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Karnal News: एनडीआरआई की विंग लगाने और पशुधन बढ़ाने पर उत्तराखंड सरकार करेगी साझेदारी
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आईसीएआर का दौरा करते उत्तराखण्ड के कैबिनेट मंत्री भरत सिंह संस्थान
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। एनडीआरआई और उत्तराखंड सरकार अपने राज्य में संस्थान की एक विंग लगाने और पशुधन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए साझेदारी करेगी। इसके लिए उत्तराखंड के ग्रामीण विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह से चर्चा की है।
वे बुधवार को एनडीआरआई पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपने राज्य में चारे की कमी को दूर करने और साइलेज उत्पादन को अनुकूलित करने के लिए संस्थान से तकनीकी सहायता भी मांगी। उन्होंने कहा कि पशुपालन उत्तराखंड की पारंपरिक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार का प्राथमिक स्रोत है। संस्थान की तकनीकी मदद से वे इस क्षेत्र में और अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
इससे पहले मंत्री ने निदेशक के साथ संस्थान के पशुधन अनुसंधान केंद्र, पशु प्रजनन अनुसंधान केंद्र, मॉडल डेयरी प्लांट, रेफरल प्रयोगशाला और पशु जैव प्रौद्योगिकी प्रभाग सहित अन्य विंगों का दौरा करके डेयरी क्षेत्र में हो रही नवीनतम प्रगति की जानकारी ली।
-- एनडीआरआई की समझी कार्यप्रणाली
मंत्री भरत सिंह चौधरी ने एडीजी डॉ. अजीत यादव, वरिष्ठ संकाय सदस्यों और केवीके प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत भी की। चर्चा के दौरान निदेशक ने बताया कि संस्थान दूध उत्पादन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बछड़ों की क्लोनिंग के जरिये विशिष्ट रोगाणुओं के गुणन, त्वरित गर्भावस्था निदान किट, गर्मी के तनाव और चयापचय संबंधी विकारों से निपटने के लिए क्षेत्र-विशिष्ट खनिज मिश्रण, जलवायु जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान और भैंसों की बेहतर आनुवंशिकी के लिए उन्नत आईवीएफ/भ्रूण स्थानांतरण प्रोटोकॉल पर काम कर रहा है।
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करनाल। एनडीआरआई और उत्तराखंड सरकार अपने राज्य में संस्थान की एक विंग लगाने और पशुधन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए साझेदारी करेगी। इसके लिए उत्तराखंड के ग्रामीण विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह से चर्चा की है।
वे बुधवार को एनडीआरआई पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपने राज्य में चारे की कमी को दूर करने और साइलेज उत्पादन को अनुकूलित करने के लिए संस्थान से तकनीकी सहायता भी मांगी। उन्होंने कहा कि पशुपालन उत्तराखंड की पारंपरिक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार का प्राथमिक स्रोत है। संस्थान की तकनीकी मदद से वे इस क्षेत्र में और अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
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इससे पहले मंत्री ने निदेशक के साथ संस्थान के पशुधन अनुसंधान केंद्र, पशु प्रजनन अनुसंधान केंद्र, मॉडल डेयरी प्लांट, रेफरल प्रयोगशाला और पशु जैव प्रौद्योगिकी प्रभाग सहित अन्य विंगों का दौरा करके डेयरी क्षेत्र में हो रही नवीनतम प्रगति की जानकारी ली।
मंत्री भरत सिंह चौधरी ने एडीजी डॉ. अजीत यादव, वरिष्ठ संकाय सदस्यों और केवीके प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत भी की। चर्चा के दौरान निदेशक ने बताया कि संस्थान दूध उत्पादन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बछड़ों की क्लोनिंग के जरिये विशिष्ट रोगाणुओं के गुणन, त्वरित गर्भावस्था निदान किट, गर्मी के तनाव और चयापचय संबंधी विकारों से निपटने के लिए क्षेत्र-विशिष्ट खनिज मिश्रण, जलवायु जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान और भैंसों की बेहतर आनुवंशिकी के लिए उन्नत आईवीएफ/भ्रूण स्थानांतरण प्रोटोकॉल पर काम कर रहा है।
