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Shimla: समग्र रैंकिंग में हमीरपुर काॅलेज को पहला स्थान, जानिए अन्य महाविद्यालयों का रैंक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 17 Mar 2026 04:22 PM IST
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सार

 समग्र रैंकिंग में राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर ने पहला स्थान हासिल किया, जिसके बाद दूसरे स्थान पर राजकीय महाविद्यालय संजौली और तीसरे स्थान पर राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला रहा। 

cm sukhvinder sukhu also launched the Internal Ranking of Govt Colleges
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सरकारी कॉलेजों की आंतरिक रैंकिंग जारी की। - फोटो : आईपीआर विभाग
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विस्तार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को उच्च शिक्षा में सुधारों पर आयोजित एक दिवसीय प्रधानाचार्य सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए सरकारी कॉलेजों की आंतरिक रैंकिंग जारी की। समग्र रैंकिंग में राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर ने पहला स्थान हासिल किया, जिसके बाद दूसरे स्थान पर राजकीय महाविद्यालय संजौली और तीसरे स्थान पर राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला रहा। टियर-1 श्रेणी में सरकारी कॉलेज हमीरपुर पहले स्थान पर रहा, संजौली कॉलेज दूसरे और राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला ने तीसरा स्थान हासिल किया।

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टियर-2 में सरकारी कॉलेज भोरंज पहले स्थान पर रहा। दूसरे स्थान पर सरकारी कॉलेज सरस्वतीनगर शिमला और तीसरे स्थान पर सरकारी कॉलेज सुन्नी रहा। टियर-3 में सरकारी कॉलेज कफोटा ने शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि डिग्री कॉलेज दालडाघाट दूसरे और सरकारी कॉलेज चैलकोट तीसरे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री ने सभी शीर्ष रैंक वाले कॉलेजों को सम्मानित किया और उन्हें एक-एक लाख रुपये के चेक प्रदान किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश संस्कृत अकादमी का विक्रमी संवत कैलेंडर भी जारी किया और बिलासपुर, धर्मशाला तथा चौड़ा मैदान के राजकीय महाविद्यालयों की डिजिटल पहलों का वर्चुअल शुभारंभ किया। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, शिक्षा सचिव राकेश कंवर, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. अमरजीत शर्मा, राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. सर्बजोत सिंह बहल, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह और विभिन्न कॉलेजों के प्रधानाचार्य उपस्थित थे।

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चुनौतियों के बावजूद शिक्षा और स्वास्थ्य बजट में नहीं होगी कोई कटौती: सुक्खू
प्रधानाचार्य सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए सीएम सुक्खू ने कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों के बजट में कोई कटौती नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दूरदराज क्षेत्रों में भी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार करना अत्यंत आवश्यक है ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का पूर्ण आत्मविश्वास और प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। इस दिशा में शिक्षा और शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। शिक्षा क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए सरकार ने कई पहल की हैं। उन्होंने विज्ञान, वाणिज्य और ललित कला जैसे विशेष महाविद्यालय खोलने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमीरपुर में 50 बीघा भूमि पर एक विज्ञान कॉलेज स्थापित किया जा रहा है, जिसके लिए सरकार ने 20 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त राज्यभर में वाणिज्य और अन्य विशेष कॉलेज भी स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा में मौजूदा कमियों को दूर करने के लिए और इस दिशा में सार्थक सुधार लाने के दृष्टिगत प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहायक प्राध्यापकों के 400 और जूनियर सहायक प्राध्यापकों के भी 400 पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कॉलेजों में न्यू एज के पाठ्यक्रम और अतिरिक्त भाषा कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए ताकि विद्यार्थियों की रोजगार प्राप्त करने की क्षमता बढ़ सके। महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों की तर्ज पर कॉलेज रैंकिंग प्रणाली भी लागू की गई है।

सुक्खू ने कहा कि शिक्षा विभाग का पुनर्गठन करते हुए स्कूल शिक्षा निदेशालय और उच्च शिक्षा निदेशालय की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के शिक्षक बहुत सक्षम हैं और ये सुधार उन्हें और बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि सीबीएसई स्कूलों की शुरुआत के बाद इनमें छात्रों के दाखिलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अगले दो महीनों में इन स्कूलों में आवश्यकतानुसार सभी शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार के प्रयासों से मेडिकल कॉलेजों में अत्याधुनिक एमआरआई मशीनें स्थापित की गई हैं और स्वास्थ्य संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से रोबोटिक सर्जरी सुविधा की शुरूआत की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के पुरानी पेंशन योजना के बहाली के निर्णय के फलस्वरूप केंद्र सरकार ने राज्य को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बंद कर दिया गया है और 1600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि ओपीएस कोई राजनीतिक निर्णय नहीं है, बल्कि सरकारी कर्मचारी सम्मानजनक तरीके से वृद्धावस्था में जीवन व्यतीत कर सकें इसलिए सामाजिक सुरक्षा देने के लिए लिया गया निर्णय है।

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