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Mahendragarh-Narnaul News: ऑटो से बाइक की टक्कर में पैर गंवाने वाले बस चालक को 30 लाख मुआवजा
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नारनौल। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) नारनौल ने सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर अपना पैर गंवाने वाले बस चालक को 30.17 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह आदेश ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी नितिन राज ने सुनाया।
गांव नांगल सिरोही निवासी संजीव कुमार ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत दावा याचिका दायर कर 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। याचिका में बताया गया कि 27 सितंबर 2021 की रात वह अपनी मोटरसाइकिल से महेंद्रगढ़ से घर लौट रहे थे। जाटवास मोड़ के पास पीछे से तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाए जा रहे ऑटो ने टक्कर मार दी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
घायल को पहले महेंद्रगढ़ के अस्पताल, फिर रेवाड़ी और बाद में जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहां उनकी दो बार सर्जरी हुई और दाहिना पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें 80 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता हुई जबकि ट्रिब्यूनल ने उनके पेशे को देखते हुए इसे 100 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता माना।
सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने पाया कि दुर्घटना ऑटो चालक की लापरवाही से हुई। चालक की ओर से कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे उसके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगाया गया। वहीं, बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था या पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ।
ट्रिब्यूनल ने पीड़ित की आय का आकलन न्यूनतम मजदूरी के आधार पर करते हुए भविष्य की संभावनाएं जोड़कर मुआवजा तय किया। ट्रिब्यूनल ने कुल 30,17,758 रुपये मुआवजा 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं।
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गांव नांगल सिरोही निवासी संजीव कुमार ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत दावा याचिका दायर कर 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। याचिका में बताया गया कि 27 सितंबर 2021 की रात वह अपनी मोटरसाइकिल से महेंद्रगढ़ से घर लौट रहे थे। जाटवास मोड़ के पास पीछे से तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाए जा रहे ऑटो ने टक्कर मार दी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
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घायल को पहले महेंद्रगढ़ के अस्पताल, फिर रेवाड़ी और बाद में जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहां उनकी दो बार सर्जरी हुई और दाहिना पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें 80 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता हुई जबकि ट्रिब्यूनल ने उनके पेशे को देखते हुए इसे 100 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता माना।
सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने पाया कि दुर्घटना ऑटो चालक की लापरवाही से हुई। चालक की ओर से कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे उसके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगाया गया। वहीं, बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था या पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ।
ट्रिब्यूनल ने पीड़ित की आय का आकलन न्यूनतम मजदूरी के आधार पर करते हुए भविष्य की संभावनाएं जोड़कर मुआवजा तय किया। ट्रिब्यूनल ने कुल 30,17,758 रुपये मुआवजा 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं।

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