{"_id":"6ae39bcaab22306bba084cbe","slug":"woman-denied-bail-in-heroin-smuggling-case-rohtak-news-c-17-ali1038-945766-2026-10-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: हेरोइन तस्करी में महिला को नहीं मिली जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: हेरोइन तस्करी में महिला को नहीं मिली जमानत
विज्ञापन
रोहतक। महम में हेरोइन बरामदगी के मामले में आरोपी महिला को अदालत से राहत नहीं मिली। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप कुमार दुग्गल की अदालत ने बुधवार को उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि पिछली याचिका खारिज होने के बाद परिस्थितियों में बदलाव नहीं हुआ है। मामले में चालान पेश नहीं हुआ है और जांच लंबित है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 अगस्त को पुलिस महम के बालंदा रोड के पास काठमंडी क्षेत्र में नशा तस्करी की जांच कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि एक महिला घर के पास गली में बैठकर नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार करती है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर महिला को गिरफ्तार कर लिया था। महिला पुलिसकर्मियों की तलाशी में उसके पर्स से 5.77 ग्राम हेरोइन बरामद होने का दावा किया गया।
बचाव पक्ष ने महिला को झूठा फंसाने की दलील देते हुए बताया कि वह 31 अगस्त से न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ आगे की जांच लंबित नहीं है। तीन बच्चों का हवाला देकर नियमित जमानत मांगी गई।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले भी एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज है। अदालत ने हिरासत की अवधि, लंबित जांच और पूर्व में दर्ज समान प्रकृति के मामले को ध्यान में रखते हुए जमानत देने से इन्कार कर दिया।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 अगस्त को पुलिस महम के बालंदा रोड के पास काठमंडी क्षेत्र में नशा तस्करी की जांच कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि एक महिला घर के पास गली में बैठकर नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार करती है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर महिला को गिरफ्तार कर लिया था। महिला पुलिसकर्मियों की तलाशी में उसके पर्स से 5.77 ग्राम हेरोइन बरामद होने का दावा किया गया।
विज्ञापन
बचाव पक्ष ने महिला को झूठा फंसाने की दलील देते हुए बताया कि वह 31 अगस्त से न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ आगे की जांच लंबित नहीं है। तीन बच्चों का हवाला देकर नियमित जमानत मांगी गई।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले भी एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज है। अदालत ने हिरासत की अवधि, लंबित जांच और पूर्व में दर्ज समान प्रकृति के मामले को ध्यान में रखते हुए जमानत देने से इन्कार कर दिया।