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Fatehabad News: बेसहारा पशुओं के हमलों के पीड़ित परिवारों को मिलेगा 5 लाख तक का मुआवजा
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फतेहाबाद। हरियाणा सरकार की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी महत्वाकांक्षी योजना दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना के तहत अब आवारा और बेसहारा पशुओं के हमलों से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
अतिरिक्त उपायुक्त अनुराग ढालिया ने बुधवार को बताया कि योजना के अंतर्गत बेसहारा गाय, सांड़, भैंस, नीलगाय व आवारा कुत्तों के हमले से हुई दुर्घटनाओं में यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु, चोट या दिव्यांगता होती है तो प्रभावित परिवार को मुआवजा दिया जाता है।
मृत्यु अथवा 70 प्रतिशत या उससे अधिक स्थायी पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति में पीड़ित परिवार को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलेगी। वहीं, 70 प्रतिशत से कम आंशिक दिव्यांगता के मामलों में दिव्यांगता के प्रतिशत के अनुसार मुआवजा निर्धारित किया जाएगा। अनुराग ढालिया ने बताया कि कुत्ते के काटने से हुई चोट के मामलों में भी आर्थिक सहायता का प्रावधान है, जिसकी राशि कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 के प्रावधानों के अनुरूप तय की जाती है।
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जो परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में पंजीकृत हों, घटना आवारा पशु या कुत्ते के कारण हुई हो। पीड़ित परिवार को घटना की तिथि से 90 दिनों के भीतर दावा प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
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अतिरिक्त उपायुक्त अनुराग ढालिया ने बुधवार को बताया कि योजना के अंतर्गत बेसहारा गाय, सांड़, भैंस, नीलगाय व आवारा कुत्तों के हमले से हुई दुर्घटनाओं में यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु, चोट या दिव्यांगता होती है तो प्रभावित परिवार को मुआवजा दिया जाता है।
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मृत्यु अथवा 70 प्रतिशत या उससे अधिक स्थायी पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति में पीड़ित परिवार को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलेगी। वहीं, 70 प्रतिशत से कम आंशिक दिव्यांगता के मामलों में दिव्यांगता के प्रतिशत के अनुसार मुआवजा निर्धारित किया जाएगा। अनुराग ढालिया ने बताया कि कुत्ते के काटने से हुई चोट के मामलों में भी आर्थिक सहायता का प्रावधान है, जिसकी राशि कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 के प्रावधानों के अनुरूप तय की जाती है।
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जो परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में पंजीकृत हों, घटना आवारा पशु या कुत्ते के कारण हुई हो। पीड़ित परिवार को घटना की तिथि से 90 दिनों के भीतर दावा प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।