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Sonipat News: अलग-अलग जगह कांवड़ियों की मौत, हार्ट अटैक की आशंका
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सोनीपत। कांवड़ यात्रा के दौरान जिले में अलग-अलग स्थानों पर दो कांवड़ियों की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। पहली घटना खरखौदा क्षेत्र के आनंदपुर झरोठ गांव के पास हुई, जहां हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौट रहे झज्जर जिले के खातीवास निवासी राजेंद्र की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई।
दूसरी घटना सेक्टर-7 मोड़ के पास दिवान फार्म क्षेत्र में हुई। यहां फरमाणा गांव निवासी कांवड़िया सत्यवान की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। दोनों मामलों में प्रारंभिक तौर पर हृदयाघात की आशंका जताई जा रही है। खरखौदा थाना प्रभारी अनिल कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे।
25 साल से लगातार ला रहे थे कांवड़
खातीवास निवासी राजेंद्र पिछले करीब 25 वर्षों से लगातार कांवड़ लेकर हरिद्वार जाते थे। इस बार भी वह करीब 10 दिन पहले साथियों के साथ कांवड़ लेने के लिए घर से निकले थे। आनंदपुर झरोठ के पास पहुंचने पर बारिश में भीगने के बाद उन्हें अचानक ठंड लगने लगी और तबीयत बिगड़ गई। साथियों ने उन्हें कंबल ओढ़ाया और उपचार के लिए खरखौदा के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सक ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
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राजेंद्र गांव में किरयाना की दुकान चलाते थे। उनके दो बेटे हैं और दोनों शादीशुदा हैं। परिजनों के अनुसार किसी को अंदाजा नहीं था कि इस बार की कांवड़ यात्रा उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी।
दिवान फार्म के पास दूसरे कांवड़िए की मौत
दूसरी घटना सेक्टर-7 मोड़ के पास दिवान फार्म क्षेत्र में हुई। फरमाणा गांव निवासी सत्यवान 31 जुलाई को 17 साथियों के साथ कांवड़ लेने के लिए निकले थे। रास्ते में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। साथियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया लेकिन चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। सत्यवान के दो बेटे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके की जानकारी जुटाकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
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दूसरी घटना सेक्टर-7 मोड़ के पास दिवान फार्म क्षेत्र में हुई। यहां फरमाणा गांव निवासी कांवड़िया सत्यवान की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। दोनों मामलों में प्रारंभिक तौर पर हृदयाघात की आशंका जताई जा रही है। खरखौदा थाना प्रभारी अनिल कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे।
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25 साल से लगातार ला रहे थे कांवड़
खातीवास निवासी राजेंद्र पिछले करीब 25 वर्षों से लगातार कांवड़ लेकर हरिद्वार जाते थे। इस बार भी वह करीब 10 दिन पहले साथियों के साथ कांवड़ लेने के लिए घर से निकले थे। आनंदपुर झरोठ के पास पहुंचने पर बारिश में भीगने के बाद उन्हें अचानक ठंड लगने लगी और तबीयत बिगड़ गई। साथियों ने उन्हें कंबल ओढ़ाया और उपचार के लिए खरखौदा के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सक ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
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राजेंद्र गांव में किरयाना की दुकान चलाते थे। उनके दो बेटे हैं और दोनों शादीशुदा हैं। परिजनों के अनुसार किसी को अंदाजा नहीं था कि इस बार की कांवड़ यात्रा उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी।
दिवान फार्म के पास दूसरे कांवड़िए की मौत
दूसरी घटना सेक्टर-7 मोड़ के पास दिवान फार्म क्षेत्र में हुई। फरमाणा गांव निवासी सत्यवान 31 जुलाई को 17 साथियों के साथ कांवड़ लेने के लिए निकले थे। रास्ते में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। साथियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया लेकिन चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। सत्यवान के दो बेटे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके की जानकारी जुटाकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।