Bilaspur News: पन्याला शिवधाम पर सात किलो चांदी से सजाया मुख्य शिवलिंग, भव्य आयोजन की तैयारी शुरू
घुमारवीं-सरकाघाट हाईवे पर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग शिवधाम पन्याला में इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व विशेष भव्यता के साथ मनाया जाएगा। इस बार मुख्य आकर्षण सात किलो चांदी से अलंकृत किया गया मुख्य शिवलिंग रहेगा। पर्व से पूर्व विशेष कारीगरों ने शिवलिंग पर चांदी की परत चढ़ाई है, जिससे मंदिर की आभा और भी निखर गई है। मंदिर कमेटी के संस्थापक सदस्य एवं कानूनी सलाहकार प्रेम सिंह ठाकुर ने बताया कि श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए मुख्य शिवलिंग को चांदी से मंडित किया गया है। इसके लिए पर्वतीय क्षेत्रों से कुशल कारीगर बुलाए गए थे। साथ ही मंदिर के स्तंभों पर लकड़ी की बारीक नक्काशी का कार्य पिछले दो वर्षों से निरंतर जारी है, जिस पर करीब 10 लाख रुपये की लागत आ रही है।
महाशिवरात्रि इस बार रविवार को पड़ रही है, जिसके चलते भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए मंदिर कमेटी ने घुमारवीं, बम्म, बनोहा सहित आसपास के क्षेत्रों से निशुल्क विशेष बस सेवा की व्यवस्था की है। मंदिर परिसर में भीड़ प्रबंधन, पेयजल, प्रसाद वितरण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मंदिर में चार पहर की विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगने की उम्मीद है। व्यवस्था बनाए रखने के लिए हैंडबाल नर्सरी मोरसिंघी के प्रशिक्षु खिलाड़ी भी मंदिर समिति का सहयोग करेंगे। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में 17 फरवरी (मंगलवार) को विशाल भंडारा होगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों किलो गाजर का हलवा, दूध और सूखे मेवों का घोटा प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाएगा।
मंदिर के पुजारी बाबा धर्मवीर के अनुसार, पहले यहां कामदानाथेश्वर नाम का एक प्राचीन मंदिर था, जो सड़क के दूसरी ओर स्थित था। घुमारवीं-सरकाघाट हाईवे निर्माण के दौरान ठेकेदारों को एक छोटा शिवलिंग मिला, जिसे वर्तमान स्थल पर स्थापित किया गया। स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर का विस्तार हुआ और सन 1995 में इसका जीर्णोद्धार किया गया। 2003 में एक रोचक घटना घटी। भारी वर्षा के कारण मार्ग अवरुद्ध होने से 11 शिवलिंग लेकर जा रहे श्रद्धालु यहां रुक गए। सड़क खुलने में विलंब होने पर वे शिवलिंग यहीं छोड़कर लौट गए। बाद में इन्हें मंदिर में विधिवत स्थापित कर दिया गया और तभी से यह स्थान द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव धाम के रूप में प्रसिद्ध हो गया। मंदिर में काशी विश्वनाथ, बैद्यनाथ, नागेश्वर, भीमाशंकर, रामेश्वर, ममलेश्वर, त्र्यंबकेश्वर, घृष्णेश्वर, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, केदारनाथ और सोमनाथ सहित 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त भगवान गणेश, हनुमान और साक्षी गोपाल की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। हाल ही में साक्षी गोपाल मंदिर का निर्माण भी पूर्ण हुआ है।
पुजारी के अनुसार, पहले यह क्षेत्र घने जंगल से आच्छादित था, जिसे फेटी धार कहा जाता था। मंदिर के समीप बहने वाले पन्याला नाला में सोने के कण मिलने की मान्यता भी प्रचलित है। मंदिर परिसर के साथ एक छोटे टीले को ‘कैलाश पर्वत’ का स्वरूप देकर वहां शिव-पार्वती की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। भक्तों के लिए विशेष कैलाश परिक्रमा मार्ग भी बनाया गया है, जहां श्रद्धालु आस्था के साथ परिक्रमा करते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अनुशासन बनाए रखने और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।