{"_id":"6aa704968707820b4006d2de","slug":"uproar-over-womans-death-after-childbirth-at-district-hospital-karnal-news-c-18-knl1018-990826-2026-09-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: जिला अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की मौत पर हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: जिला अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की मौत पर हंगामा
विज्ञापन
मनिका फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करनाल। गांव कुंडा कलां निवासी परिवार में बेटी के जन्म की खुशी कुछ ही घंटों में मातम में बदल गई। जिला नागरिक अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 31 वर्षीय मनिका की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। रविवार सुबह परिजन ने चिकित्सकों और कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। पुलिस मौके पर पहुंची और परिजन को शांत कराया।
ससुर गोविंद के अनुसार, मनिका के प्रसव की संभावित तारीख 10-11 सितंबर बताई गई थी। शनिवार सुबह करीब 7 बजे उसे कुंजपुरा स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। वहां से दोपहर करीब 1:30 बजे उसे जिला नागरिक अस्पताल रेफर किया गया। परिजन के मुताबिक शाम करीब पांच से साढ़े पांच बजे के बीच सिजेरियन डिलीवरी हुई और मोनिका ने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। करीब 6:30 बजे उसे लेबर रूम/वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
परिजन का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद मनिका को पेट और ऑपरेशन वाली जगह पर तेज दर्द हुआ और उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। रात करीब 10 से 11 बजे के बीच उसे आईसीयू में ले जाया गया। उनका आरोप है कि रात में वरिष्ठ डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थे। मरीज की गंभीर हालत के बावजूद समय पर उचित ध्यान नहीं दिया गया।
विज्ञापन
उनकी मांग पर स्टाफ ने संपर्क किया तो डॉक्टर ने इतनी रात में फोन करने पर नाराजगी जताई। सुबह करीब पांच से साढ़े पांच बजे डॉक्टरों के पहुंचने तक मनिका की मौत हो गई। परिजन ने अस्पताल कर्मचारियों पर विरोध करने पर धमकी देने और परिसर से बाहर निकालने का आरोप भी लगाया।
विशेषज्ञों से कराया गया इलाज
पीएमओ डॉ. सरिता विश्नोई ने बताया कि मरीज की उम्र 31 वर्ष थी और वह पोलियो से ग्रसित थी। बच्ची के जन्म के बाद मरीज की हालत में कुछ गिरावट दिखाई देने पर उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया और संबंधित स्त्री रोग विशेषज्ञ ने तुरंत मरीज को देखा।रविवार की सुबह करीब पांच बजे मरीज की हालत और खराब हुई तो ड्यूटी पर मौजूद रेजिडेंट डॉक्टर ने तुरंत टीम को सूचना दी और आवश्यक उपचार शुरू किया गया। इसके बाद पूरी टीम मौके पर पहुंची और मरीज को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। रेजिडेंट डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद था और जरूरत के अनुसार फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और इंटेंसिविस्ट को भी ऑन-कॉल बुलाया गया था। आरोपों की वास्तविकता मेडिकल रिकॉर्ड और उपलब्ध तथ्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
विज्ञापन
ससुर गोविंद के अनुसार, मनिका के प्रसव की संभावित तारीख 10-11 सितंबर बताई गई थी। शनिवार सुबह करीब 7 बजे उसे कुंजपुरा स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। वहां से दोपहर करीब 1:30 बजे उसे जिला नागरिक अस्पताल रेफर किया गया। परिजन के मुताबिक शाम करीब पांच से साढ़े पांच बजे के बीच सिजेरियन डिलीवरी हुई और मोनिका ने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। करीब 6:30 बजे उसे लेबर रूम/वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
विज्ञापन
परिजन का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद मनिका को पेट और ऑपरेशन वाली जगह पर तेज दर्द हुआ और उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। रात करीब 10 से 11 बजे के बीच उसे आईसीयू में ले जाया गया। उनका आरोप है कि रात में वरिष्ठ डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थे। मरीज की गंभीर हालत के बावजूद समय पर उचित ध्यान नहीं दिया गया।
विज्ञापन
उनकी मांग पर स्टाफ ने संपर्क किया तो डॉक्टर ने इतनी रात में फोन करने पर नाराजगी जताई। सुबह करीब पांच से साढ़े पांच बजे डॉक्टरों के पहुंचने तक मनिका की मौत हो गई। परिजन ने अस्पताल कर्मचारियों पर विरोध करने पर धमकी देने और परिसर से बाहर निकालने का आरोप भी लगाया।
विशेषज्ञों से कराया गया इलाज
पीएमओ डॉ. सरिता विश्नोई ने बताया कि मरीज की उम्र 31 वर्ष थी और वह पोलियो से ग्रसित थी। बच्ची के जन्म के बाद मरीज की हालत में कुछ गिरावट दिखाई देने पर उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया और संबंधित स्त्री रोग विशेषज्ञ ने तुरंत मरीज को देखा।रविवार की सुबह करीब पांच बजे मरीज की हालत और खराब हुई तो ड्यूटी पर मौजूद रेजिडेंट डॉक्टर ने तुरंत टीम को सूचना दी और आवश्यक उपचार शुरू किया गया। इसके बाद पूरी टीम मौके पर पहुंची और मरीज को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। रेजिडेंट डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद था और जरूरत के अनुसार फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और इंटेंसिविस्ट को भी ऑन-कॉल बुलाया गया था। आरोपों की वास्तविकता मेडिकल रिकॉर्ड और उपलब्ध तथ्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।