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पंचकूला स्वास्थ्य विभाग में 25 लाख का घोटाला: स्वास्थ्य विभाग ने बदली रणनीति, अब चार काउंटरों पर चेक होंगे बिल
Thu, 15 Oct 2026 11:36 AM IST
Nivedita
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
Published by: Nivedita
Updated Thu, 15 Oct 2026 11:36 AM IST
सार
अकाउंट्स का काम देख रहे एक डेटा एंट्री ऑपरेटर ने बड़ी चालाकी से फर्जीवाड़ा किया। उसने डीएनबी ट्रेनी डॉक्टरों की सूची में फर्जी तरीके से अपना और अपनी पत्नी का बैंक खाता जोड़ दिया और सरकारी फंड सीधे अपने निजी खातों में क्रेडिट करवा लिया। यह गड़बड़झाला तब पकड़ा गया जब जून-जुलाई में फंड का बजट कम पड़ने लगा।
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पंचकूला स्वास्थ्य विभाग
- फोटो : संवाद
विस्तार
पंचकूला स्वास्थ्य विभाग के अकाउंट्स ब्रांच में डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) के ट्रेनी डॉक्टरों के फंड में करीब 25 लाख रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है।
मामले के उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी ऑपरेटर के बैंक खातों की स्टेटमेंट की जांच शुरू कर दी है, वहीं सेक्टर-7 थाना पुलिस भी मामले का सत्यापन कर रही है।
घोटाले के बाद विभाग ने अपनी पूरी भुगतान प्रणाली बदलने की रणनीति तैयार की है। अब किसी भी बिल और सैलरी को सीधे अकाउंट्स ब्रांच से नहीं निकाला जाएगा। नए आदेश के तहत हर बिल को चार काउंटरों पर चेक किया जाएगा और नोडल अफसर की जांच और सत्यापन के बाद ही सैलरी रिलीज होगी। अभी तक अकाउंट्स ब्रांच ही सीधे सैलरी निकालती थी, जिसका फायदा उठाकर यह हेराफेरी की गई।
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यह है मामला
जानकारी के अनुसार अकाउंट्स का काम देख रहे एक डेटा एंट्री ऑपरेटर ने बड़ी चालाकी से फर्जीवाड़ा किया। उसने डीएनबी ट्रेनी डॉक्टरों की सूची में फर्जी तरीके से अपना और अपनी पत्नी का बैंक खाता जोड़ दिया और सरकारी फंड सीधे अपने निजी खातों में क्रेडिट करवा लिया। यह गड़बड़झाला तब पकड़ा गया जब जून-जुलाई में फंड का बजट कम पड़ने लगा। अकाउंट्स ब्रांच की एक महिला असिस्टेंट को शक हुआ तो उसने लिस्ट का मिलान किया। जांच में अस्पताल से कोई संबंध न रखने वाले दो नाम और उनके बैंक खाते सामने आए। महिला असिस्टेंट ने तुरंत इसकी लिखित शिकायत आला अधिकारियों को दी।
सभी बिल सील, जांच तेज
शिकायत के बाद सोमवार को विभाग ने सभी बिलों को सील कर जब्त कर लिया। जब आरोपी ऑपरेटर से पूछताछ की गई तो उसने जुलाई 2025 से अब तक करीब 20 से 25 लाख रुपये के गबन की बात सामने आई। इसके बाद आरोपी ने 10 लाख रुपये विभाग के खाते में जमा भी करवा दिए हैं और बाकी रकम जल्द चुकाने की बात कही है।
फिलहाल विभागीय स्तर पर इंटरनल इंक्वायरी चल रही है। वहीं सेक्टर-7 थाना एसएचओ अंकित ढांडा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है, मामले की जांच और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि नई चार-स्तरीय जांच प्रणाली लागू होने से भविष्य में इस तरह के घोटाले की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
अस्पताल में काम कर रहे डाटा एंट्री ऑपरेटर ने लगभग 25 लाख रुपए का फर्जीवाड़ा किया है। यह खुलासा होते ही स्वास्थ्य विभाग ने 7 सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित कर सभी बिलों को सीज कर दिया है। अब से नोडल ऑफिसर डिपुटी किया है जो ऑफिस स्टाफ की सैलरी निकालेगा। - डा. आरएस चौहान, पीएमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग पंचकूला
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मामले के उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी ऑपरेटर के बैंक खातों की स्टेटमेंट की जांच शुरू कर दी है, वहीं सेक्टर-7 थाना पुलिस भी मामले का सत्यापन कर रही है।
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घोटाले के बाद विभाग ने अपनी पूरी भुगतान प्रणाली बदलने की रणनीति तैयार की है। अब किसी भी बिल और सैलरी को सीधे अकाउंट्स ब्रांच से नहीं निकाला जाएगा। नए आदेश के तहत हर बिल को चार काउंटरों पर चेक किया जाएगा और नोडल अफसर की जांच और सत्यापन के बाद ही सैलरी रिलीज होगी। अभी तक अकाउंट्स ब्रांच ही सीधे सैलरी निकालती थी, जिसका फायदा उठाकर यह हेराफेरी की गई।
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यह है मामला
जानकारी के अनुसार अकाउंट्स का काम देख रहे एक डेटा एंट्री ऑपरेटर ने बड़ी चालाकी से फर्जीवाड़ा किया। उसने डीएनबी ट्रेनी डॉक्टरों की सूची में फर्जी तरीके से अपना और अपनी पत्नी का बैंक खाता जोड़ दिया और सरकारी फंड सीधे अपने निजी खातों में क्रेडिट करवा लिया। यह गड़बड़झाला तब पकड़ा गया जब जून-जुलाई में फंड का बजट कम पड़ने लगा। अकाउंट्स ब्रांच की एक महिला असिस्टेंट को शक हुआ तो उसने लिस्ट का मिलान किया। जांच में अस्पताल से कोई संबंध न रखने वाले दो नाम और उनके बैंक खाते सामने आए। महिला असिस्टेंट ने तुरंत इसकी लिखित शिकायत आला अधिकारियों को दी।
सभी बिल सील, जांच तेज
शिकायत के बाद सोमवार को विभाग ने सभी बिलों को सील कर जब्त कर लिया। जब आरोपी ऑपरेटर से पूछताछ की गई तो उसने जुलाई 2025 से अब तक करीब 20 से 25 लाख रुपये के गबन की बात सामने आई। इसके बाद आरोपी ने 10 लाख रुपये विभाग के खाते में जमा भी करवा दिए हैं और बाकी रकम जल्द चुकाने की बात कही है।
फिलहाल विभागीय स्तर पर इंटरनल इंक्वायरी चल रही है। वहीं सेक्टर-7 थाना एसएचओ अंकित ढांडा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है, मामले की जांच और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि नई चार-स्तरीय जांच प्रणाली लागू होने से भविष्य में इस तरह के घोटाले की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
अस्पताल में काम कर रहे डाटा एंट्री ऑपरेटर ने लगभग 25 लाख रुपए का फर्जीवाड़ा किया है। यह खुलासा होते ही स्वास्थ्य विभाग ने 7 सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित कर सभी बिलों को सीज कर दिया है। अब से नोडल ऑफिसर डिपुटी किया है जो ऑफिस स्टाफ की सैलरी निकालेगा। - डा. आरएस चौहान, पीएमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग पंचकूला