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Chandigarh-Haryana News: प्रदेश के सभी ढाबों में एसटीपी व सीटीपी को अनिवार्य किया
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- फोटो
- नियम न मानने पर सख्त कार्रवाई तय
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी ढाबों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) व कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीपी) को अनिवार्य कर दिया है। विशेष रूप से जीटी रोड और मुरथल क्षेत्र में संचालित ढाबों को अब जल प्रदूषण रोकने के लिए ठोस इंतजाम करने होंगे। वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने निर्देश दिए कि बिना शोधन के गंदा पानी छोड़ने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
चंडीगढ़ में बुधवार को विधायक देवेंद्र कादियान के नेतृत्व में आए मुरथल के ढाबा संचालकों के साथ आयोजित अहम बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री नरबीर सिंह ने कहा कि सभी ढाबों में गंदे पानी के शोधन के लिए व्यक्तिगत या सामूहिक व्यवस्था अनिवार्य होगी, ताकि पानी का दोबारा उपयोग हो सके और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
मंत्री ने बताया कि जो ढाबा संचालक भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति के बिना ढाबे चला रहे हैं, उन्हें नगर निगम से जुड़े कर और अन्य वैधानिक औपचारिकताएं तुरंत पूरी करनी होंगी। वहीं, जिन ढाबों के पास अनुमति पहले से है, उन्हें भी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। नियमों की अनदेखी करने पर जुर्माना और ढाबा बंद करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ढाबा संचालकों की समस्याओं का समाधान निकालते हुए पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। जब किसी ढाबे के खिलाफ निरीक्षण के बाद बंद करने का आदेश जारी होता है तो निर्माण की तिथि से लेकर निरीक्षण तक की अवधि के आधार पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। मंत्री ने ढाबा संचालकों से अपील की है कि वे समय रहते नियमों का पालन करें।
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- नियम न मानने पर सख्त कार्रवाई तय
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी ढाबों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) व कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीपी) को अनिवार्य कर दिया है। विशेष रूप से जीटी रोड और मुरथल क्षेत्र में संचालित ढाबों को अब जल प्रदूषण रोकने के लिए ठोस इंतजाम करने होंगे। वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने निर्देश दिए कि बिना शोधन के गंदा पानी छोड़ने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
चंडीगढ़ में बुधवार को विधायक देवेंद्र कादियान के नेतृत्व में आए मुरथल के ढाबा संचालकों के साथ आयोजित अहम बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री नरबीर सिंह ने कहा कि सभी ढाबों में गंदे पानी के शोधन के लिए व्यक्तिगत या सामूहिक व्यवस्था अनिवार्य होगी, ताकि पानी का दोबारा उपयोग हो सके और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
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मंत्री ने बताया कि जो ढाबा संचालक भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति के बिना ढाबे चला रहे हैं, उन्हें नगर निगम से जुड़े कर और अन्य वैधानिक औपचारिकताएं तुरंत पूरी करनी होंगी। वहीं, जिन ढाबों के पास अनुमति पहले से है, उन्हें भी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। नियमों की अनदेखी करने पर जुर्माना और ढाबा बंद करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ढाबा संचालकों की समस्याओं का समाधान निकालते हुए पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। जब किसी ढाबे के खिलाफ निरीक्षण के बाद बंद करने का आदेश जारी होता है तो निर्माण की तिथि से लेकर निरीक्षण तक की अवधि के आधार पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। मंत्री ने ढाबा संचालकों से अपील की है कि वे समय रहते नियमों का पालन करें।