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Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   17,000 devotees recited the Hanuman Chalisa in unison on the occasion of Chinmaya Mission's 75th anniversary

चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ पर 17 हजार श्रद्धालुओं ने किया सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ

Fri, 17 Jul 2026 12:42 AM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, कुरुक्षेत्र
अमर उजाला नेटवर्क, कुरुक्षेत्र Published by: श्याम जी. Updated Fri, 17 Jul 2026 12:42 AM IST
सार

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष शुभकामना संदेश भेजा। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में चिन्मय मिशन के अमृत महोत्सव के बारे में जानकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि मिशन ने पिछले साढ़े सात दशकों से भारतीय आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

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17,000 devotees recited the Hanuman Chalisa in unison on the occasion of Chinmaya Mission's 75th anniversary
स्वामी अभेदानंद के नेतृत्व में 17000 श्रद्धालुओं ने किया 'हनुमान चालीसा' पाठ - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में डरबन स्थित चैट्सवर्थ स्टेडियम में आयोजित "मैन टू हनुमान" कार्यक्रम ने एक नया इतिहास रच दिया। चिन्मय मिशन साउथ अफ्रीका द्वारा आयोजित इस भव्य आयोजन में 17,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने एक साथ 27 बार हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। इस तरह कुल चार लाख से अधिक सामूहिक पाठ पूरे हुए। इसे भारत के बाहर सनातन धर्म के सबसे बड़े सार्वजनिक आध्यात्मिक आयोजनों में से एक माना जा रहा है।

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पूरा चैट्सवर्थ स्टेडियम केसरिया ध्वजों, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। हजारों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में हनुमान चालीसा का पाठ कर भक्ति, एकता और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत संदेश दिया। कार्यक्रम चिन्मय मिशन के वैश्विक "चिन्मय अमृत महोत्सव" का प्रमुख हिस्सा था।

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इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष शुभकामना संदेश भेजा। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में चिन्मय मिशन के अमृत महोत्सव के बारे में जानकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि मिशन ने पिछले साढ़े सात दशकों से भारतीय आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि "चंट डरबन, शांत डरबन" का संदेश सामूहिक भक्ति के माध्यम से सामाजिक सद्भाव और शांति को मजबूत करता है। उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीयों ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच एक जीवंत सेतु का कार्य किया है तथा दोनों देशों के सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाया है।

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कार्यक्रम में दक्षिण अफ्रीका के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर क्वाज़ुलु-नताल और आसपास के प्रांतों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। इसके लिए 80 से अधिक बसों की व्यवस्था की गई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों से भी कार्यक्रम में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने इसे जीवन में एक बार मिलने वाला आध्यात्मिक अनुभव बताया।

भक्ति संध्या का मुख्य आकर्षण पद्मश्री भजन सम्राट अनूप जलोटा और प्रसिद्ध सिंगर-अभिनेत्री अनुजा सहाय की प्रस्तुतियां रहीं। उनके नेतृत्व में हजारों श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा का सामूहिक गायन किया, जिससे पूरा स्टेडियम मानो एक विशाल मंदिर में बदल गया। अनूप जलोटा ने चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की वैश्विक आध्यात्मिक सेवा को नमन करते हुए कहा कि वर्ष 2026 में स्वामी अभेदानंद की दक्षिण अफ्रीका में आध्यात्मिक सेवा के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के प्रचार-प्रसार में स्वामी अभेदानंद के योगदान की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

चिन्मय मिशन साउथ अफ्रीका के प्रमुख स्वामी अभेदानंद सरस्वती ने अपने प्रेरक संबोधन में श्रद्धालुओं से अपनी आध्यात्मिक पहचान पर गर्व करने का आह्वान किया। उनके आह्वान पर पूरा स्टेडियम तीन बार "मैं एक गर्वित हिंदू हूँ" के उद्घोष से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि यह गर्व किसी विभाजन का नहीं, बल्कि अपनी आध्यात्मिक विरासत को आत्मविश्वास के साथ अपनाने और मानवता की सेवा के लिए मिलकर कार्य करने का प्रतीक है। कार्यक्रम के अंतिम चरण में जब हजारों श्रद्धालु भगवान हनुमान की तस्वीर और "मैं एक गर्वित हिंदू हूँ" लिखे केसरिया ध्वज लहराते हुए खड़े हुए, तब पूरा वातावरण भावनाओं से भर उठा और अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

कार्यक्रम में क्वाज़ुलु-नताल के प्रीमियर थामी न्तुली भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ केसरिया ध्वज लहराया तथा हनुमान चालीसा के पाठ में भी सहभागिता की। उन्होंने चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की सेवा और स्वामी अभेदानंद के नेतृत्व में किए जा रहे सामाजिक एवं आध्यात्मिक कार्यों की सराहना की।

इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में लगभग 200 स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रत्येक श्रद्धालु का स्वागत विशेष उपहार बैग से किया गया, जिसमें आध्यात्मिक साहित्य, भगवान हनुमान एवं स्वामी चिन्मयानंद के चित्र, अभिमंत्रित सिंदूर, फल और पानी की बोतलें शामिल थीं। वहीं करीब 100 स्वयंसेवकों ने पूरी रात मेहनत कर 20,000 से अधिक भोजन पैकेट तैयार किए, जिन्हें महाप्रसाद के रूप में वितरित किया गया। इसके अलावा चिन्मय अन्नपूर्णा आश्रम में दो सप्ताह तक स्वयंसेवकों ने पारंपरिक 'रोट' प्रसाद तैयार किया, जिसे भगवान हनुमान को अर्पित करने के बाद सभी श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।

चिन्मय मिशन का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि विश्व स्तर पर सनातन संस्कृति, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक एकता का सशक्त संदेश देने वाला ऐतिहासिक अवसर बन गया।

 

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