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Chamba News: बच्चों को लेकर भागे... सुबह मलबे से भरे मिले मकान
Wed, 29 Jul 2026 10:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 29 Jul 2026 10:56 AM IST
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घोल्टी में मलबे में दबी कार। संवाद
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चंबा। शहर के क्षेत्र तड़ोली, सुल्तानपुर, भरियाठ, ओबड़ी के साथ घोल्टी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार रात करीब 12 बजे से पहले सब कुछ सामान्य था। लोग अपने-अपने घरों में सो रहे थे।
कुछ ही पलों नालों से तेज गर्जना की आवाजें आने लगीं। पानी और मलबा घरों की ओर बढ़ने लगा। किसी ने बच्चों को उठाया तो किसी ने बुजुर्गों का हाथ पकड़ लिया। जान बचाने की जल्दबाजी में लोग जरूरी सामान तक नहीं निकाल सके। मंगलवार सुबह उन्होंने देखा कि कई घरों में मलबा घुस गया था।
भरियाठ गांव में मंगलवार तड़के करीब 2 बजे माता मलूणा मार्ग की ओर से बरसाती नाले का रुख अचानक बदल गया। तेज बहाव के साथ पानी, पत्थर और मलबा सीधे गांव में घुस गया। कुछ ही मिनटों में कई घरों के आंगन और कमरों में कीचड़ भर गया। जान बचाने की चिंता में लोग घरों से बाहर निकल आए।
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महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागीं, जबकि पुरुष बुजुर्गों और अन्य परिजनों को बाहर निकालने में जुट गए। कई परिवारों ने पूरी रात पड़ोसियों के घरों में शरण लेकर बिताई। सुबह जब लोग अपने घरों में लौटे तो फर्श पर मोटी परत में कीचड़, कमरों में मलबा और बिखरा सामान देखकर उनकी आंखें नम हो गईं। लोगों ने बेलचे और फावड़े उठाकर घंटों तक घरों से मलबा निकाला।
तड़ोली, सुल्तानपुर, ओबड़ी और घोल्टी में भी पूरी रात लोगों की आंखों में नींद नहीं थी। नालों का जलस्तर बढ़ने के साथ मलबा गांवों की ओर बढ़ता गया। घोल्टी में मलबा कई मकानों के मुख्य द्वार तक पहुंच गया, जिससे लोग घंटों तक घरों में फंसे रहे। ओबड़ी और तड़ोली में तेज बहाव ने घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचाया, जबकि सुल्तानपुर में कई दुकानों के भीतर तक कीचड़ भर गया और सामान खराब हो गया।
एक ही रात की इस आपदा ने लोगों को यह एहसास करा दिया कि पहाड़ों में मौसम का एक बदला हुआ मिजाज पलभर में जिंदगी की तस्वीर बदल सकता है।
मलूणा मार्ग पर लोक निर्माण विभाग ने आज तक नालियां नहीं बनाई हैं। कई बार मांग उठाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। सोमवार रात भी लोगों को जान बचाने के लिए घर छोड़कर भागना पड़ा। भुवनेश शर्मा, भरियाठ निवासी :
बार-बार प्रशासन और संबंधित विभाग से नालियां बनाने की मांग की गई लेकिन समस्या जस की तस है। समय रहते समाधान नहीं हुआ तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। आर्यन कालिया, स्थानीय निवासी :
आसमान से बरसी बारिश ने पूरे गांव में तबाही मचा दी। रात को सिर्फ जान बचाने की चिंता थी। घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाना पड़ा। शौर्य कालिया, भरियाठ निवासी
घटोला नाला अचानक उफान पर आ गया। पानी और मलबा दुकान के अंदर घुस गया, जिससे काफी सामान खराब हो गया। रविंद्र कुमार, दुकानदार, सुल्तानपुर
हर साल बरसात में सुल्तानपुर की यही कहानी होती है। मकानों और दुकानों को नुकसान होता है लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकला। अनूप कुमार, दुकानदार :
बरसात शुरू होते ही डर सताने लगता है। इस बार घर का आंगन और दुकान दोनों कीचड़ से भर गए। काफी सामान खराब हो गया। विरेंद्र ठाकुर, सुल्तानपुर निवासी
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कुछ ही पलों नालों से तेज गर्जना की आवाजें आने लगीं। पानी और मलबा घरों की ओर बढ़ने लगा। किसी ने बच्चों को उठाया तो किसी ने बुजुर्गों का हाथ पकड़ लिया। जान बचाने की जल्दबाजी में लोग जरूरी सामान तक नहीं निकाल सके। मंगलवार सुबह उन्होंने देखा कि कई घरों में मलबा घुस गया था।
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भरियाठ गांव में मंगलवार तड़के करीब 2 बजे माता मलूणा मार्ग की ओर से बरसाती नाले का रुख अचानक बदल गया। तेज बहाव के साथ पानी, पत्थर और मलबा सीधे गांव में घुस गया। कुछ ही मिनटों में कई घरों के आंगन और कमरों में कीचड़ भर गया। जान बचाने की चिंता में लोग घरों से बाहर निकल आए।
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महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागीं, जबकि पुरुष बुजुर्गों और अन्य परिजनों को बाहर निकालने में जुट गए। कई परिवारों ने पूरी रात पड़ोसियों के घरों में शरण लेकर बिताई। सुबह जब लोग अपने घरों में लौटे तो फर्श पर मोटी परत में कीचड़, कमरों में मलबा और बिखरा सामान देखकर उनकी आंखें नम हो गईं। लोगों ने बेलचे और फावड़े उठाकर घंटों तक घरों से मलबा निकाला।
तड़ोली, सुल्तानपुर, ओबड़ी और घोल्टी में भी पूरी रात लोगों की आंखों में नींद नहीं थी। नालों का जलस्तर बढ़ने के साथ मलबा गांवों की ओर बढ़ता गया। घोल्टी में मलबा कई मकानों के मुख्य द्वार तक पहुंच गया, जिससे लोग घंटों तक घरों में फंसे रहे। ओबड़ी और तड़ोली में तेज बहाव ने घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचाया, जबकि सुल्तानपुर में कई दुकानों के भीतर तक कीचड़ भर गया और सामान खराब हो गया।
एक ही रात की इस आपदा ने लोगों को यह एहसास करा दिया कि पहाड़ों में मौसम का एक बदला हुआ मिजाज पलभर में जिंदगी की तस्वीर बदल सकता है।
मलूणा मार्ग पर लोक निर्माण विभाग ने आज तक नालियां नहीं बनाई हैं। कई बार मांग उठाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। सोमवार रात भी लोगों को जान बचाने के लिए घर छोड़कर भागना पड़ा। भुवनेश शर्मा, भरियाठ निवासी :
बार-बार प्रशासन और संबंधित विभाग से नालियां बनाने की मांग की गई लेकिन समस्या जस की तस है। समय रहते समाधान नहीं हुआ तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। आर्यन कालिया, स्थानीय निवासी :
आसमान से बरसी बारिश ने पूरे गांव में तबाही मचा दी। रात को सिर्फ जान बचाने की चिंता थी। घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाना पड़ा। शौर्य कालिया, भरियाठ निवासी
घटोला नाला अचानक उफान पर आ गया। पानी और मलबा दुकान के अंदर घुस गया, जिससे काफी सामान खराब हो गया। रविंद्र कुमार, दुकानदार, सुल्तानपुर
हर साल बरसात में सुल्तानपुर की यही कहानी होती है। मकानों और दुकानों को नुकसान होता है लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकला। अनूप कुमार, दुकानदार :
बरसात शुरू होते ही डर सताने लगता है। इस बार घर का आंगन और दुकान दोनों कीचड़ से भर गए। काफी सामान खराब हो गया। विरेंद्र ठाकुर, सुल्तानपुर निवासी

घोल्टी में मलबे में दबी कार। संवाद