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मनीषा मौत मामला: सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज, अब नए सिरे से होगी जांच; क्या है एम्स की मेडिकल रिपोर्ट?
Mon, 02 Nov 2026 08:35 PM IST
शाहिल शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Mon, 02 Nov 2026 08:35 PM IST
सार
अदालत में पेश एम्स के पांच विशेषज्ञ चिकित्सकों के संशोधित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, मनीषा की मौत गर्दन पर धारदार हथियार से लगी गंभीर चोट के कारण हुई थी। रिपोर्ट में चोट को मृत्यु से पहले का बताया गया है।
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मनीषा मौत मामला
- फोटो : संवाद
विस्तार
भिवानी की 18 वर्षीय शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में सीबीआई की जांच को बड़ा झटका लगा है। पंचकूला की विशेष सीबीआई मजिस्ट्रेट अदालत ने एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए मृतका के परिजनों की प्रोटेस्ट पिटीशन स्वीकार कर ली है। अदालत ने जांच में गंभीर खामियां पाए जाने पर सीबीआई को नए सिरे से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 23 दिसंबर 2026 तक जांच की स्टेट्स रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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एम्स की रिपोर्ट से बदली जांच की दिशा
अदालत में पेश एम्स के पांच विशेषज्ञ चिकित्सकों के संशोधित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, मनीषा की मौत गर्दन पर धारदार हथियार से लगी गंभीर चोट के कारण हुई थी। रिपोर्ट में चोट को मृत्यु से पहले का बताया गया है। वहीं, शरीर पर जानवर के काटने के निशान होने की बात भी खारिज की गई है। इससे पहले पुलिस ने जहर खाने और जानवरों द्वारा चेहरा क्षतिग्रस्त किए जाने की आशंका जताई थी।
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डीवीआर कब्जे में रखने पर उठाए सवाल
अदालत ने नर्सिंग कॉलेज के सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर को कब्जे में लेने की प्रक्रिया में लापरवाही पाई। एसआईटी प्रमुख डीएसपी ने डीवीआर लेते समय बरामदगी मेमो तैयार नहीं किया था। यह करीब 40 दिन तक उनके कब्जे में रहा। अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए इसे जांच की गंभीर कमी माना।
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सुसाइड नोट की लिखावट का होगा मिलान
अदालत ने सुसाइड नोट की प्रमाणिकता की दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। इसके लिए मनीषा की 12वीं कक्षा के रजिस्टर में दर्ज लिखावट से उसका मिलान कराया जाएगा। दो प्रयोगशालाओं के कम से कम तीन विशेषज्ञों का बोर्ड यह जांच करेगा।
इसके अलावा एएसआई शकुंतला, डीएसपी संजीव कुमार, खाद भंडार संचालक और नर्सिंग कॉलेज मालिक की भूमिका की जांच करने को कहा गया है। संबंधित लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर सहमति से नार्को एनालिसिस और ब्रेन फिंगर प्रिंटिंग जैसे वैज्ञानिक परीक्षणों पर विचार किया जा सकता है।
11 अगस्त 2025 को स्कूल से निकली थी मनीषा
मनीषा भिवानी के सिंघानी क्षेत्र स्थित किड्स केयर प्ले स्कूल में शिक्षिका थी। 11 अगस्त 2025 को वह बीएससी नर्सिंग में दाखिले की जानकारी लेने के लिए आइडियल नर्सिंग कॉलेज जाने की बात कहकर स्कूल से निकली थी। सीसीटीवी फुटेज में दोपहर 1:58 बजे उसके स्कूल से बाहर जाने की पुष्टि हुई थी। अदालत ने मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। अब सीबीआई को घटना के समय मोबाइल किसके पास था और उसकी लोकेशन कहां थी, इसकी भी जांच करनी होगी।
अदालत ने सुसाइड नोट की प्रमाणिकता की दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। इसके लिए मनीषा की 12वीं कक्षा के रजिस्टर में दर्ज लिखावट से उसका मिलान कराया जाएगा। दो प्रयोगशालाओं के कम से कम तीन विशेषज्ञों का बोर्ड यह जांच करेगा।
इसके अलावा एएसआई शकुंतला, डीएसपी संजीव कुमार, खाद भंडार संचालक और नर्सिंग कॉलेज मालिक की भूमिका की जांच करने को कहा गया है। संबंधित लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर सहमति से नार्को एनालिसिस और ब्रेन फिंगर प्रिंटिंग जैसे वैज्ञानिक परीक्षणों पर विचार किया जा सकता है।
11 अगस्त 2025 को स्कूल से निकली थी मनीषा
मनीषा भिवानी के सिंघानी क्षेत्र स्थित किड्स केयर प्ले स्कूल में शिक्षिका थी। 11 अगस्त 2025 को वह बीएससी नर्सिंग में दाखिले की जानकारी लेने के लिए आइडियल नर्सिंग कॉलेज जाने की बात कहकर स्कूल से निकली थी। सीसीटीवी फुटेज में दोपहर 1:58 बजे उसके स्कूल से बाहर जाने की पुष्टि हुई थी। अदालत ने मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। अब सीबीआई को घटना के समय मोबाइल किसके पास था और उसकी लोकेशन कहां थी, इसकी भी जांच करनी होगी।