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महिला थाने पर ग्रेनेड हमले का मामला : पाकिस्तानी गैंगस्टर सहित 8 आरोपियों पर विस्फोटक अधिनियम के तहत चलेगा केस
Sun, 18 Oct 2026 03:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 18 Oct 2026 03:42 AM IST
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सिरसा। महिला थाने पर ग्रेनेड हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने स्पेशल कोर्ट में अभियोजन स्वीकृति दाखिल कर दी है। इसके तहत आठ आरोपियों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
अदालत ने इस अधिनियम के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अभियोजन स्वीकृति प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। एनआईए के अनुरोध पर अदालत ने सिरसा के जिला मजिस्ट्रेट को अभियोजन पक्ष के गवाहों की सूची में 143वें गवाह के रूप में शामिल करने की अनुमति भी दे दी।
एनआईए ने मुख्य आरोपी पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच के खिलाफ ओपन डेटेड वारंट जारी करने के लिए भी आवेदन दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों आरोपी देश से बाहर रह रहे हैं और फरार हैं। सातवें आरोपी राजबीर उर्फ फौजी के संबंध में एनआईए ने 17 अक्तूबर को अंतिम रिपोर्ट अदालत में दाखिल की। मामले की अगली सुनवाई 19 अक्तूबर को न्यायाधीश विजयंत सहगल की अदालत में होगी।
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नौ आरोपियों के खिलाफ की कार्रवाई
इस मामले में एनआईए ने कुल नौ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें सिरसा निवासी धीरज उर्फ धीरू, विकास उर्फ विक्की, संदीप उर्फ दैमार, विकास और सुशील उर्फ सिल्लू शामिल हैं। इनके अलावा अमृतसर निवासी गुरजंत सिंह, गुरुग्राम निवासी मोहम्मद सिजान उर्फ गाजी, पंजाब निवासी राजबीर उर्फ फौजी तथा पाकिस्तान निवासी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच के नाम शामिल हैं। आरोपियों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, यूएपीए की धारा 18 तथा आपराधिक साजिश, हत्या के प्रयास और संगठित अपराध से संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज है।
रेकी के बाद चुना था महिला थाना, हमले का वीडियो बनाकर भट्टी को भेजा
एनआईए की जांच के अनुसार, शहजाद भट्टी और सोहेल बलोच ने भारत में ऑपरेशनल मॉड्यूल तैयार किए थे और स्थानीय गुर्गों को पुलिस ठिकानों पर ग्रेनेड हमलों की जिम्मेदारी सौंपी थी। सिरसा निवासी धीरज उनके प्रमुख सहयोगी के रूप में काम कर रहा था। संभावित ठिकानों की रेकी के बाद महिला पुलिस थाने को हमले के लिए चुना गया। जांच में सामने आया कि हमले में इस्तेमाल ग्रेनेड लेने के लिए आरोपी अमृतसर गए थे। 25 नवंबर 2025 को हुए हमले की वीडियो रिकॉर्डिंग भी आरोपियों ने मोबाइल फोन से की और बाद में इसे शहजाद भट्टी को भेज दिया।
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अदालत ने इस अधिनियम के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अभियोजन स्वीकृति प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। एनआईए के अनुरोध पर अदालत ने सिरसा के जिला मजिस्ट्रेट को अभियोजन पक्ष के गवाहों की सूची में 143वें गवाह के रूप में शामिल करने की अनुमति भी दे दी।
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एनआईए ने मुख्य आरोपी पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच के खिलाफ ओपन डेटेड वारंट जारी करने के लिए भी आवेदन दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों आरोपी देश से बाहर रह रहे हैं और फरार हैं। सातवें आरोपी राजबीर उर्फ फौजी के संबंध में एनआईए ने 17 अक्तूबर को अंतिम रिपोर्ट अदालत में दाखिल की। मामले की अगली सुनवाई 19 अक्तूबर को न्यायाधीश विजयंत सहगल की अदालत में होगी।
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नौ आरोपियों के खिलाफ की कार्रवाई
इस मामले में एनआईए ने कुल नौ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें सिरसा निवासी धीरज उर्फ धीरू, विकास उर्फ विक्की, संदीप उर्फ दैमार, विकास और सुशील उर्फ सिल्लू शामिल हैं। इनके अलावा अमृतसर निवासी गुरजंत सिंह, गुरुग्राम निवासी मोहम्मद सिजान उर्फ गाजी, पंजाब निवासी राजबीर उर्फ फौजी तथा पाकिस्तान निवासी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच के नाम शामिल हैं। आरोपियों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, यूएपीए की धारा 18 तथा आपराधिक साजिश, हत्या के प्रयास और संगठित अपराध से संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज है।
रेकी के बाद चुना था महिला थाना, हमले का वीडियो बनाकर भट्टी को भेजा
एनआईए की जांच के अनुसार, शहजाद भट्टी और सोहेल बलोच ने भारत में ऑपरेशनल मॉड्यूल तैयार किए थे और स्थानीय गुर्गों को पुलिस ठिकानों पर ग्रेनेड हमलों की जिम्मेदारी सौंपी थी। सिरसा निवासी धीरज उनके प्रमुख सहयोगी के रूप में काम कर रहा था। संभावित ठिकानों की रेकी के बाद महिला पुलिस थाने को हमले के लिए चुना गया। जांच में सामने आया कि हमले में इस्तेमाल ग्रेनेड लेने के लिए आरोपी अमृतसर गए थे। 25 नवंबर 2025 को हुए हमले की वीडियो रिकॉर्डिंग भी आरोपियों ने मोबाइल फोन से की और बाद में इसे शहजाद भट्टी को भेज दिया।