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Sirsa News: एचपीएससी की 35 प्रतिशत अंक नीति के खिलाफ भरी हुंकार
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 28 Jan 2026 12:08 AM IST
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सिरसा। डाॅ. आंबेडकर युवा क्लब के सदस्य प्रदर्शनक करते हुए ।
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पंचकूला में चल रहे छात्रों के धरने को सामाजिक संगठनों और युवाओं ने दिया समर्थन
फोटो-30
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से लागू की गई 35 प्रतिशत न्यूनतम अंक नीति के खिलाफ पंचकूला में चल रहे छात्र धरने को सामाजिक संगठनों और युवाओं का समर्थन मिलने लगा है। डाॅ. आंबेडकर युवा क्लब प्रधान छात्र सन्नी चालिया, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के संगठन एआईएसए स्टेट प्रधान रवि रतिया और डीएएसएफआई प्रधान रवि ने एचपीएससी की 35 प्रतिशत नीति के खिलाफ चल रहे धरने को समर्थन दिया।
छात्रनेताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि हरियाणा के सभी योग्य युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। समर्थन देने वालों का कहना है कि एचपीएससी की 35 प्रतिशत नीति के कारण हजारों अभ्यर्थी, जिनमें यूजीसी नेट और पीएचडी जैसे उच्च स्तर की परीक्षाएं पास कर चुके युवा भी शामिल हैं, चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। इसके चलते कई भर्तियों में सैकड़ों पद होने के बावजूद केवल सीमित संख्या में नियुक्तियां की गईं, जबकि बड़ी संख्या में पद खाली रह गए।
समर्थक संगठनों ने आरोप लगाया कि यह नीति न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि समान अवसर और योग्यता के सिद्धांतों के भी खिलाफ है। उनका कहना है कि गलत नीतियों के कारण एक ओर बेरोजगारी बढ़ रही है, वहीं, दूसरी ओर सरकारी विभागों में पद खाली पड़े हैं। समर्थन देने वालों संगठनों ने मांग की कि 35 प्रतिशत नीति को तुरंत वापस लिया जाए या संशोधित किया जाए। सभी घोषित पद पूरे भरे जाएं और चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
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सिरसा। हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से लागू की गई 35 प्रतिशत न्यूनतम अंक नीति के खिलाफ पंचकूला में चल रहे छात्र धरने को सामाजिक संगठनों और युवाओं का समर्थन मिलने लगा है। डाॅ. आंबेडकर युवा क्लब प्रधान छात्र सन्नी चालिया, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के संगठन एआईएसए स्टेट प्रधान रवि रतिया और डीएएसएफआई प्रधान रवि ने एचपीएससी की 35 प्रतिशत नीति के खिलाफ चल रहे धरने को समर्थन दिया।
छात्रनेताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि हरियाणा के सभी योग्य युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। समर्थन देने वालों का कहना है कि एचपीएससी की 35 प्रतिशत नीति के कारण हजारों अभ्यर्थी, जिनमें यूजीसी नेट और पीएचडी जैसे उच्च स्तर की परीक्षाएं पास कर चुके युवा भी शामिल हैं, चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। इसके चलते कई भर्तियों में सैकड़ों पद होने के बावजूद केवल सीमित संख्या में नियुक्तियां की गईं, जबकि बड़ी संख्या में पद खाली रह गए।
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समर्थक संगठनों ने आरोप लगाया कि यह नीति न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि समान अवसर और योग्यता के सिद्धांतों के भी खिलाफ है। उनका कहना है कि गलत नीतियों के कारण एक ओर बेरोजगारी बढ़ रही है, वहीं, दूसरी ओर सरकारी विभागों में पद खाली पड़े हैं। समर्थन देने वालों संगठनों ने मांग की कि 35 प्रतिशत नीति को तुरंत वापस लिया जाए या संशोधित किया जाए। सभी घोषित पद पूरे भरे जाएं और चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
