{"_id":"69a742be72751108010031c8","slug":"holi-in-sundana-is-special36-communities-apply-the-color-of-love-to-each-other-rohtak-news-c-17-roh1020-819098-2026-03-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: सुंडाना की होली है खास...36 बिरादरी एक दूसरे को लगाती है प्रेम का रंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: सुंडाना की होली है खास...36 बिरादरी एक दूसरे को लगाती है प्रेम का रंग
विज्ञापन
4-सुंडाना गांव में होली खेलते भाभी व देवर। स्रोत : पाठक
विज्ञापन
रोहतक। जहां एक ओर समय के साथ होली की पुरानी परंपराएं खत्म होती जा रही हैं। वहीं जिले का गांव सुंडाना आज भी अपनी अनोखी परंपरा को संजोए हुए है। यहां 36 बिरादरी एक दूसरे को प्रेम का रंग लगाती है। सभी ग्रामीण चौक में पानी से भरे बड़े टब और कढ़ाइयां रखकर खेलते हैं होली
यहां खेली जाने वाली कोड़ा होली पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। यह सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं बल्कि भाईचारे, प्रेम और संस्कृति का उत्सव माना जाती है। सरपंच अंजु बाला ने बताया कि होली के दिन गांव की 36 बिरादरी के लोग एक साथ चौक-चौराहों पर इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से फाग खेलते हैं।
चौक में पानी से भरे बड़े टब और कढ़ाइयां रखी जाती हैं। यह होली खास तौर पर देवर-भाभी के रिश्ते को समर्पित है। एक ओर देवर भाभियों को रंग और पानी से भिगोते हैं, वहीं महिलाएं पुरुषों पर हंसी-मजाक के बीच कोड़े बरसाती हैं। पूरा माहौल गीत-संगीत और हंसी-ठिठोली से गूंजता रहता है।
सुंडाना की एक और खास बात यह है कि यहां पिछले करीब 100 साल से होलिका दहन नहीं हुआ है। दलेल सिंह निवासी ने बताया कि कई साल पहले होली की आग में एक गाय, बछड़ा और एक बच्चा झुलस गए थे, जिनकी मौत हो गई थी।
करीब 11 हजार की आबादी वाले इस गांव में आज तक यह संयोग नहीं हुआ। इसलिए यहां होलिका दहन नहीं होता लेकिन फाग और कोड़ा होली की परंपरा आज भी पूरे उत्साह से निभाई जाती है।
फाग खिलने के बाद बांटी जाती है मिठाई
ग्रामीण विपिन ढाका ने बताया कि चौक चराहों पर पानी के बड़े-बड़े टब व कढ़ाए रखे जाते हैं। ये होली देवर और भाभियों के लिए खास होती है। एक ओर जहां देवर भाभियां को रंग व पानी से भिगोते हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाएं पुरुषाें पर जमकर कोरड़े बरसाती हैं। शाम तक जमकर खेलने के बाद घर-घर मिठाई भिजवाई जाती है।
Trending Videos
यहां खेली जाने वाली कोड़ा होली पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। यह सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं बल्कि भाईचारे, प्रेम और संस्कृति का उत्सव माना जाती है। सरपंच अंजु बाला ने बताया कि होली के दिन गांव की 36 बिरादरी के लोग एक साथ चौक-चौराहों पर इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से फाग खेलते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
चौक में पानी से भरे बड़े टब और कढ़ाइयां रखी जाती हैं। यह होली खास तौर पर देवर-भाभी के रिश्ते को समर्पित है। एक ओर देवर भाभियों को रंग और पानी से भिगोते हैं, वहीं महिलाएं पुरुषों पर हंसी-मजाक के बीच कोड़े बरसाती हैं। पूरा माहौल गीत-संगीत और हंसी-ठिठोली से गूंजता रहता है।
सुंडाना की एक और खास बात यह है कि यहां पिछले करीब 100 साल से होलिका दहन नहीं हुआ है। दलेल सिंह निवासी ने बताया कि कई साल पहले होली की आग में एक गाय, बछड़ा और एक बच्चा झुलस गए थे, जिनकी मौत हो गई थी।
करीब 11 हजार की आबादी वाले इस गांव में आज तक यह संयोग नहीं हुआ। इसलिए यहां होलिका दहन नहीं होता लेकिन फाग और कोड़ा होली की परंपरा आज भी पूरे उत्साह से निभाई जाती है।
फाग खिलने के बाद बांटी जाती है मिठाई
ग्रामीण विपिन ढाका ने बताया कि चौक चराहों पर पानी के बड़े-बड़े टब व कढ़ाए रखे जाते हैं। ये होली देवर और भाभियों के लिए खास होती है। एक ओर जहां देवर भाभियां को रंग व पानी से भिगोते हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाएं पुरुषाें पर जमकर कोरड़े बरसाती हैं। शाम तक जमकर खेलने के बाद घर-घर मिठाई भिजवाई जाती है।

4-सुंडाना गांव में होली खेलते भाभी व देवर। स्रोत : पाठक