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Rewari News: बिजली निगम को झटका, कोर्ट ने असेसमेंट आदेशों को अवैध ठहराया
Fri, 30 Oct 2026 12:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 30 Oct 2026 12:29 AM IST
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रेवाड़ी। बिजली बिलों की वसूली, लोक अदालत में हुए समझौते और बिजली चोरी के आरोपों से जुड़े तीन मामलों में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अहम फैसले सुनाए हैं। अदालत ने एक मामले में लोक अदालत में तय शर्तों का समय पर पालन नहीं करने पर उपभोक्ता की अपील खारिज कर दी, जबकि अन्य दो मामलों में बिजली निगम की ओर से बिजली चोरी के आरोप में जारी असेसमेंट आदेशों को अवैध ठहराया। लाल सिंह के मामले में अदालत ने जमा कराई गई असेसमेंट राशि 30 दिन में लौटाने के निर्देश भी दिए हैं। फैसलों में अदालत ने स्पष्ट किया कि लोक अदालत के समझौते की शर्तों का पालन जरूरी है और बिजली चोरी के मामलों में नागरिक देनदारी तय करने का अधिकार विशेष अदालत के पास है।
केस-1: समझौते की शर्त पूरी नहीं की, महिला की अपील खारिज
गणपत नगर निवासी चंद्र प्रभा ने बिजली निगम के 2,14,718 रुपये के बिल को चुनौती दी थी। 12 नवंबर 2016 को राष्ट्रीय लोक अदालत में समझौता हुआ था। इसके तहत उन्हें निर्धारित अवधि में बिल की 50 प्रतिशत राशि और शेष राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज जमा कराना था। उन्होंने पहले जमा 70 हजार रुपये के अलावा 24 अप्रैल 2017 को 50 हजार रुपये और जमा कराए। उनका कहना था कि इसके बाद भी निगम ने बिलों में बकाया राशि दिखानी जारी रखी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित गौतम की अदालत ने पाया कि समझौते के अनुसार शेष राशि 30 दिन के भीतर जमा करानी थी, लेकिन 50 हजार रुपये की दूसरी किस्त तय समय के बाद जमा कराई गई। निर्धारित अवधि में भुगतान की कोशिश करने के दावे के समर्थन में भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। अदालत ने निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए चंद्र प्रभा की अपील खारिज कर दी।
केस-2: मीटर खराब होने के मामले में 25,411 रुपये का असेसमेंट आदेश रद
मोहल्ला पंचवाला निवासी अरुण कुमार के बिजली मीटर को लेकर निगम ने 18 जून 2020 को 25,411 रुपये का असेसमेंट आदेश और 8,000 रुपये का कंपाउंडिंग नोटिस जारी किया था। अरुण का कहना था कि 3 मार्च 2020 को एक टेंपो की टक्कर से उनका मीटर क्षतिग्रस्त हो गया था। निगम ने जांच में मीटर के आंतरिक सर्किट से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जतिन गर्ग की अदालत ने निगम की अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए असेसमेंट आदेश को अवैध घोषित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिजली चोरी के मामलों में नागरिक देनदारी तय करने का अधिकार विशेष अदालत को है। कंपाउंडिंग नोटिस को रद नहीं किया गया, क्योंकि यह स्वैच्छिक विकल्प है, वसूली योग्य बकाया नहीं।
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केस-3: किसान लाल सिंह को राहत, 84,476 रुपये का आदेश अवैध
जखाला गांव निवासी 75 वर्षीय किसान लाल सिंह पर बिजली निगम ने सीधे बिजली इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए 27 अक्तूबर 2020 को 84,476 रुपये का असेसमेंट आदेश और 10 हजार रुपये का कंपाउंडिंग नोटिस जारी किया था। लाल सिंह ने आरोपों को गलत बताते हुए अदालत में चुनौती दी थी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जतिन गर्ग ने उनकी अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर असेसमेंट आदेश को अवैध और निरस्त करने योग्य घोषित किया। अदालत ने निर्देश दिया कि असेसमेंट के रूप में जमा कराई गई राशि कंपाउंडिंग रकम को छोड़कर 30 दिन में लौटाई जाए। देरी होने पर निगम को फैसले की तारीख से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली चोरी हुई थी या नहीं, इसका फैसला विशेष अदालत करेगी।
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केस-1: समझौते की शर्त पूरी नहीं की, महिला की अपील खारिज
गणपत नगर निवासी चंद्र प्रभा ने बिजली निगम के 2,14,718 रुपये के बिल को चुनौती दी थी। 12 नवंबर 2016 को राष्ट्रीय लोक अदालत में समझौता हुआ था। इसके तहत उन्हें निर्धारित अवधि में बिल की 50 प्रतिशत राशि और शेष राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज जमा कराना था। उन्होंने पहले जमा 70 हजार रुपये के अलावा 24 अप्रैल 2017 को 50 हजार रुपये और जमा कराए। उनका कहना था कि इसके बाद भी निगम ने बिलों में बकाया राशि दिखानी जारी रखी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित गौतम की अदालत ने पाया कि समझौते के अनुसार शेष राशि 30 दिन के भीतर जमा करानी थी, लेकिन 50 हजार रुपये की दूसरी किस्त तय समय के बाद जमा कराई गई। निर्धारित अवधि में भुगतान की कोशिश करने के दावे के समर्थन में भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। अदालत ने निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए चंद्र प्रभा की अपील खारिज कर दी।
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केस-2: मीटर खराब होने के मामले में 25,411 रुपये का असेसमेंट आदेश रद
मोहल्ला पंचवाला निवासी अरुण कुमार के बिजली मीटर को लेकर निगम ने 18 जून 2020 को 25,411 रुपये का असेसमेंट आदेश और 8,000 रुपये का कंपाउंडिंग नोटिस जारी किया था। अरुण का कहना था कि 3 मार्च 2020 को एक टेंपो की टक्कर से उनका मीटर क्षतिग्रस्त हो गया था। निगम ने जांच में मीटर के आंतरिक सर्किट से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जतिन गर्ग की अदालत ने निगम की अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए असेसमेंट आदेश को अवैध घोषित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिजली चोरी के मामलों में नागरिक देनदारी तय करने का अधिकार विशेष अदालत को है। कंपाउंडिंग नोटिस को रद नहीं किया गया, क्योंकि यह स्वैच्छिक विकल्प है, वसूली योग्य बकाया नहीं।
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केस-3: किसान लाल सिंह को राहत, 84,476 रुपये का आदेश अवैध
जखाला गांव निवासी 75 वर्षीय किसान लाल सिंह पर बिजली निगम ने सीधे बिजली इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए 27 अक्तूबर 2020 को 84,476 रुपये का असेसमेंट आदेश और 10 हजार रुपये का कंपाउंडिंग नोटिस जारी किया था। लाल सिंह ने आरोपों को गलत बताते हुए अदालत में चुनौती दी थी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जतिन गर्ग ने उनकी अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर असेसमेंट आदेश को अवैध और निरस्त करने योग्य घोषित किया। अदालत ने निर्देश दिया कि असेसमेंट के रूप में जमा कराई गई राशि कंपाउंडिंग रकम को छोड़कर 30 दिन में लौटाई जाए। देरी होने पर निगम को फैसले की तारीख से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली चोरी हुई थी या नहीं, इसका फैसला विशेष अदालत करेगी।