फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Chamba News ›   chamba guilla road connectivity 3500 population walk 4 to 5 km for dead bodies

चंबा में सड़क का इंतजार: 3500 आबादी आज भी पगडंडी के सहारे, शव घर पहुंचाने को चार-पांच किलोमीटर खड़ी चढ़ाई

Thu, 24 Sep 2026 10:48 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा।
संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 24 Sep 2026 10:48 AM IST
सार

Chamba Road Connectivity: चुराह विधानसभा क्षेत्र की गुइला पंचायत के भनौड़ी, अलवास, अयूंडा और गुइला गांवों के करीब 3500 लोग आज भी सड़क सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। अलवास तक सड़क पहुंची है, लेकिन आगे के गांवों तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को चार से पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई तय करनी पड़ती है। शवों को घर तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है। राशन और निर्माण सामग्री खच्चरों के जरिए पहुंचती है, जबकि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच भी मुश्किल बनी हुई है।

विज्ञापन
chamba guilla road connectivity 3500 population walk 4 to 5 km for dead bodies
खच्चर पर सामान लाद कर ले जाते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

सड़क किसी भी गांव के लिए विकास की पहली सीढ़ी मानी जाती है, लेकिन चंबा के चुराह विधानसभा क्षेत्र की गुइला पंचायत के कई गांव आज भी सड़क सुविधा से दूर हैं। भनौड़ी, अलवास, अयूंडा और गुइला गांवों की करीब 3500 की आबादी के लिए सड़क आज भी सबसे बड़ी जरूरत बनी हुई है। सबसे कठिन स्थिति तब पैदा होती है, जब किसी ग्रामीण की मौत हो जाती है। शव को घर तक पहुंचाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को चार से पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई कंधों या पीठ के सहारे तय करनी पड़ती है। पगडंडी और कठिन पहाड़ी रास्तों से शव को घर पहुंचाना परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक स्थिति बन जाती है।

विज्ञापन


अलवास तक पहुंची सड़क, आगे फिर पगडंडी
ग्रामीणों के अनुसार अलवास तक सड़क पहुंच चुकी है, लेकिन इसके आगे भनौड़ी, अयूंडा और गुइला तक सड़क सुविधा नहीं है। इन गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को पैदल पगडंडियों और खड़ी चढ़ाई का सहारा लेना पड़ता है। दैनिक जरूरत का सामान भी इसी रास्ते से पहुंचता है। राशन, खाद्य सामग्री के साथ सीमेंट, सरिया और अन्य निर्माण सामग्री खच्चरों के जरिए घरों तक पहुंचाई जाती है। ग्रामीणों को एक खच्चर के लिए करीब 250 रुपये किराया देना पड़ता है। ऐसे में सामान खरीदने के बाद उसे घर तक पहुंचाने का खर्च भी परिवारों के लिए अतिरिक्त बोझ बन जाता है।
विज्ञापन


पढ़ाई और इलाज भी बड़ी चुनौती
सड़क नहीं होने का असर केवल सामान ढोने तक सीमित नहीं है। गांव के बच्चों की पढ़ाई और बीमार लोगों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना भी ग्रामीणों के लिए मुश्किल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण कई परिवार गांव छोड़कर दूसरी जगहों पर जाने को मजबूर हो रहे हैं। सड़क बनने से यहां शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

1952 में पैदल पहुंचे थे पहले मुख्यमंत्री
भनौड़ी गांव का ऐतिहासिक महत्व भी रहा है। वर्ष 1952 में प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार यहां पहुंचे थे। ग्रामीणों के अनुसार यह क्षेत्र पुराने समय में पांगी, जांस्कर, लद्दाख, लाहौल-स्पीति और तिब्बत जाने वाले यात्रियों का पड़ाव भी रहा है। बौद्ध-खांपा संस्कृति, भाषा और परंपराओं के लिहाज से भी इस क्षेत्र की अलग पहचान है। ग्रामीणों का कहना है कि इतने पुराने और महत्वपूर्ण क्षेत्र के बावजूद आज भी सड़क सुविधा का अभाव चिंता का विषय है।

ग्रामीणों ने सुनाई अपनी परेशानी
ग्रामीण पेमा कलसंग का कहना है कि सड़क के अभाव में यहां जीवन यापन करना मुश्किल है। उनके अनुसार प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री भी यहां पैदल पहुंचे थे, लेकिन उसके बाद भी गांव तक सड़क नहीं पहुंच सकी। टीडी कांपा ने कहा कि सड़क को भाग्य रेखा कहा जाता है। गांव में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण करीब 3500 की आबादी को परेशानी झेलनी पड़ रही है। संजू कांपा के अनुसार अलवास से चार से पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पैदल तय करने के बाद ही भनौड़ी, अलवास, अयूंडा और गुइला तक पहुंचा जा सकता है। वहीं येसी दोरजे ने बताया कि खाद्य सामग्री और गृह निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को प्रति खच्चर करीब 250 रुपये देने पड़ते हैं। इससे घर तक सामान पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है।

वन स्वीकृति के बाद आगे बढ़ेगी सड़क
चुराह विधायक हंसराज ने बताया कि अलवास तक सड़क पहुंच चुकी है। आगे सड़क विस्तार की योजना है, लेकिन इसके लिए अभी बजट का प्रावधान नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि वन विभाग की अनापत्ति भी लंबित है। कांग्रेस नेता यशवंत खन्ना ने इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने की बात कही है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगेंद्र शर्मा ने बताया कि अलवास से भनौड़ी सड़क का एफसीए मामला स्वीकृति के लिए वन विभाग को भेजा गया है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि वन स्वीकृति और बजट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सड़क विस्तार का काम आगे बढ़ेगा और वर्षों से चली आ रही उनकी परेशानी कम होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed