्य तालाबों के आसपास हरियाली बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना था। हालांकि, रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख नहीं है कि पोंड अथॉरिटी की ओर से जो पौधे लगाए थे, उनका सर्वाइवल रेट कितना है।
अब वन विभाग को सौंपी देखरेख की जिम्मेदारी
विधानसभा समिति ने पाया कि पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी न तो पंचायत विभाग के पास है और न ही वन विभाग के। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पौधरोपण के बाद कई जिलों में देखरेख और संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि भविष्य में ऐसे पौधरोपण कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग को पौधों की निगरानी और देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। साथ ही, नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है ताकि लगाए गए पौधे लंबे समय तक जीवित रह सकें और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य पूरे हो सकें।
इन पांच जिलों का सबसे ज्यादा जीवित रहे पौधे
जिला कुल पौधे जीवित पौधे सर्वाइवल %
सिरसा 3,47,028 2,57,000 78.83%
अंबाला 1,43,720 84,423 61.41%
गुरुग्राम 63,333 34,941 58.10%
यमुनानगर 1,34,471 65,632 53.64%
जींद 1,45,854 51,113 53.55%
इन पांच जिलों की सबसे खराब स्थिति
जिला कुल पौधे जीवित पौधे सर्वाइवल %
भिवानी 2,84,841 84,128 31.61%
करनाल 2,10,853 39,263 21.04%
दादरी 79,736 16,210 22.21%
फरीदाबाद 25,537 3,814 17.61%
फतेहाबाद 260562 28807 11.06%