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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   55 roads and 16 helipads constructed in forest area; High Court stays further work and tarring.

हिमाचल हाईकोर्ट का संज्ञान: वन क्षेत्र में 55 सड़कों और 16 हेलिपैड का निर्माण, शेष कार्य पर रोक

Wed, 14 Oct 2026 05:30 AM IST
Krishan Singh भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 14 Oct 2026 05:30 AM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने पूर्व आदेश को दोहराते हुए क्षेत्र में पहले आवश्यक मंजूरी लिए बिना बनी 55 सड़कों और 16 हेलिपैड के निर्माण के किसी भी तरह के कार्य एवं टारिंग पर रोक लगा दी है। 

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55 roads and 16 helipads constructed in forest area; High Court stays further work and tarring.
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी के नाचन वन मंडल के तहत सराज क्षेत्र में वन संरक्षण अधिनियम और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने वन-अभयारण्य क्षेत्र में आवश्यक मंजूरी लिए बिना बनीं 55 सड़कों और 16 हेलिपैड के किसी भी तरह के शेष निर्माण कार्य और टारिंग पर रोक लगा दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी। सुनवाई के दौरान न्याय मित्र ने डीएफओ के आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए सराज क्षेत्र में हुए निर्माण कार्यों से जुड़े कई तथ्य अदालत के समक्ष रखे।

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सराज क्षेत्र में कुल 110 में से 55 सड़कें वन मंजूरी से पहले ही बना दीं
रिकॉर्ड के अनुसार सराज क्षेत्र में कुल 110 सड़कें हैं। इनमें 55 सड़कों का निर्माण वन मंजूरी लेने से पहले ही कर दिया गया। कुछ सड़कों को निर्माण के बाद मंजूरी दी गई, जबकि कुछ कार्य अभी अधूरे हैं। वहीं, 10.165 किलोमीटर लंबी बागासैड-राहीधार-कथ्याली-धारवार-धनसाल सड़क को निर्माणाधीन बताया गया है। क्षेत्र में 16 हेलीपैड के अलावा वन भूमि पर 20 से अधिक विश्राम गृह भी मौजूद हैं। 

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12 वन विश्राम गृह भी शामिल
 इनमें 12 वन विश्राम गृह और पांच लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह शामिल हैं। न्याय मित्र ने इनके निर्माण को लेकर भी नियमों के उल्लंघन की भी बात कोर्ट के समक्ष रखी है। गौरतलब है कि इससे पहले हाईकोर्ट ने अगस्त में चंद्रताल, शिकारी देवी, चूड़धार जैसे इलाकों के वन क्षेत्र में भी सड़क निर्माण पर रोक लगाई थी।
 

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शिकारी देवी अभयारण्य 213.51 से घटकर 29.94 वर्ग किमी रह गया
सुनवाई में शिकारी देवी अभयारण्य के क्षेत्रफल सिमटने का मामला भी सामने आया। करसोग वन मंडल के रिकॉर्ड के अनुसार अभयारण्य का अधिसूचित क्षेत्रफल 213.51 वर्ग किलोमीटर था, जबकि धरातल पर इसका क्षेत्रफल 112.94 वर्ग किलोमीटर पाया गया। इसके बाद युक्तिकरण प्रक्रिया के तहत 83 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को बाहर करने का प्रस्ताव रखा गया। इससे अभयारण्य का प्रस्तावित अंतिम क्षेत्रफल घटकर 29.94 वर्ग किलोमीटर रह गया। अदालत को यह भी बताया गया कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रावधानों का कथित दुरुपयोग कर सड़क निर्माण की अनुमतियां जारी की गईं। ये मंजूरियां न तो स्थानीय वन निवासियों के हित में थीं और न ही वन संरक्षण के उद्देश्य के अनुरूप थीं।

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