पंचकूला में नदी बहाव क्षेत्र की सीमा तय नहीं: कौशल्या बांध के आसपास जारी है अवैध निर्माण, अगली बारिश में खतरा
2023 की भारी बारिश में कौशल्या क्षेत्र में तेज पानी के बहाव से नेशनल हाईवे, पुलों, मकानों और आसपास के इलाकों को नुकसान हुआ था। पहले भी आशंका जताई गई कि नदी के भीतर या बहाव क्षेत्र में निर्माण से पानी की दिशा बदल सकती है।
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नदी और बरसाती नालों के प्राकृतिक बहाव की जमीन पर पक्के ढांचे खड़े होते रहे, नोटिस जारी होते रहे लेकिन जिम्मेदार विभाग यह तक तय नहीं कर पाए कि बहाव क्षेत्र की सीमा कहां है।
कौशल्या-झाझरा क्षेत्र में निर्माण और कब्जे की शिकायतों के बावजूद अब तक संयुक्त पैमाइश नहीं हुई। सवाल है कि जब कुछ निर्माणों को पहले ही नोटिस दिए जा चुके हैं तो बहाव क्षेत्र की सीमा तय कर कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ी। इस बीच स्थायी दीवारों और कंक्रीट के ढांचे नदी के प्राकृतिक रास्ते की ओर बढ़ते जा रहे हैं।
कौशल्या बांध और इससे जुड़ा क्षेत्र पहले से संवेदनशील है। सिंचाई विभाग की विजिलेंस जांच में बांध को वाटर बम बताया जा चुका है। इसके बावजूद आसपास निर्माण जारी है। झाझरा में नदी और बरसाती नालों के बहाव क्षेत्र में निर्माण और कब्जे की शिकायतें भी सामने आई हैं।
पंचकूला प्रशासन ने डेंजर जोन से अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए हैं लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि संयुक्त पैमाइश कब होगी और कितने निर्माण नियमों के दायरे में हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले जारी नोटिस के बावजूद निर्माण पूरी तरह नहीं रुका और कार्रवाई कागजों तक सीमित रहने से निर्माणकर्ताओं को स्थायी ढांचे खड़े करने का समय मिलता गया।
2023 की भारी बारिश में कौशल्या क्षेत्र में तेज पानी के बहाव से नेशनल हाईवे, पुलों, मकानों और आसपास के इलाकों को नुकसान हुआ था। पहले भी आशंका जताई गई कि नदी के भीतर या बहाव क्षेत्र में निर्माण से पानी की दिशा बदल सकती है जिससे अमरावती पुल, बाईपास और आसपास की संपत्तियां खतरे में आ सकती हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता बबली रावत और भारत भूषण बंसल का कहना है कि कुछ जगहों पर निर्माण से पानी की दिशा प्रभावित हुई है। मानसून में पानी का दबाव और कटाव बढ़ने पर सूरजपुर-सुखोमाजरी बाईपास के किनारे की मिट्टी कमजोर हो सकती है। नदी की जमीन पर कब्जा सड़क और पुलों का जोखिम भी बढ़ा सकता है।
जांच नहीं, पहले हो पैमाइश
सिंचाई विभाग के एसडीओ मुनीश ने कहा कि मामला संज्ञान में है। क्षेत्र का निरीक्षण किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। डीसी सतपाल शर्मा ने बताया कि सिंचाई विभाग को डेंजर जोन से अवैध कब्जे हटाने और कब्जाधारियों पर कार्रवाई के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।
अधिवक्ता विजय बंसल, अमरावती रेजिडेंशियल एसोसिएशन के अध्यक्ष शमशेर शर्मा, बबली रावत और भारत भूषण बंसल ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि राजस्व, सिंचाई और प्रशासनिक विभाग संयुक्त पैमाइश कर नदी की जमीन और प्राकृतिक बहाव क्षेत्र की सीमा सार्वजनिक रूप से चिह्नित करें। हर निर्माण की अनुमति जांची जाए और उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई हो। प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए गए हैं, हालांकि स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सवाल सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं, अगली बारिश के खतरे का है। नदी का प्राकृतिक रास्ता समय रहते सुरक्षित नहीं किया गया तो नुकसान होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी?