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Mahendragarh-Narnaul News: मंडी में रात में पसर जाता है सन्नाटा, दिन में ही लौट जाते हैं किसान
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-फोटो 85 : बुधवार रात पौने 9 बजे! अनाज मंडी में गेहूं के कट्टों को तिरपाल से ढका गया। संवाद
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बहादुरगढ़। प्रदेश सरकार की ओर से अनाज मंडी में रात को भी किसानों के आने पर गेट पास काटे जाने के आदेश जारी किए गए हैं लेकिन बहादुरगढ़ की अनाज मंडी में दिन के समय ही किसानों की संख्या सीमित रहती है। रात के समय तो सन्नाटा पसर जाता है। बुधवार को मंडी में की गई पड़ताल में ऐसा ही कुछ नजारा दिखा।
मंडी सुनसान रही और फड़ पर रखे गेहूं के कट्टों को बारिश से बचाने के लिए ढके गए तिरपाल पर बंदर उछल कूद करते नजर आए। रात पौने 9 बजे मंडी में मौजूद मार्केट कमेटी के उप प्रधान प्रदीप गुप्ता से पूछने पर कि रात के समय मंडी खाली क्यों तो जवाब मिला कि दोपहर के समय ही मंडी में किसानों की संख्या बेहद कम रहती है तो रात को कौन आएगा।
दरअसल, अबकी बार अप्रैल की शुरुआत से मौसम परिवर्तनशील बना हुआ है। कभी बारिश होती है तो कभी धूप निकलती है। इसके कारण खेतों में पड़ा किसानों का गेहूं भी खराब हो गया है और कहीं-कहीं तो अभी भी गेहूं की फसल में नमी अधिक बनी हुई है।
यदि किसान मंडी में गेहूं लेकर पहुंचता है तो फसल में नमी की मात्रा ज्यादा मिल रही है। रात के समय मंडी में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहता है। पड़ताल में सामने आया कि रात करीब पौने नौ बजे मंडी पूरी तरह खाली नजर आई। कहीं-कहीं फड़ पर गेहूं के कट्टे जरूर रखे दिखे लेकिन किसान और आढ़तियों की आवाजाही न के बराबर थी।
फड़ के आसपास बंदर काफी संख्या में थे। गेहूं के कट्टों को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल से ढका गया था। आढ़ती कालू से बातचीत में सामने आया कि किसान अब देर रात तक मंडी में रुकने से बचते हैं। अधिकांश किसान दिन में ही अपनी फसल लेकर आते हैं और बिक्री के बाद वापस लौट जाते हैं।
मंडी में सुरक्षा, रोशनी और ठहरने की उचित व्यवस्था है। मार्केट कमेटी के उप प्रधान प्रदीप गुप्ता ने भी स्थिति को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि जब दिन के समय ही किसान कम संख्या में मंडी पहुंच रहे हैं तो रात में उनके आने की उम्मीद करना बेकार है। पड़ताल में सामने आया कि बहादुरगढ़ मंडी में रात के समय गतिविधियां ठप हो जाती हैं।
-फोटो 85
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मंडी सुनसान रही और फड़ पर रखे गेहूं के कट्टों को बारिश से बचाने के लिए ढके गए तिरपाल पर बंदर उछल कूद करते नजर आए। रात पौने 9 बजे मंडी में मौजूद मार्केट कमेटी के उप प्रधान प्रदीप गुप्ता से पूछने पर कि रात के समय मंडी खाली क्यों तो जवाब मिला कि दोपहर के समय ही मंडी में किसानों की संख्या बेहद कम रहती है तो रात को कौन आएगा।
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दरअसल, अबकी बार अप्रैल की शुरुआत से मौसम परिवर्तनशील बना हुआ है। कभी बारिश होती है तो कभी धूप निकलती है। इसके कारण खेतों में पड़ा किसानों का गेहूं भी खराब हो गया है और कहीं-कहीं तो अभी भी गेहूं की फसल में नमी अधिक बनी हुई है।
यदि किसान मंडी में गेहूं लेकर पहुंचता है तो फसल में नमी की मात्रा ज्यादा मिल रही है। रात के समय मंडी में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहता है। पड़ताल में सामने आया कि रात करीब पौने नौ बजे मंडी पूरी तरह खाली नजर आई। कहीं-कहीं फड़ पर गेहूं के कट्टे जरूर रखे दिखे लेकिन किसान और आढ़तियों की आवाजाही न के बराबर थी।
फड़ के आसपास बंदर काफी संख्या में थे। गेहूं के कट्टों को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल से ढका गया था। आढ़ती कालू से बातचीत में सामने आया कि किसान अब देर रात तक मंडी में रुकने से बचते हैं। अधिकांश किसान दिन में ही अपनी फसल लेकर आते हैं और बिक्री के बाद वापस लौट जाते हैं।
मंडी में सुरक्षा, रोशनी और ठहरने की उचित व्यवस्था है। मार्केट कमेटी के उप प्रधान प्रदीप गुप्ता ने भी स्थिति को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि जब दिन के समय ही किसान कम संख्या में मंडी पहुंच रहे हैं तो रात में उनके आने की उम्मीद करना बेकार है। पड़ताल में सामने आया कि बहादुरगढ़ मंडी में रात के समय गतिविधियां ठप हो जाती हैं।
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-फोटो 85 : बुधवार रात पौने 9 बजे! अनाज मंडी में गेहूं के कट्टों को तिरपाल से ढका गया। संवाद