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Panipat News: 23.56 करोड़ खर्च, फिर भी सूखी पड़ी हाली झील
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हाली झील का उखड़ा उद्घाटन बोर्ड। संवाद
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जगमहेंद्र सरोहा
पानीपत। मशहूर शायर अल्ताफ हुसैन हाली के नाम से बनी हाली झील आज भी पूरी तरह सूखी पड़ी है। निगम इस पर 23.56 करोड़ रुपये लगा चुका है। इसके बाद भी शहरवासियों का नौका विहार का सपना आज भी लटका हुआ है। एक सितंबर को हरियाणा विधानसभा में पेश देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में इस बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम प्रशासन में खलबली है।
हाली झील करीब 28 एकड़ में है। इसमें आठ एकड़ में झील है। सीएजी की रिपोर्ट में बताया कि राज्य सरकार ने दिसंबर 2016 में हाली पार्क झील के पुनर्विकास के लिए प्रशासनिक मंजूरी दी थी। इसके बाद नवंबर 2017 में नगर निगम ने 23.40 करोड़ रुपये की विस्तृत लागत तय कर तकनीकी स्वीकृति प्रदान की। दिसंबर 2017 में श्री बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम सौंपा गया। ठेकेदार ने 17 जनवरी 2018 को निर्माण कार्य शुरू किया था। इस पूरी परियोजना को 20 महीने की अवधि में यानी अगस्त 2019 तक पूरा किया जाना तय हुआ था।
ओपन एयर थिएटर और बोटिंग का दिखाया था सपना
इस परियोजना के तहत हाली झील को बोटिंग साइट के रूप में विकसित करने के अलावा कई आधुनिक सुविधाएं तैयार की जानी थी। इसमें ओपन एयर थिएटर, सुंदर गार्डन कैफे, कियोस्क, पार्किंग, बाजार और पब्लिक प्लाजा जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं शामिल थी। इसे शहरवासियों के लिए एक प्रमुख मनोरंजन केंद्र के रूप में उभारा जाना था। निगम अधिकारियों की सुस्ती के चलते करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता के हाथ केवल निराशा ही लगी और बोटिंग का सपना अब महज कागजों तक सीमित रह गया है।
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जरूरी मंजूरियां लेने में देरी और पाइपलाइन का न बिछना बना रोड़ा
झील को भरने के लिए पैरेलल दिल्ली नहर से हाली पार्क झील तक लगभग 2.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जानी थी। हालांकि, नगर निगम ने वन विभाग, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने में बेहद सुस्ती दिखाई। जून 2018 से दिसंबर 2020 तक आवेदन किए गए और मंजूरियां मिलने की प्रक्रिया दिसंबर 2022 तक खिंच गई। समय पर अनुमतियां न मिलने के कारण पाइपलाइन बिछाने का काम अटक गया और पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। अगस्त 2022 में कराई गई थर्ड पार्टी जांच में भी कई काम अधूरे और घटिया पाए गए थे। निगम इसके बाद पाइपलाइन बिछाई। इसके बाद मोटर, पंप और ट्रांसफार्मर की कैपेसिटी बढ़ाने की जरूरत महसूस की। इस पर काम किया गया। इसके बाद भी झील में पानी नहीं आया।
अतिरिक्त खर्च के बाद भी तीन साल से अनुपयोगी पड़ी है झील
मूल टेंडर के अलावा भी नगर निगम इस प्रोजेक्ट पर रखरखाव और अन्य कार्यों के नाम पर करीब 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि खर्च कर चुका है। इस तरह 23.56 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बाद भी पानी की कमी के चलते पिछले तीन वर्षों से झील का कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है।
शहरवासी बोले झील में पानी की जरूरत
काबड़ी रोड के रमेश ने बताया कि हाली झील को पिकनिक स्थल बनाया जाना था। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी झील सूखी पड़ी है। ऐसे में लोगों की उम्मीद टूट गई है। अमनदीप कुशवाह ने बताया कि हाली पार्क की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन इसके साथ झील सूखी पड़ी है।
वर्जन :
नहर से झील तक पानी लाने का प्रयास किया गया है। इसके लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी। झील की जमीन पानी सोख लेती है। ऐसे में पानी रोकने के लिए मिट्टी डाली गई थी। झील में जल्द ही पानी लाया जाएगा।
डॉ. पंकज, आयुक्त, नगर निगम।
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पानीपत। मशहूर शायर अल्ताफ हुसैन हाली के नाम से बनी हाली झील आज भी पूरी तरह सूखी पड़ी है। निगम इस पर 23.56 करोड़ रुपये लगा चुका है। इसके बाद भी शहरवासियों का नौका विहार का सपना आज भी लटका हुआ है। एक सितंबर को हरियाणा विधानसभा में पेश देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में इस बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम प्रशासन में खलबली है।
हाली झील करीब 28 एकड़ में है। इसमें आठ एकड़ में झील है। सीएजी की रिपोर्ट में बताया कि राज्य सरकार ने दिसंबर 2016 में हाली पार्क झील के पुनर्विकास के लिए प्रशासनिक मंजूरी दी थी। इसके बाद नवंबर 2017 में नगर निगम ने 23.40 करोड़ रुपये की विस्तृत लागत तय कर तकनीकी स्वीकृति प्रदान की। दिसंबर 2017 में श्री बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम सौंपा गया। ठेकेदार ने 17 जनवरी 2018 को निर्माण कार्य शुरू किया था। इस पूरी परियोजना को 20 महीने की अवधि में यानी अगस्त 2019 तक पूरा किया जाना तय हुआ था।
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ओपन एयर थिएटर और बोटिंग का दिखाया था सपना
इस परियोजना के तहत हाली झील को बोटिंग साइट के रूप में विकसित करने के अलावा कई आधुनिक सुविधाएं तैयार की जानी थी। इसमें ओपन एयर थिएटर, सुंदर गार्डन कैफे, कियोस्क, पार्किंग, बाजार और पब्लिक प्लाजा जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं शामिल थी। इसे शहरवासियों के लिए एक प्रमुख मनोरंजन केंद्र के रूप में उभारा जाना था। निगम अधिकारियों की सुस्ती के चलते करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता के हाथ केवल निराशा ही लगी और बोटिंग का सपना अब महज कागजों तक सीमित रह गया है।
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जरूरी मंजूरियां लेने में देरी और पाइपलाइन का न बिछना बना रोड़ा
झील को भरने के लिए पैरेलल दिल्ली नहर से हाली पार्क झील तक लगभग 2.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जानी थी। हालांकि, नगर निगम ने वन विभाग, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने में बेहद सुस्ती दिखाई। जून 2018 से दिसंबर 2020 तक आवेदन किए गए और मंजूरियां मिलने की प्रक्रिया दिसंबर 2022 तक खिंच गई। समय पर अनुमतियां न मिलने के कारण पाइपलाइन बिछाने का काम अटक गया और पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। अगस्त 2022 में कराई गई थर्ड पार्टी जांच में भी कई काम अधूरे और घटिया पाए गए थे। निगम इसके बाद पाइपलाइन बिछाई। इसके बाद मोटर, पंप और ट्रांसफार्मर की कैपेसिटी बढ़ाने की जरूरत महसूस की। इस पर काम किया गया। इसके बाद भी झील में पानी नहीं आया।
अतिरिक्त खर्च के बाद भी तीन साल से अनुपयोगी पड़ी है झील
मूल टेंडर के अलावा भी नगर निगम इस प्रोजेक्ट पर रखरखाव और अन्य कार्यों के नाम पर करीब 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि खर्च कर चुका है। इस तरह 23.56 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बाद भी पानी की कमी के चलते पिछले तीन वर्षों से झील का कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है।
शहरवासी बोले झील में पानी की जरूरत
काबड़ी रोड के रमेश ने बताया कि हाली झील को पिकनिक स्थल बनाया जाना था। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी झील सूखी पड़ी है। ऐसे में लोगों की उम्मीद टूट गई है। अमनदीप कुशवाह ने बताया कि हाली पार्क की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन इसके साथ झील सूखी पड़ी है।
वर्जन :
नहर से झील तक पानी लाने का प्रयास किया गया है। इसके लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी। झील की जमीन पानी सोख लेती है। ऐसे में पानी रोकने के लिए मिट्टी डाली गई थी। झील में जल्द ही पानी लाया जाएगा।
डॉ. पंकज, आयुक्त, नगर निगम।

हाली झील का उखड़ा उद्घाटन बोर्ड। संवाद