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Jhajjar-Bahadurgarh News: पढ़ाई कम, जान का जोखिम ज्यादा
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बादली। बादली गांव के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय आज भी जर्जर भवन में चल रहा है। मरम्मत के लिए प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाए हैं। प्राथमिक पाठशाला को भी कन्या स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है। ग्राम पंचायत व शिक्षा विभाग भी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा।
स्कूल के दो मंजिला भवन में छह कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। कमरों के चारों तरफ खतरनाक निशान की पट्टी तो बना दी गई लेकिन इसके साथ ही प्रांगण में कक्षाएं लगाई जा रही हैं। स्कूल दो शिफ्ट में चलता है। पहली शिफ्ट में छठी से 12वीं तक और दूसरी में पहली से पांचवीं तक के बच्चे आते हैं। बच्चों की कुल संख्या 366 है।
किसी भी वक्त गिर सकती हैं छत और दीवारें
विद्यालय की छत और दीवारें इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि वे किसी भी वक्त गिर सकती हैं। कक्षाओं की दीवारों पर दरारें इतनी बड़ी हैं कि प्लास्टर उखड़ने लगा है। असुरक्षित माहौल में बच्चों को पढ़ना पड़ता है जहां हर पल किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहता है।
कई बार प्रशासन को कराया अवगत
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन और शिक्षा विभाग को सूचित कर चुके हैं लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रदीप और मनदीप का कहना है कि प्रशासन को जर्जर भवन का जीर्णोद्धार करना चाहिए या फिर बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर पढ़ाई का वैकल्पिक इंतजाम करना चाहिए।
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य मनोज कुमार का कहना है कि जर्जर भवन की मरम्मत करने के लिए पत्र भेजे गए हैं। कमरों की संख्या मात्र 8 है जबकि 12वीं तक स्कूल लगाया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता हवा सिंह मलिक की ओर से भी एक कमरे का निर्माण करवाया जा रहा है।
स्कूल के दो मंजिला भवन में छह कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। कमरों के चारों तरफ खतरनाक निशान की पट्टी तो बना दी गई लेकिन इसके साथ ही प्रांगण में कक्षाएं लगाई जा रही हैं। स्कूल दो शिफ्ट में चलता है। पहली शिफ्ट में छठी से 12वीं तक और दूसरी में पहली से पांचवीं तक के बच्चे आते हैं। बच्चों की कुल संख्या 366 है।
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किसी भी वक्त गिर सकती हैं छत और दीवारें
विद्यालय की छत और दीवारें इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि वे किसी भी वक्त गिर सकती हैं। कक्षाओं की दीवारों पर दरारें इतनी बड़ी हैं कि प्लास्टर उखड़ने लगा है। असुरक्षित माहौल में बच्चों को पढ़ना पड़ता है जहां हर पल किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहता है।
कई बार प्रशासन को कराया अवगत
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन और शिक्षा विभाग को सूचित कर चुके हैं लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रदीप और मनदीप का कहना है कि प्रशासन को जर्जर भवन का जीर्णोद्धार करना चाहिए या फिर बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर पढ़ाई का वैकल्पिक इंतजाम करना चाहिए।
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य मनोज कुमार का कहना है कि जर्जर भवन की मरम्मत करने के लिए पत्र भेजे गए हैं। कमरों की संख्या मात्र 8 है जबकि 12वीं तक स्कूल लगाया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता हवा सिंह मलिक की ओर से भी एक कमरे का निर्माण करवाया जा रहा है।