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Sonipat News: सीएम के सामने खुली एसी व्यवस्था की पोल, रातोंरात दो अफसरों पर गिरी गाज
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सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कार्यक्रम के दौरान सभागार का एसी बंद मिलने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई की है। एचवीएसी व्यवस्था की निगरानी के लिए जिम्मेदार इलेक्ट्रिकल शाखा के एसडीई युद्धवीर दलाल को निलंबित कर दिया गया, जबकि मेंटेनेंस इंचार्ज डॉ. प्रवीण गर्ग को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
वहीं एचवीएसी की मरम्मत करने वाली कंपनी क्लाइमावेनेटा क्लाइमेट टेक्नोलॉजीज और उसके निदेशक सुभाष चंदा के खिलाफ मुरथल थाने में धोखाधड़ी व अमानत में खयानत की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
मुख्यमंत्री वीरवार को विश्वविद्यालय में आधुनिक दक्षता केंद्र का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इसके बाद सभागार में विद्यार्थियों को संबोधित किया। एसी बंद होने से भीषण गर्मी में विद्यार्थियों और मंचासीन लोगों को परेशान देखकर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई और कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश को व्यवस्था तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। उन्होंने 24 घंटे में एसी व्यवस्था ठीक कराने का अल्टीमेटम दिया था।
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विश्वविद्यालय का कहना है कि पत्र, ई-मेल और अनुस्मारक भेजने के बावजूद कंपनी ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। तकनीकी निरीक्षण व समिति की रिपोर्ट के बाद दूसरी एजेंसी सीआईएस ग्लोबल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड को 10.62 लाख रुपये का कार्यादेश देना पड़ा। विवि के अनुसार इससे उस पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ा और कन्वेंशन सेंटर की शैक्षणिक व अन्य गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।
28.45 लाख लेने के बाद भी काम अधूरा
कुलसचिव डॉ. अमित कुमार की शिकायत के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय कन्वेंशन सेंटर के सभागार में लगे क्लाइमावेनेटा एचवीएसी सिस्टम के रखरखाव व मरम्मत का काम कंपनी को 18 जुलाई 2024 से 17 जुलाई 2025 तक दिया गया था। कंपनी ने 19 सितंबर 2024 को निरीक्षण के बाद अतिरिक्त मरम्मत के लिए 28,45,576 रुपये का प्रस्ताव दिया। विश्वविद्यालय ने 13 नवंबर 2024 को इसकी स्वीकृति देते हुए तीन सप्ताह में काम पूरा करने के निर्देश दिए। आरोप है कि कंपनी ने पूरी राशि अग्रिम लेने के बावजूद काम तय समय में पूरा नहीं किया। बाद में कलपुर्जे बदलने के लिए 6.15 लाख रुपये और मांगे गए।
एसडीई के निलंबन पर उठे सवाल
अन्याय के विरुद्ध न्याय युद्ध के संस्थापक देवेंद्र गौतम ने कहा कि लापरवाही होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यह भी जांच का विषय है कि संबंधित अधिकारी के पास कितने अधिकार व संसाधन थे और उसे समय पर क्या निर्देश दिए गए थे। केवल एक अधिकारी को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
एसडीओ के निलंबन के विरोध में कर्मचारी लामबंद
एसडीई के निलंबन के विरोध में कर्मचारी यूनियन लामबंद हो गई है। यूनियन की बैठक में निलंबन को गलत और अनुचित बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई। कर्मचारियों का कहना है कि 13 अगस्त को मुख्यमंत्री के विश्वविद्यालय दौरे के दौरान एसी सिस्टम ठीक से काम नहीं करने के मामले में एसडीई को जिम्मेदार ठहराया गया जबकि संबंधित फाइल में दर्ज तथ्यों की स्थिति अलग है। यूनियन ने मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही निर्णय लिया गया कि 17 अगस्त को अन्य कर्मचारी यूनियनों के साथ बैठक कर आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
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एसी खराब होने के मामले में एसडीई के निलंबन के साथ मेंटेनेंस इंचार्ज को नोटिस दिया है। काम अधूरा छोड़ने वाली कंपनी पर एफआईआर कराई गई है।
श्रीप्रकाश, कुलपति, मुरथल विवि
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वहीं एचवीएसी की मरम्मत करने वाली कंपनी क्लाइमावेनेटा क्लाइमेट टेक्नोलॉजीज और उसके निदेशक सुभाष चंदा के खिलाफ मुरथल थाने में धोखाधड़ी व अमानत में खयानत की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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मुख्यमंत्री वीरवार को विश्वविद्यालय में आधुनिक दक्षता केंद्र का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इसके बाद सभागार में विद्यार्थियों को संबोधित किया। एसी बंद होने से भीषण गर्मी में विद्यार्थियों और मंचासीन लोगों को परेशान देखकर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई और कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश को व्यवस्था तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। उन्होंने 24 घंटे में एसी व्यवस्था ठीक कराने का अल्टीमेटम दिया था।
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विश्वविद्यालय का कहना है कि पत्र, ई-मेल और अनुस्मारक भेजने के बावजूद कंपनी ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। तकनीकी निरीक्षण व समिति की रिपोर्ट के बाद दूसरी एजेंसी सीआईएस ग्लोबल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड को 10.62 लाख रुपये का कार्यादेश देना पड़ा। विवि के अनुसार इससे उस पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ा और कन्वेंशन सेंटर की शैक्षणिक व अन्य गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।
28.45 लाख लेने के बाद भी काम अधूरा
कुलसचिव डॉ. अमित कुमार की शिकायत के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय कन्वेंशन सेंटर के सभागार में लगे क्लाइमावेनेटा एचवीएसी सिस्टम के रखरखाव व मरम्मत का काम कंपनी को 18 जुलाई 2024 से 17 जुलाई 2025 तक दिया गया था। कंपनी ने 19 सितंबर 2024 को निरीक्षण के बाद अतिरिक्त मरम्मत के लिए 28,45,576 रुपये का प्रस्ताव दिया। विश्वविद्यालय ने 13 नवंबर 2024 को इसकी स्वीकृति देते हुए तीन सप्ताह में काम पूरा करने के निर्देश दिए। आरोप है कि कंपनी ने पूरी राशि अग्रिम लेने के बावजूद काम तय समय में पूरा नहीं किया। बाद में कलपुर्जे बदलने के लिए 6.15 लाख रुपये और मांगे गए।
एसडीई के निलंबन पर उठे सवाल
अन्याय के विरुद्ध न्याय युद्ध के संस्थापक देवेंद्र गौतम ने कहा कि लापरवाही होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यह भी जांच का विषय है कि संबंधित अधिकारी के पास कितने अधिकार व संसाधन थे और उसे समय पर क्या निर्देश दिए गए थे। केवल एक अधिकारी को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
एसडीओ के निलंबन के विरोध में कर्मचारी लामबंद
एसडीई के निलंबन के विरोध में कर्मचारी यूनियन लामबंद हो गई है। यूनियन की बैठक में निलंबन को गलत और अनुचित बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई। कर्मचारियों का कहना है कि 13 अगस्त को मुख्यमंत्री के विश्वविद्यालय दौरे के दौरान एसी सिस्टम ठीक से काम नहीं करने के मामले में एसडीई को जिम्मेदार ठहराया गया जबकि संबंधित फाइल में दर्ज तथ्यों की स्थिति अलग है। यूनियन ने मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही निर्णय लिया गया कि 17 अगस्त को अन्य कर्मचारी यूनियनों के साथ बैठक कर आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
एसी खराब होने के मामले में एसडीई के निलंबन के साथ मेंटेनेंस इंचार्ज को नोटिस दिया है। काम अधूरा छोड़ने वाली कंपनी पर एफआईआर कराई गई है।
श्रीप्रकाश, कुलपति, मुरथल विवि