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Sonipat News: पेयजल की बर्बादी पर लगेगी लगाम, 14 वाटर मीटर से होगी सप्लाई की निगरानी

Sun, 09 Aug 2026 01:56 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2026 01:56 AM IST
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Wastage of drinking water to be curbed; supply to be monitored via 14 water meters.
फोटो - जलघर में बना हुआ तालाब, जहां वाटर मीटर लगाया जाना है। संवाद
गोहाना। शहर में पेयजल की बर्बादी रोकने और सप्लाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जलापूर्ति विभाग ने कदम उठाया है। शहर के मुख्य जलघर और बूस्टिंग स्टेशनों पर अब 14 वाटर मीटर लगाए जाएंगे। मुख्यालय की ओर से मीटर उपलब्ध करवा दिए गए हैं। मीटर लगने के बाद शहर में प्रतिदिन सप्लाई किए जाने वाले पानी की मात्रा का सटीक आंकड़ा विभाग के पास उपलब्ध रहेगा।
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अभी तक शहर में प्रतिदिन कितने पानी की सप्लाई की जा रही है इसका स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं रहता। मांग के अनुसार सप्लाई की मात्रा में भी रोजाना उतार-चढ़ाव होता रहता है। मीटर लगने के बाद जलघर से शहर की ओर भेजे जाने वाले पानी की प्रत्येक यूनिट का रिकॉर्ड दर्ज होगा। इसी आंकड़े के आधार पर विभाग आगे पेयजल सप्लाई का शेड्यूल तैयार करेगा।
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शहर में प्रतिदिन लाखों लीटर पेयजल की आपूर्ति की जाती है। सप्लाई के दौरान बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद भी होता है। मीटर लगने से पानी की वास्तविक खपत और सप्लाई के बीच अंतर का पता चल सकेगा। इससे पानी की बर्बादी वाले क्षेत्रों को चिह्नित करने और सप्लाई व्यवस्था को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। उपभोक्ताओं की संख्या और पानी की जरूरत के अनुसार किसी क्षेत्र में सप्लाई कम या ज्यादा भी की जा सकेगी।
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मुख्य जलघर में चार, बूस्टिंग स्टेशनों पर 10 मीटर
जलापूर्ति विभाग की योजना के अनुसार मुख्य जलघर परिसर में चार वाटर मीटर लगाए जाएंगे। इसके अलावा शहर के बूस्टिंग स्टेशनों पर 10 वाटर मीटर लगाए जाने हैं। इससे अलग-अलग स्तर पर पानी की सप्लाई का रिकॉर्ड रखा जा सकेगा। मीटरिंग व्यवस्था से विभाग को शहर में भेजे जाने वाले पानी की वास्तविक मात्रा का पता चलने के साथ ही सप्लाई व्यवस्था को नियंत्रित करने में भी सुविधा होगी। इससे पेयजल की बर्बादी रोकने के अलावा पानी की सप्लाई और पेयजल बिलों की राशि का आकलन करने में भी मदद मिलेगी।

वर्जन
जलघर और बूस्टिंग स्टेशनों पर जल्द वाटर मीटर लगाए जाएंगे। इससे शहर में प्रतिदिन होने वाली पेयजल सप्लाई की मात्रा का सटीक आकलन हो सकेगा। मीटर लगने के बाद पेयजल की बर्बादी रोकने और सप्लाई को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
नरेंद्र लाठर, एसडीओ, जलापूर्ति विभाग, गोहाना
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