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Sonipat News: 10 किमी मैराथन में मोहित प्रथम, भारती ने महिलाओं में जीता खिताब
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नारनौल। नशा मुक्त हरियाणा के तहत शहर में आयोजित 10 किलोमीटर की हाफ मैराथन में सैकड़ों युवाओं ने भाग लिया। गांव भूषण शोभापुर के मोहित यादव ने प्रथम स्थान प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया है लेकिन मोहित के अलावा सभी विजेता खिलाड़ी जिले से बाहर के रहे।
यह खिलाड़ी शनिवार को ही नारनौल पहुंच गए थे। इन खिलाड़ियों ने रात होटल में तो किसी ने धर्मशाला में गुजारी। इसमें महिला व पुरुष वर्ग प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर आने वाले खिलाड़ियों को क्रमश: 1 लाख, 50 व 25 हजार का नकद पुरस्कार भी मिला है।
इसके अलावा महिला वर्ग में एक खिलाड़ी सोनिका भी थी जो रेलवे विभाग, हैदराबाद में अपनी सेवा दे रही है और वहां से मैराथन में भाग लेने नारनौल पहुंची थी।
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मैं पिछले पांच साल से लगातार दौड़ की प्रैक्टिस कर रहा हूं और साथ में स्नातक की पढ़ाई भी कर रहा हूं। मैं एक साधारण किसान परिवार से हूं। मेरा सपना है कि खेल के जरिये आगे बढ़ूं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करूं। इससे पहले भी मैं राष्ट्रीय स्तर की क्रॉस कंट्री दौड़ में हिस्सा ले चुका हूं और सिल्वर मेडल जीता है। -मोहित यादव, प्रथम, गांव भूषण शोभापुर
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मैं पिछले चार साल से लगातार प्रैक्टिस कर रहा हूं। इस मैराथन के बारे में मुझे सोशल मीडिया से पता चला था। पहली बार ही इसमें हिस्सा लिया और दूसरा नंबर आने पर बहुत खुशी हुई। मेरे पापा नहीं हैं, इसलिए अपनी मां के लिए कुछ अच्छा करना चाहता हूं। मेरा सपना है कि आगे चलकर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतूं।-गौरव, द्वितीय, ग्रेटर नोएडा
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मैं शनिवार शाम बस से नारनौल पहुंच गया था। धर्मशाला में रात रुकने के बाद सुबह मैराथन में हिस्सा लिया। इससे पहले भी करीब 10 मैराथन दौड़ चुका हूं और कई मेडल जीत चुका हूं। इस बार तीसरा स्थान हासिल किया। करीब आठ साल से प्रैक्टिस कर रहा हूं और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल जीतना मेरा लक्ष्य है।-शुभम, तृतीय, रोहतक
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मैं शनिवार को ही नारनौल आ गई थी और रात धर्मशाला में रुकी। इससे पहले मैं राष्ट्रीय स्तर की 10 किलोमीटर दौड़ में कांस्य पदक जीत चुकी हूं। करीब आठ साल से लगातार प्रैक्टिस कर रही हूं। मैं किसान परिवार से हूं और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी कर चुकी हूं। अब मेरा सपना देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।-भारती, प्रथम, सोनीपत
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मैं शनिवार शाम हैदराबाद से दिल्ली होते हुए नारनौल पहुंची थी और रात को एक होटल में रुकी। मैं पिछले 10 साल से लगातार प्रैक्टिस कर रही हूं और रेलवे की तरफ से खेलती हूं। दो बार एशियन क्रॉस कंट्री में हिस्सा ले चुकी हूं जिसमें एक बार गोल्ड और एक बार सिल्वर मेडल जीता है।-सोनिका, द्वितीय, भिवानी
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यह खिलाड़ी शनिवार को ही नारनौल पहुंच गए थे। इन खिलाड़ियों ने रात होटल में तो किसी ने धर्मशाला में गुजारी। इसमें महिला व पुरुष वर्ग प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर आने वाले खिलाड़ियों को क्रमश: 1 लाख, 50 व 25 हजार का नकद पुरस्कार भी मिला है।
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इसके अलावा महिला वर्ग में एक खिलाड़ी सोनिका भी थी जो रेलवे विभाग, हैदराबाद में अपनी सेवा दे रही है और वहां से मैराथन में भाग लेने नारनौल पहुंची थी।
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मैं पिछले पांच साल से लगातार दौड़ की प्रैक्टिस कर रहा हूं और साथ में स्नातक की पढ़ाई भी कर रहा हूं। मैं एक साधारण किसान परिवार से हूं। मेरा सपना है कि खेल के जरिये आगे बढ़ूं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करूं। इससे पहले भी मैं राष्ट्रीय स्तर की क्रॉस कंट्री दौड़ में हिस्सा ले चुका हूं और सिल्वर मेडल जीता है। -मोहित यादव, प्रथम, गांव भूषण शोभापुर
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मैं पिछले चार साल से लगातार प्रैक्टिस कर रहा हूं। इस मैराथन के बारे में मुझे सोशल मीडिया से पता चला था। पहली बार ही इसमें हिस्सा लिया और दूसरा नंबर आने पर बहुत खुशी हुई। मेरे पापा नहीं हैं, इसलिए अपनी मां के लिए कुछ अच्छा करना चाहता हूं। मेरा सपना है कि आगे चलकर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतूं।-गौरव, द्वितीय, ग्रेटर नोएडा
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मैं शनिवार शाम बस से नारनौल पहुंच गया था। धर्मशाला में रात रुकने के बाद सुबह मैराथन में हिस्सा लिया। इससे पहले भी करीब 10 मैराथन दौड़ चुका हूं और कई मेडल जीत चुका हूं। इस बार तीसरा स्थान हासिल किया। करीब आठ साल से प्रैक्टिस कर रहा हूं और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल जीतना मेरा लक्ष्य है।-शुभम, तृतीय, रोहतक
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मैं शनिवार को ही नारनौल आ गई थी और रात धर्मशाला में रुकी। इससे पहले मैं राष्ट्रीय स्तर की 10 किलोमीटर दौड़ में कांस्य पदक जीत चुकी हूं। करीब आठ साल से लगातार प्रैक्टिस कर रही हूं। मैं किसान परिवार से हूं और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी कर चुकी हूं। अब मेरा सपना देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।-भारती, प्रथम, सोनीपत
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मैं शनिवार शाम हैदराबाद से दिल्ली होते हुए नारनौल पहुंची थी और रात को एक होटल में रुकी। मैं पिछले 10 साल से लगातार प्रैक्टिस कर रही हूं और रेलवे की तरफ से खेलती हूं। दो बार एशियन क्रॉस कंट्री में हिस्सा ले चुकी हूं जिसमें एक बार गोल्ड और एक बार सिल्वर मेडल जीता है।-सोनिका, द्वितीय, भिवानी
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