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Rohtak News: सुपवा में बनेगा स्टूडेंट सर्विस सेंटर, मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य पर रहेगा फोकस
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रोहतक। दादा लख्मीचंद प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय ने स्टूडेंट सर्विस सेंटर (एसएससी) बनाने का फैसला लिया है। यह 24 घंटे सातों दिन कार्यरत रहेगा जिसमें व्यक्तिगत, ऑनलाइन या हेल्पलाइन के जरिए भी संपर्क साध सकेंगे।
इसका मकसद छात्रों व फैकल्टी के मानसिक, शारीरिक व भावनात्मक स्वास्थ्य पर फोकस रखना है। एसएससी की स्थापना को यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) ने मंजूरी प्रदान कर दी है।
सुपवा के कुलपति डॉ. अमित आर्य ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रावधान किया गया है कि छात्रों की शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक भलाई सुनिश्चित करने के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में सहायता केंद्र व कॅरिअर काउंसलर उपलब्ध कराए जाएं। छात्रों में मानसिक तनाव बनाने के जिम्मेदार किसी भी प्रकार के खतरे, हमले, शारीरिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व भाषाई भेदभाव से छात्रों की व्यापक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
एसएससी छात्रों को अकादमिक दबाव, सहपाठी दबाव, व्यवहार संबंधी समस्याओं, तनाव, कॅरिअर से संबंधित चिंता, अवसाद व मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित अन्य मुद्दों के प्रति सुरक्षा प्रदान करने में लाभकारी सिद्ध होगा। यह ऑनलाइन मोड व्यक्तिगत रूप से टेलीफोन हेल्पलाइन के माध्यम के जरिए परिस्थितियों के अनुसार परामर्श, मार्गदर्शन, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेगा।
एसएससी में उन छात्रों का अलग रिकॉर्ड भी रहेगा जो अधिक संवेदनशील, तनाव या अवसाद में नजर आएंगे। एसएससी पीजीआई के मनोरोग विशेषज्ञों व अन्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के साथ भी संपर्क बनाकर रखेगा।
इससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत उनसे परामर्श व मदद ली जा सकेगी। एसएससी में सीनियर फैकल्टी को डायरेक्टर की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसमें एक नोडल ऑफिसर रहेगा। मनोवैज्ञानिक के साथ महिला व पुरुष काउंसलर भी रहेंगे जिसमें अपनी समस्या बताने में झिझक महसूस न हो।
इसका मकसद छात्रों व फैकल्टी के मानसिक, शारीरिक व भावनात्मक स्वास्थ्य पर फोकस रखना है। एसएससी की स्थापना को यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) ने मंजूरी प्रदान कर दी है।
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सुपवा के कुलपति डॉ. अमित आर्य ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रावधान किया गया है कि छात्रों की शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक भलाई सुनिश्चित करने के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में सहायता केंद्र व कॅरिअर काउंसलर उपलब्ध कराए जाएं। छात्रों में मानसिक तनाव बनाने के जिम्मेदार किसी भी प्रकार के खतरे, हमले, शारीरिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व भाषाई भेदभाव से छात्रों की व्यापक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
एसएससी छात्रों को अकादमिक दबाव, सहपाठी दबाव, व्यवहार संबंधी समस्याओं, तनाव, कॅरिअर से संबंधित चिंता, अवसाद व मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित अन्य मुद्दों के प्रति सुरक्षा प्रदान करने में लाभकारी सिद्ध होगा। यह ऑनलाइन मोड व्यक्तिगत रूप से टेलीफोन हेल्पलाइन के माध्यम के जरिए परिस्थितियों के अनुसार परामर्श, मार्गदर्शन, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेगा।
एसएससी में उन छात्रों का अलग रिकॉर्ड भी रहेगा जो अधिक संवेदनशील, तनाव या अवसाद में नजर आएंगे। एसएससी पीजीआई के मनोरोग विशेषज्ञों व अन्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के साथ भी संपर्क बनाकर रखेगा।
इससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत उनसे परामर्श व मदद ली जा सकेगी। एसएससी में सीनियर फैकल्टी को डायरेक्टर की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसमें एक नोडल ऑफिसर रहेगा। मनोवैज्ञानिक के साथ महिला व पुरुष काउंसलर भी रहेंगे जिसमें अपनी समस्या बताने में झिझक महसूस न हो।