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Rohtak News: डॉक्टर की नौकरी छोड़ अंकिता ने यूपीएससी में पाई 442वीं रैंक

संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Sat, 07 Mar 2026 02:43 AM IST
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Ankita left her job as a doctor and secured the 442nd rank in the UPSC.
22 प्रद्युम्न सेठ रंगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहतक। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में रोहतक के दो युवाओं ने शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। सेक्टर-4 एक्सटेंशन की रहने वाली डॉ. अंकिता सिवाच ने ऑल इंडिया 442वीं रैंक हासिल की और जिले के गांव कुलताना के प्रद्युम्न सेठ रंगा ने 853वीं रैंक प्राप्त की। दोनों की सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, असफलताओं से सीख और परिवार का सहयोग रहा।

डॉ. अंकिता सिवाच ने अपनी स्कूली शिक्षा रोहतक के मॉडल स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बीपीएस गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज फॉर वुमेन, खानपुर कलां से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और वहीं डॉक्टर के रूप में नौकरी भी लग गई थी।
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अंकिता बताती हैं कि उन्होंने एमबीबीएस इंटर्नशिप के दौरान वर्ष 2023 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की। शुरुआत के दो प्रयासों में सफलता नहीं मिली। एक बार तो उनका चयन 15-16 अंकों से रह गया जो उनके लिए सबसे बड़ा संघर्षपूर्ण पल था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और नौकरी छोड़कर पूरी तरह तैयारी में जुट गईं।
रोजाना औसतन 7 से 8 घंटे पढ़ाई की, कमजोर विषयों पर किया फोकस

उन्होंने सोशल मीडिया विशेष ताैर पर इंस्टाग्राम से दूरी बनाकर पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। तैयारी के लिए वह यू ट्यूब और टेलीग्राम का उपयोग करती थीं और व्हाट्सएप केवल बातचीत के लिए इस्तेमाल करती थीं। अंकिता रोजाना औसतन 7 से 8 घंटे पढ़ाई करती थीं। उनका वैकल्पिक विषय मेडिकल साइंस था। यह फैसला जोखिम भरा था लेकिन उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया। उनका मानना है कि कमजोर विषयों पर लगातार मेहनत करने से ही सफलता मिली। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि आत्मविश्वास, सही रणनीति और निरंतर प्रयास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

गांव कुलताना के आईटीटी प्रद्युम्न सेठ रंगा ने 853वीं रैंक प्राप्त की

गांव कुल्ताना के निवासी प्रद्युम्न सेठ रंगा ने पांचवें प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में 853वीं रैंक हासिल की। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा रोहतक के मॉडल स्कूल से प्राप्त की और बाद में आईआईटी रुड़की से बीटेक की। वर्ष 2021 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी। वह दो बार इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया। तीसरी बार इंटरव्यू में पहुंचकर उन्होंने सफलता हासिल की। तैयारी के समय वह रोजाना करीब 12 घंटे पढ़ाई करते थे। उनका वैकल्पिक विषय भूगोल था और उन्होंने पांच वर्षों से अपने सोशल मीडिया अकाउंट भी निष्क्रिय रखे थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में उनका चयन केवल तीन अंकों से रह गया था जो उनके लिए सबसे बुरा वक्त था। 2023 और 2024 में जब उनके कई दोस्तों का चयन होकर वे प्रशिक्षण के लिए मसूरी चले गए, तब उन्हें काफी निराशा हुई। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत जारी रखी।
आकाशवाणी रोहतक के पूर्व केंद्र प्रमुख रह चुके पिता

प्रद्युम्न ने सफलता का श्रेय माता-पिता को देते हैं। उनके पिता डॉ. एसएस रंगा आकाशवाणी रोहतक के पूर्व केंद्र प्रमुख रह चुके हैं और अब प्रदेश सरकार में मनरेगा के तहत रोहतक में लोकपाल के पद पर कार्यरत हैं। उनकी माता वीणा देवी हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। मेहनत और धैर्य ही सफलता की असली कुंजी है।
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बहुअकबरपुर की बहू दिव्या ने पांचवें प्रयास में पाई 853वीं रैंक

बहुअकबरपुर की बहू दिव्या 2018 से लगातार पांच बार प्रयास के बाद 182वीं रैंक हासिल की है। उन्हें कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा। पहले तीन प्रयास में वह प्रीलिम्स ही पास नहीं कर पाईं। 2022 में इंटरव्यू तक पहुंचीं लेकिन फाइनल चयन नहीं हुआ। इस बीच 2024 में उनकी शादी हो गई।। इसके बाद उन्होंने परीक्षा छोड़ने का मन बनाया था। पति आईएएस पुलकित बल्हारा के प्रोत्साहन और परिवार के सहयोग ने उन्हें हिम्मत दी। इस बार दिव्या ने पहले की गलतियों से सीख लेते हुए कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ तैयार कर सफलता हासिल की।

22 प्रद्युम्न सेठ रंगा।

22 प्रद्युम्न सेठ रंगा।

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