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Karnal News: सरसों खरीद में देरी से बढ़ी आढ़ती किसानों की चिंता
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सरसों खरीद में देरी से बढ़ी आढ़ती किसानों की चिंता
आढ़तियों का उदासीन रवैया, किसानों को एमएसपी से कम दाम मिलने का आरोप
आज से शुरू होगी सरकारी खरीद
फोटो 104/105
करनाल/इंद्री।
प्रदेश की मंडियों में 28 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद शुरू होने जा रही है लेकिन जिले की अनाज मंडी घरौंडा और इंद्री में इसके प्रति आढ़तियों का उदासीन रवैया सामने आया है। किसानों ओर आढ़तियों का कहना है कि देरी से, बिना किसी मेहनताना या सरकारी सहायता के सरसों की खरीद करना उनके लिए घाटे का सौदा बन रहा है।
आढ़तियों ने कहा कि सरकार को सरसों की खरीद एक मार्च से शुरू करनी चाहिए क्योंकि क्षेत्र में फसल की आवक फरवरी से ही शुरू हो जाती है और मार्च के अंत तक केवल 15 से 20 प्रतिशत फसल ही बचती है।
इंद्री के आढ़ती देवी चंद और जय प्रकाश ने बताया कि सरसों की फसल को सुखाने, भंडारण और सफाई में काफी खर्च आता है। इसके अलावा मंडी में पड़ी फसल की रखवाली की जिम्मेदारी भी आढ़तियों पर ही होती है। उन्होंने मांग उठाई कि धान और गेहूं की तरह सरसों की खरीद पर भी आढ़त का भुगतान किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े।
किसानों को उठाना पड़ रहा नुकसान
किसान नेता राहुल कलसौरा ने कहा कि सरकारी खरीद में देरी का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि निजी व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर सरसों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमत पर खरीद रहे हैं।
किसान पदम सिंह के अनुसार सरकार द्वारा तय 6200 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी के मुकाबले निजी खरीद 5200 से 5500 रुपये के बीच हो रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
व्यवस्थाएं ठीक, फिर भी चिंता बरकरार
आढ़ती प्रवीन ने बताया कि अनाज मंडी इंद्री में सरसों की खरीद को लेकर सफाई व्यवस्था दुरुस्त है और बारदाने की कोई कमी नहीं है। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि गेहूं की खरीद के समय बारदाने की कमी हो सकती है। उन्होंने बताया कि गेहूं की सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू होनी है, जबकि बारदाने का टेंडर 30 अप्रैल को खुलने की बात सामने आ रही है। ऐसे में किसानों को गेहूं बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
वर्जन
सरसों की खरीद 28 मार्च से शुरू होगी जबकि गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से शुरू होगी । इसको लेकर जिले की सभी मंडियों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। किसी भी किसान को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। किसानों की परेशानी के समाधान के लिए हर मंडी में हेल्पलेस बनाया गया है।
मुकेश कुमार, नियंत्रक, जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।
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आज से शुरू होगी सरकारी खरीद
फोटो 104/105
करनाल/इंद्री।
प्रदेश की मंडियों में 28 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद शुरू होने जा रही है लेकिन जिले की अनाज मंडी घरौंडा और इंद्री में इसके प्रति आढ़तियों का उदासीन रवैया सामने आया है। किसानों ओर आढ़तियों का कहना है कि देरी से, बिना किसी मेहनताना या सरकारी सहायता के सरसों की खरीद करना उनके लिए घाटे का सौदा बन रहा है।
आढ़तियों ने कहा कि सरकार को सरसों की खरीद एक मार्च से शुरू करनी चाहिए क्योंकि क्षेत्र में फसल की आवक फरवरी से ही शुरू हो जाती है और मार्च के अंत तक केवल 15 से 20 प्रतिशत फसल ही बचती है।
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इंद्री के आढ़ती देवी चंद और जय प्रकाश ने बताया कि सरसों की फसल को सुखाने, भंडारण और सफाई में काफी खर्च आता है। इसके अलावा मंडी में पड़ी फसल की रखवाली की जिम्मेदारी भी आढ़तियों पर ही होती है। उन्होंने मांग उठाई कि धान और गेहूं की तरह सरसों की खरीद पर भी आढ़त का भुगतान किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े।
किसानों को उठाना पड़ रहा नुकसान
किसान नेता राहुल कलसौरा ने कहा कि सरकारी खरीद में देरी का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि निजी व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर सरसों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमत पर खरीद रहे हैं।
किसान पदम सिंह के अनुसार सरकार द्वारा तय 6200 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी के मुकाबले निजी खरीद 5200 से 5500 रुपये के बीच हो रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
व्यवस्थाएं ठीक, फिर भी चिंता बरकरार
आढ़ती प्रवीन ने बताया कि अनाज मंडी इंद्री में सरसों की खरीद को लेकर सफाई व्यवस्था दुरुस्त है और बारदाने की कोई कमी नहीं है। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि गेहूं की खरीद के समय बारदाने की कमी हो सकती है। उन्होंने बताया कि गेहूं की सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू होनी है, जबकि बारदाने का टेंडर 30 अप्रैल को खुलने की बात सामने आ रही है। ऐसे में किसानों को गेहूं बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
वर्जन
सरसों की खरीद 28 मार्च से शुरू होगी जबकि गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से शुरू होगी । इसको लेकर जिले की सभी मंडियों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। किसी भी किसान को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। किसानों की परेशानी के समाधान के लिए हर मंडी में हेल्पलेस बनाया गया है।
मुकेश कुमार, नियंत्रक, जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।