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Rewari News: नैक की तैयारी को लेकर हुई कार्यशाला, कहा- निरंतर रूप से डाटा एकत्रित करने होंगे
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 16 Mar 2026 02:05 AM IST
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विवि में आयोजित कार्यशाला में भाग लेते प्रोफेसर्स व विद्यार्थी। स्रोत : विवि
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रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में आगामी नैक की तैयारी को ध्यान में रखते हुए आंतरिक गुणवत्ता एवं प्रत्यायन प्रकोष्ठ (आइक्यूएसी) की तरफ से एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी ने की।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर सुरेश गहलावत ने कहा कि इसके लिए निरंतर रूप से हमें डाटा एकत्रित करने होंगे और उन्हें व्यवस्थित रूप से एक रिपोर्ट रूप में तैयार करना पड़ेगा साथ ही इसका प्रभावी ढंग से प्रस्तुतीकरण भी उतना ही महत्व रखता है। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर असीम मिगलानी ने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी भवनों के प्रत्येक तल पर एक स्मार्ट क्लासरूम का निर्माण करवाया जाएगा।
उन्होंने सभी शिक्षकों को प्रेरित किया कि वह प्रतिष्ठित जनरल्स में अच्छे गुणवत्तापूर्ण रिसर्च पेपर प्रकाशित करवाई और साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम करें। उन्होंने विवि के नॉन-टीचिंग स्टाफ को भी सहयोग करने और आवश्यकता पड़ने पर सूचनाओं को उपलब्ध करवाने एवं कुशल कैंपस प्रबंधन के लिए आवश्यक उपाय करने के लिए कहा।
कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने विश्वविद्यालय के विकास की दिशा में निरंतर मिलकर कार्य करने और विद्यार्थियों के हितों में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर साइंस दिवस कार्यक्रम नवोन्मेष में अपना योगदान देने वाले टीचिंग व नॉन टीचिंग स्टाफ सदस्यों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए गए।
गुणवत्ता से संबंधित विभिन्न आयामों के बारे में बताया
प्रथम तकनीकी सत्र में विशेषज्ञ प्रोफेसर नमीष मिगलानी ने गुणवत्ता से संबंधित विभिन्न आयामों के बारे में बताया। इसके साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा एवं मूल्य बोध जैसे विषयों को किस प्रकार से विश्वविद्यालय द्वारा अपने सिलेबस में शामिल किया जा सकता है उस पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने एक इंस्टीट्यूशन डेवलपमेंट प्लान बनने पर भी जोर दिया। प्रथम तकनीकी सत्र की धन्यवाद प्रस्तावना डायरेक्टर रिसर्च प्रोफेसर पंकज कुमार त्यागी ने रखी।
आउटकम आधारित सिलेबस निर्माण की दी जानकारी
दूसरे तकनीकी सत्र में प्रोफेसर संदीप ग्रोवर ने आउटकम आधारित सिलेबस निर्माण एवं उसकी प्राप्ति के संबंध में विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने ब्लूम टैक्सनॉमी के बारे में भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि नैक से मिलने वाले ग्रेडिंग में प्रोग्राम आउटकम, प्रोग्राम स्पेसिफिक आउटकम, कोर्स आउटकम के निर्माण और उनके परस्पर संयोजन का विशेष महत्व रहता है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों का मूल्यांकन भी इस आधार पर होना चाहिए कि किस स्तर तक हम उन आउटकम अर्थात लक्षण को प्राप्त कर पा रहे हैं।
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विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर सुरेश गहलावत ने कहा कि इसके लिए निरंतर रूप से हमें डाटा एकत्रित करने होंगे और उन्हें व्यवस्थित रूप से एक रिपोर्ट रूप में तैयार करना पड़ेगा साथ ही इसका प्रभावी ढंग से प्रस्तुतीकरण भी उतना ही महत्व रखता है। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर असीम मिगलानी ने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी भवनों के प्रत्येक तल पर एक स्मार्ट क्लासरूम का निर्माण करवाया जाएगा।
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उन्होंने सभी शिक्षकों को प्रेरित किया कि वह प्रतिष्ठित जनरल्स में अच्छे गुणवत्तापूर्ण रिसर्च पेपर प्रकाशित करवाई और साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम करें। उन्होंने विवि के नॉन-टीचिंग स्टाफ को भी सहयोग करने और आवश्यकता पड़ने पर सूचनाओं को उपलब्ध करवाने एवं कुशल कैंपस प्रबंधन के लिए आवश्यक उपाय करने के लिए कहा।
कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने विश्वविद्यालय के विकास की दिशा में निरंतर मिलकर कार्य करने और विद्यार्थियों के हितों में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर साइंस दिवस कार्यक्रम नवोन्मेष में अपना योगदान देने वाले टीचिंग व नॉन टीचिंग स्टाफ सदस्यों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए गए।
गुणवत्ता से संबंधित विभिन्न आयामों के बारे में बताया
प्रथम तकनीकी सत्र में विशेषज्ञ प्रोफेसर नमीष मिगलानी ने गुणवत्ता से संबंधित विभिन्न आयामों के बारे में बताया। इसके साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा एवं मूल्य बोध जैसे विषयों को किस प्रकार से विश्वविद्यालय द्वारा अपने सिलेबस में शामिल किया जा सकता है उस पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने एक इंस्टीट्यूशन डेवलपमेंट प्लान बनने पर भी जोर दिया। प्रथम तकनीकी सत्र की धन्यवाद प्रस्तावना डायरेक्टर रिसर्च प्रोफेसर पंकज कुमार त्यागी ने रखी।
आउटकम आधारित सिलेबस निर्माण की दी जानकारी
दूसरे तकनीकी सत्र में प्रोफेसर संदीप ग्रोवर ने आउटकम आधारित सिलेबस निर्माण एवं उसकी प्राप्ति के संबंध में विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने ब्लूम टैक्सनॉमी के बारे में भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि नैक से मिलने वाले ग्रेडिंग में प्रोग्राम आउटकम, प्रोग्राम स्पेसिफिक आउटकम, कोर्स आउटकम के निर्माण और उनके परस्पर संयोजन का विशेष महत्व रहता है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों का मूल्यांकन भी इस आधार पर होना चाहिए कि किस स्तर तक हम उन आउटकम अर्थात लक्षण को प्राप्त कर पा रहे हैं।