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Chamba News: दो चक्कर बाद ही थमा ड्रैगन झूला, धक्का लगाकर सुरक्षित उतारे बच्चे
Wed, 29 Jul 2026 11:02 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 29 Jul 2026 11:02 AM IST
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चौगान नंबर तीन में खराब झूले को धक्का लगाते ठेकेदार के कर्मचारी। संवाद।
चंबा। दिन : सोमवार, समय : रात 8 बजे, स्थान : मिंजर मेला। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का झूला मैदान लोगों से खचाखच भरा हुआ था। बच्चों की हंसी, तेज संगीत और रंग-बिरंगी रोशनी के बीच अचानक ड्रैगन झूला दो चक्कर लगाने के बाद बीच में ही रुक गया। झूले में बैठे बच्चे घबरा गए, जबकि नीचे खड़े अभिभावकों की सांसें थम गईं।
करीब 10 मिनट तक झूला दोबारा चालू नहीं हो सका। आखिरकार कर्मचारियों को झूले को धक्का लगाकर बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारना पड़ा। घटना के बाद झूले के बाहर खड़े कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को उसमें बैठाने का इरादा बदल दिया।
कुछ लोगों ने बुकिंग काउंटर से टिकट वापस कर पैसे ले लिए। उनका कहना था कि जब झूला बीच में ही बंद हो रहा है तो बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
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मेले में पहुंचे लोगों ने झूला मैदान की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जहां हर साल लोगों की आवाजाही के लिए 15 फीट रास्ता छोड़ा जाता था, इस बार वहां अतिरिक्त झूले और फूड वैन लगा दी गई हैं। इससे पैदल चलने वालों को भी परेशानी हो रही है। लोगों का आरोप है कि अधिक कमाई के लिए मैदान की व्यवस्था से समझौता किया गया है।
मौके पर मौजूद अभिभावक राजीव कुमार ने बताया कि पहली बार झूला मैदान में इस तरह की अव्यवस्था देखने को मिली है। झूले चलते-चलते बंद हो रहे हैं और रास्ते भी संकरे कर दिए गए हैं।
वहीं, अभिभावक संजय शर्मा ने कहा कि ड्रैगन झूले की स्थिति देखने के बाद उन्होंने अपने बच्चों को उसमें नहीं बैठाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले में मनोरंजन के साथ सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से झूलों की तकनीकी जांच कराने, सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने और झूला मैदान में लोगों की आवाजाही के लिए पर्याप्त रास्ता उपलब्ध कराने की मांग की है।
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करीब 10 मिनट तक झूला दोबारा चालू नहीं हो सका। आखिरकार कर्मचारियों को झूले को धक्का लगाकर बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारना पड़ा। घटना के बाद झूले के बाहर खड़े कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को उसमें बैठाने का इरादा बदल दिया।
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कुछ लोगों ने बुकिंग काउंटर से टिकट वापस कर पैसे ले लिए। उनका कहना था कि जब झूला बीच में ही बंद हो रहा है तो बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
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मेले में पहुंचे लोगों ने झूला मैदान की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जहां हर साल लोगों की आवाजाही के लिए 15 फीट रास्ता छोड़ा जाता था, इस बार वहां अतिरिक्त झूले और फूड वैन लगा दी गई हैं। इससे पैदल चलने वालों को भी परेशानी हो रही है। लोगों का आरोप है कि अधिक कमाई के लिए मैदान की व्यवस्था से समझौता किया गया है।
मौके पर मौजूद अभिभावक राजीव कुमार ने बताया कि पहली बार झूला मैदान में इस तरह की अव्यवस्था देखने को मिली है। झूले चलते-चलते बंद हो रहे हैं और रास्ते भी संकरे कर दिए गए हैं।
वहीं, अभिभावक संजय शर्मा ने कहा कि ड्रैगन झूले की स्थिति देखने के बाद उन्होंने अपने बच्चों को उसमें नहीं बैठाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले में मनोरंजन के साथ सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से झूलों की तकनीकी जांच कराने, सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने और झूला मैदान में लोगों की आवाजाही के लिए पर्याप्त रास्ता उपलब्ध कराने की मांग की है।