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Sonipat News: युवाओं को खूब भा रही डाक कांवड़, 12 से 14 घंटे में तय करते हैं सफर

Mon, 10 Aug 2026 01:56 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2026 01:56 AM IST
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'Dak Kanwar' is a big hit among the youth; they cover the journey in 12 to 14 hours.
फोटो :: सोनीपत के बहालगढ़ से डाक कांवड़ लेकर जाते शिवभक्त। संवाद - फोटो : credit
सोनीपत। कांवड़ यात्रा में युवाओं का रुझान डाक कांवड़ की ओर बढ़ रहा है। हरिद्वार और गोमुख से गंगाजल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करने की इस परंपरा में पिछले कुछ वर्षों में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है।
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गांव राई निवासी शिवभक्त पंकज कौशिक, पुनित कौशिक, राकेश, नीरज और सुनील ने बताया कि डाक कांवड़ में कम समय लगता है। नौकरी और कारोबार के कारण लंबी छुट्टी लेना संभव नहीं होता। ऐसे में डाक कांवड़ के माध्यम से कम समय में गंगाजल लाकर शिवरात्रि पर शिवलिंग पर अर्पित किया जा सकता है।
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डाक कांवड़ में आमतौर पर 10 से 15 शिवभक्तों का जत्था हरिद्वार या गोमुख से गंगाजल लेकर रवाना होता है। इनमें एक शिवभक्त गंगाजल लेकर दौड़ता है जबकि अन्य साथी वाहन से उसके साथ चलते हैं। कुछ दूरी तय करने के बाद दौड़ रहा शिवभक्त गंगाजल दूसरे साथी को सौंप देता है और वाहन में सवार हो जाता है। इसके बाद दूसरा शिवभक्त दौड़ते हुए गंगाजल को आगे ले जाता है। इसी तरह बारी-बारी से सभी साथी गंगाजल को गंतव्य तक पहुंचाते हैं।
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नहीं करना पड़ती चार-पांच दिन की पैदल यात्रा
कंधे पर कांवड़ रखकर हरिद्वार से पैदल सोनीपत आने में आमतौर पर चार से पांच दिन लगते हैं। इसके मुकाबले डाक कांवड़ में गंगाजल करीब 12 से 14 घंटे में गंतव्य तक पहुंचाया जा सकता है। समय की कमी के कारण जो शिवभक्त पारंपरिक तरीके से कई दिनों की कांवड़ यात्रा नहीं कर पाते, वे डाक कांवड़ को विकल्प के तौर पर चुन रहे हैं। मान्यता के अनुसार निर्धारित समय में गंगाजल पहुंचाना इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसी समयबद्धता के कारण डाक कांवड़ में सामूहिक प्रयास और अनुशासन भी देखने को मिलता है।

नौकरीपेशा और कारोबारियों के लिए सुविधाजनक
युवाओं के डाक कांवड़ की ओर बढ़ते रुझान की एक वजह उनकी व्यस्त दिनचर्या भी है। नौकरीपेशा युवाओं और कारोबारियों के लिए कई दिनों की छुट्टी लेना मुश्किल होता है। ऐसे में डाक कांवड़ उन्हें कम समय में कांवड़ यात्रा पूरी कर आस्था निभाने का अवसर देती है।
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