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Mahendragarh-Narnaul News: चित्र प्रदर्शनी और डॉक्यूमेंट्री के जरिये लोगों ने महसूस की विभाजन की पीड़ा
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फोटो 01: विद्यार्थियों के बीच बैठकर डॉक्यूमेंट्री फिल्म देखती डीसी। स्रोत: विभाग
- फोटो : Archive
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नारनौल। देश आजाद से ठीक पहले 14 अगस्त की रात लाखों लोगों के लिए दर्द और डर लेकर आई थी। भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को घर-बार छोड़ना पड़ा। परिवार बिछड़ गए और हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई। इसी दर्द और उन लोगों की कुर्बानी को याद करने के लिए शुक्रवार को राजकीय पीजी कॉलेज के सभागार में जिला स्तरीय विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत उपायुक्त अनुपमा अंजली ने कॉलेज परिसर में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से लगाई गई चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन कर की। प्रदर्शनी में 1947 के विभाजन से जुड़ी तस्वीरें और ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शित किए गए थे। इनमें घर छोड़कर पैदल जाते परिवार, सामान से भरी बैलगाड़ियां, अपनों से बिछड़े बच्चे और शरणार्थी शिविरों में रहने वाले लोगों की मुश्किलों को दिखाया गया था। तस्वीरों ने लोगों को उस दौर की भयावहता का एहसास कराया।
इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि 14 अगस्त केवल इतिहास की एक तारीख नहीं है। यह हमारे पूर्वजों के संघर्ष, त्याग और दर्द की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि देश की आजादी के पीछे लोगों ने कितनी बड़ी कीमत चुकाई।
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कार्यक्रम में विभाग की ओर से तैयार डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। फिल्म में विभाजन की त्रासदी, शरणार्थियों का संघर्ष और उस समय इन्सानियत के सामने आई कठिन परिस्थितियों को दिखाया गया। फिल्म के दौरान सभागार में सन्नाटा छा गया और कई लोग भावुक हो उठे।
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कार्यक्रम की शुरुआत उपायुक्त अनुपमा अंजली ने कॉलेज परिसर में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से लगाई गई चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन कर की। प्रदर्शनी में 1947 के विभाजन से जुड़ी तस्वीरें और ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शित किए गए थे। इनमें घर छोड़कर पैदल जाते परिवार, सामान से भरी बैलगाड़ियां, अपनों से बिछड़े बच्चे और शरणार्थी शिविरों में रहने वाले लोगों की मुश्किलों को दिखाया गया था। तस्वीरों ने लोगों को उस दौर की भयावहता का एहसास कराया।
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इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि 14 अगस्त केवल इतिहास की एक तारीख नहीं है। यह हमारे पूर्वजों के संघर्ष, त्याग और दर्द की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि देश की आजादी के पीछे लोगों ने कितनी बड़ी कीमत चुकाई।
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कार्यक्रम में विभाग की ओर से तैयार डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। फिल्म में विभाजन की त्रासदी, शरणार्थियों का संघर्ष और उस समय इन्सानियत के सामने आई कठिन परिस्थितियों को दिखाया गया। फिल्म के दौरान सभागार में सन्नाटा छा गया और कई लोग भावुक हो उठे।