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Jhajjar-Bahadurgarh News: बालश्रम कानून और दंडात्मक प्रावधानों पर किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 18 Jun 2026 07:14 PM IST
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फोटो-55: बहादुरगढ़ में श्रमिकों को बाल श्रम के बारे में जागरूक करते वालंटियर। स्रोत संस्था
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। बाल श्रम उन्मूलन और बच्चों के शिक्षा के अधिकार को लेकर वीरवार को औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्रियों और ढाबों पर जागरूकता अभियान चलाया गया।
जेसी कॉलेज ऑफ लॉ और एमडीडी ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अभियान के दौरान श्रमिकों, ढाबा संचालकों और फैक्ट्री प्रबंधन को बाल श्रम से जुड़े कानूनों, दंडात्मक प्रावधानों और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के महत्व की जानकारी दी गई। अभियान का उद्देश्य लोगों को बालश्रम के खिलाफ एकजुट कर इस सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए जागरूक करना था।
आयोजकों ने बताया कि 12 जून को विश्व बालश्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। जिले में बालश्रम की समस्या को देखते हुए पूरे जून को बाल श्रम निषेध जागरूकता माह के रूप में मनाया जा रहा है।
एमडीडी ऑफ इंडिया के जिला समन्वयक मनोज कुमार ने बताया कि ऐसा कोई भी कार्य, जो बच्चों को समय से पहले स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर करे या उन्हें पढ़ाई के साथ लंबे एवं कठिन कार्य करने पर विवश करे, बालश्रम की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि बालश्रम करवाना कानूनी अपराध है।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पैनल एडवोकेट कुमारी वर्षा कनौजिया ने कहा कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य नहीं कराया जाना चाहिए। शिक्षा प्राप्त करना उनका पहला अधिकार है। उन्होंने बताया कि 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोर-किशोरियों को खतरनाक उद्योगों और व्यवसायों में नियोजित नहीं किया जा सकता।
एडवोकेट लक्ष्मी ने कहा कि बालश्रम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए योगदान देना चाहिए और बाल श्रम को सामूहिक रूप से नकारना चाहिए।
इस अवसर पर पैरा लीगल वालंटियर नीता, एमडीडी ऑफ इंडिया के जिला समन्वयक मनोज कुमार, पैनल एडवोकेट वर्षा कनौजिया, एडवोकेट लक्ष्मी तथा जेसी कॉलेज ऑफ लॉ के छात्र-छात्राएं तुषार, तुशांक, खुशी, आकृति, समृद्धि और कृष सहित ढाबा संचालक व फैक्ट्री कर्मी उपस्थित रहे।
बहादुरगढ़। बाल श्रम उन्मूलन और बच्चों के शिक्षा के अधिकार को लेकर वीरवार को औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्रियों और ढाबों पर जागरूकता अभियान चलाया गया।
जेसी कॉलेज ऑफ लॉ और एमडीडी ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अभियान के दौरान श्रमिकों, ढाबा संचालकों और फैक्ट्री प्रबंधन को बाल श्रम से जुड़े कानूनों, दंडात्मक प्रावधानों और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के महत्व की जानकारी दी गई। अभियान का उद्देश्य लोगों को बालश्रम के खिलाफ एकजुट कर इस सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए जागरूक करना था।
आयोजकों ने बताया कि 12 जून को विश्व बालश्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। जिले में बालश्रम की समस्या को देखते हुए पूरे जून को बाल श्रम निषेध जागरूकता माह के रूप में मनाया जा रहा है।
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एमडीडी ऑफ इंडिया के जिला समन्वयक मनोज कुमार ने बताया कि ऐसा कोई भी कार्य, जो बच्चों को समय से पहले स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर करे या उन्हें पढ़ाई के साथ लंबे एवं कठिन कार्य करने पर विवश करे, बालश्रम की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि बालश्रम करवाना कानूनी अपराध है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पैनल एडवोकेट कुमारी वर्षा कनौजिया ने कहा कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य नहीं कराया जाना चाहिए। शिक्षा प्राप्त करना उनका पहला अधिकार है। उन्होंने बताया कि 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोर-किशोरियों को खतरनाक उद्योगों और व्यवसायों में नियोजित नहीं किया जा सकता।
एडवोकेट लक्ष्मी ने कहा कि बालश्रम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए योगदान देना चाहिए और बाल श्रम को सामूहिक रूप से नकारना चाहिए।
इस अवसर पर पैरा लीगल वालंटियर नीता, एमडीडी ऑफ इंडिया के जिला समन्वयक मनोज कुमार, पैनल एडवोकेट वर्षा कनौजिया, एडवोकेट लक्ष्मी तथा जेसी कॉलेज ऑफ लॉ के छात्र-छात्राएं तुषार, तुशांक, खुशी, आकृति, समृद्धि और कृष सहित ढाबा संचालक व फैक्ट्री कर्मी उपस्थित रहे।