{"_id":"6a2734ee140f83b72f0aba53","slug":"new-trunot-machines-installed-in-kirmach-and-gamdi-now-tb-test-report-will-be-available-in-two-hours-kurukshetra-news-c-45-1-kur1010-156084-2026-06-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: किरमच व गामड़ी में नई ट्रूनॉट मशीनें स्थापित, अब दो घंटे में मिलेगी टीबी जांच रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: किरमच व गामड़ी में नई ट्रूनॉट मशीनें स्थापित, अब दो घंटे में मिलेगी टीबी जांच रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 09 Jun 2026 03:02 AM IST
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। किरमच पीएचसी में ट्रूनॉट मशीन को लगाते हुए अस्पताल कर्मी। संवाद
- फोटो : samvad
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। टीबी मुक्त जिला बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग लगातार जांच सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। इसके तहत टीबी के संदिग्ध मरीजों को अब जांच के लिए शहरों और बड़े अस्पतालों में नहीं भटकना होगा, क्योंकि टीबी की जांच के लिए तकनीकी ट्रूनॉट मशीनें उनके नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच रही हैं।
इसी कड़ी में सीएचसी किरमच और यूपीएचसी कृष्णा नगर गामड़ी में नई ट्रूनॉट मशीनें स्थापित की गई हैं। इन मशीनों के जरिए मरीजों की टीबी जांच करीब दो घंटे में हो सकेगी, जिससे बीमारी की समय रहते पहचान कर उपचार तुरंत शुरू किया जा सकेगा। नई मशीनों के जुड़ने के बाद जिले में ट्रूनॉट मशीनों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। जो टीबी मुक्त कुरुक्षेत्र अभियान में एक मील का पत्थर साबित होगा।
जिला टीबी विशेषज्ञ डॉ संदीप अग्रवाल ने कहा कि ये ट्रूनॉट मशीन अत्याधुनिक मॉलिक्यूलर तकनीक पर आधारित है। इसमें मरीज के बलगम के नमूने की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि उसे टीबी है या नहीं। यदि संक्रमण की पुष्टि होती है तो मशीन यह भी जांच करती है कि मरीज में टीबी की दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (ड्रग रेजिस्टेंस) तो विकसित नहीं हो चुकी। इससे दवा प्रतिरोधी टीबी के मरीजों की भी शीघ्र पहचान हो जाती है।
विज्ञापन
उनका कहना हैं कि पहले कई मामलों में मरीजों को जांच के लिए बड़े केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में मशीनें उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को घर के नजदीक ही जांच सुविधा मिल सकेगी। इसका लाभ विशेष रूप से किरमच, गामड़ी और आसपास के गांवों के मरीजों को भी मिलेगा।
अस्पताल में कार्यरत जिला डीबी विशेषज्ञ डॉ संदीप का कहना है कि एलएनजेपी में एक सीबी-नॉट मशीन भी स्थापित है। यह मशीन टीबी की उन्नत जांच के लिए उपयोग में लाई जाती है और जटिल मामलों में चिकित्सकों को त्वरित व सटीक परिणाम उपलब्ध कराती है। जिसके विस्तार से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को भी गति मिलेगी और टीबी मुक्त भारत अभियान को मजबूती मिलेगी। संवाद
बॉक्स
जिले में कहां-कहां हैं ट्रूनॉट मशीनें
- डीटीसी कुरुक्षेत्र – 2 मशीनें
- एसडीएच शाहाबाद – 2 मशीनें (एक 4 मॉड्यूल, एक 2 मॉड्यूल)
- एसडीएच पिहोवा – 2 मशीनें (एक 4 मॉड्यूल, एक 2 मॉड्यूल)
- पीएचसी इस्माइलाबाद – 1 मशीन (4 मॉड्यूल)
- सीएचसी लाडवा – 1 मशीन
- सीएचसी झांसा – 1 मशीन
- सीएचसी बारना – 1 मशीन
- सीएचसी किरमच – 1 नई मशीन
- सीएचसी मथाना – 1 मशीन
-सीएचसी बाबैन – 1 मशीन
-यूपीएचसी कृष्णा नगर, गामड़ी – 1 नई मशीन
कुल ट्रूनॉट मशीनें : 14
बॉक्स
इसी कड़ी में सीएचसी किरमच और यूपीएचसी कृष्णा नगर गामड़ी में नई ट्रूनॉट मशीनें स्थापित की गई हैं। इन मशीनों के जरिए मरीजों की टीबी जांच करीब दो घंटे में हो सकेगी, जिससे बीमारी की समय रहते पहचान कर उपचार तुरंत शुरू किया जा सकेगा। नई मशीनों के जुड़ने के बाद जिले में ट्रूनॉट मशीनों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। जो टीबी मुक्त कुरुक्षेत्र अभियान में एक मील का पत्थर साबित होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला टीबी विशेषज्ञ डॉ संदीप अग्रवाल ने कहा कि ये ट्रूनॉट मशीन अत्याधुनिक मॉलिक्यूलर तकनीक पर आधारित है। इसमें मरीज के बलगम के नमूने की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि उसे टीबी है या नहीं। यदि संक्रमण की पुष्टि होती है तो मशीन यह भी जांच करती है कि मरीज में टीबी की दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (ड्रग रेजिस्टेंस) तो विकसित नहीं हो चुकी। इससे दवा प्रतिरोधी टीबी के मरीजों की भी शीघ्र पहचान हो जाती है।
Trending Videos
उनका कहना हैं कि पहले कई मामलों में मरीजों को जांच के लिए बड़े केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में मशीनें उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को घर के नजदीक ही जांच सुविधा मिल सकेगी। इसका लाभ विशेष रूप से किरमच, गामड़ी और आसपास के गांवों के मरीजों को भी मिलेगा।
अस्पताल में कार्यरत जिला डीबी विशेषज्ञ डॉ संदीप का कहना है कि एलएनजेपी में एक सीबी-नॉट मशीन भी स्थापित है। यह मशीन टीबी की उन्नत जांच के लिए उपयोग में लाई जाती है और जटिल मामलों में चिकित्सकों को त्वरित व सटीक परिणाम उपलब्ध कराती है। जिसके विस्तार से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को भी गति मिलेगी और टीबी मुक्त भारत अभियान को मजबूती मिलेगी। संवाद
बॉक्स
जिले में कहां-कहां हैं ट्रूनॉट मशीनें
- डीटीसी कुरुक्षेत्र – 2 मशीनें
- एसडीएच शाहाबाद – 2 मशीनें (एक 4 मॉड्यूल, एक 2 मॉड्यूल)
- एसडीएच पिहोवा – 2 मशीनें (एक 4 मॉड्यूल, एक 2 मॉड्यूल)
- पीएचसी इस्माइलाबाद – 1 मशीन (4 मॉड्यूल)
- सीएचसी लाडवा – 1 मशीन
- सीएचसी झांसा – 1 मशीन
- सीएचसी बारना – 1 मशीन
- सीएचसी किरमच – 1 नई मशीन
- सीएचसी मथाना – 1 मशीन
-सीएचसी बाबैन – 1 मशीन
-यूपीएचसी कृष्णा नगर, गामड़ी – 1 नई मशीन
कुल ट्रूनॉट मशीनें : 14
बॉक्स