{"_id":"697bb49f178ac5ab8e091470","slug":"leprosy-can-be-cured-with-timely-diagnosis-and-treatment-rohtak-news-c-17-roh1020-802223-2026-01-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: समय पर पहचान और इलाज से ठीक हो सकता है कुष्ठ रोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: समय पर पहचान और इलाज से ठीक हो सकता है कुष्ठ रोग
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 30 Jan 2026 12:57 AM IST
विज्ञापन
07...डॉ. दिनेश मलिक,त्वचा रोग विशेषज्ञ,नागरिक हस्पताल
विज्ञापन
रोहतक। कुष्ठ रोग के बेहतर उपचार और समाज में फैली भ्रांतियों के खिलाफ जागरूकता के कारण मरीजों की संख्या 50 प्रतिशत घटी है। नागरिक अस्पताल में कार्यरत त्वचा विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मलिक ने बताया कि कुष्ठ रोग आज भी है लेकिन सही समय पर पहचान और इलाज से यह ठीक हो जाता है है।
अस्पताल में हर माह 10 मरीज कुष्ठ रोग से पीड़ित आते हैं। पांच साल पहले करीब 25 मरीज कुष्ठ रोग के अस्पताल आते थे। कुष्ठ छुआछूत की बीमारी नहीं है। न ही वंशानुगत रोग है। यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है जिसका इलाज सरकारी अस्पतालों में मुफ्त होता है। यह माइकोेबैक्टीरियम लेप्रे बैक्टीरिया के कारण होता है। इसकी वजह से त्वचा, मांसपेशियों, नसें प्रभावित होती हैं। 25 साल में मरीज बहुत घटे हैं।सामाजिक डर के कारण कई मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।
अस्पताल में कुष्ठ रोग की जांच और मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) की सुविधा उपलब्ध है। इलाज के दौरान मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। नियमित दवा लेने से संक्रमण दूसरों तक नहीं फैलता। पहले की अपेक्षा मरीजों में साइड इफेक्ट भी कम देखने को मिल रहे हैं। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को कुष्ठ रोग दिवस के रूप में मनाया जाता है।
शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर हल्के रंग के धब्बे, उन हिस्सों में सुन्नपन, हाथ-पैरों में झुनझुनी, कमजोरी और नसों में दर्द शामिल हैं। कई बार मरीज इन लक्षणों को सामान्य रोग समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। समय रहते इलाज करने से शारीरिक विकलांगता से भी बचा जा सकता है।- डॉ. दिनेश मलिक, त्वचा विशेषज्ञ
Trending Videos
अस्पताल में हर माह 10 मरीज कुष्ठ रोग से पीड़ित आते हैं। पांच साल पहले करीब 25 मरीज कुष्ठ रोग के अस्पताल आते थे। कुष्ठ छुआछूत की बीमारी नहीं है। न ही वंशानुगत रोग है। यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है जिसका इलाज सरकारी अस्पतालों में मुफ्त होता है। यह माइकोेबैक्टीरियम लेप्रे बैक्टीरिया के कारण होता है। इसकी वजह से त्वचा, मांसपेशियों, नसें प्रभावित होती हैं। 25 साल में मरीज बहुत घटे हैं।सामाजिक डर के कारण कई मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अस्पताल में कुष्ठ रोग की जांच और मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) की सुविधा उपलब्ध है। इलाज के दौरान मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। नियमित दवा लेने से संक्रमण दूसरों तक नहीं फैलता। पहले की अपेक्षा मरीजों में साइड इफेक्ट भी कम देखने को मिल रहे हैं। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को कुष्ठ रोग दिवस के रूप में मनाया जाता है।
शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर हल्के रंग के धब्बे, उन हिस्सों में सुन्नपन, हाथ-पैरों में झुनझुनी, कमजोरी और नसों में दर्द शामिल हैं। कई बार मरीज इन लक्षणों को सामान्य रोग समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। समय रहते इलाज करने से शारीरिक विकलांगता से भी बचा जा सकता है।- डॉ. दिनेश मलिक, त्वचा विशेषज्ञ