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Hamirpur (Himachal) News: लंपी की चपेट में 100 पशु, आठ की मौत
Tue, 08 Sep 2026 11:02 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 08 Sep 2026 11:02 AM IST
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हमीरपुर। जिले में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। बीमारी की चपेट में आने वाले पशुओं की संख्या बढ़कर 100 हो गई है, जबकि अब तक आठ पशुओं की मौत हो चुकी है।
वर्तमान में जिले में करीब 61 एक्टिव केस हैं। बीमारी के बढ़ते मामलों ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग ने टीकाकरण और निगरानी अभियान तेज कर दिया है।
पशुपालन विभाग अब तक करीब 13 हजार पशुओं का टीकाकरण कर चुका है। प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने के साथ जिले के अन्य हिस्सों में भी पशुओं की निगरानी की जा रही है। विभाग ने पशुपालकों से पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
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विभाग के अनुसार किसी पशु में लंपी स्किन डिजीज के लक्षण दिखाई देने पर उसे तुरंत अन्य पशुओं से अलग कर देना चाहिए और नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करना चाहिए।
पशुपालन विभाग हमीरपुर के उपनिदेशक डॉ. सुजय शर्मा ने बताया कि संक्रमित पशु को अलग रखने से बीमारी के दूसरे पशुओं में फैलने की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। पशुपालकों को पशुओं की नियमित निगरानी करने और किसी भी असामान्य लक्षण की स्थिति में तत्काल पशु चिकित्सक से सलाह लेने की हिदायत दी गई है।
ऐसे फैलता है लंपी वायरस
लंपी स्किन डिजीज गोवंश में होने वाली संक्रामक वायरल बीमारी है। यह कैप्रिपॉक्स वायरस से होती है। मुख्य रूप से मच्छर, काटने वाली मक्खियां तथा टिक जैसे रक्त चूसने वाले कीट इसके प्रसार में भूमिका निभा सकते हैं। संक्रमण की स्थिति में पशु को बुखार आ सकता है और त्वचा पर गोल, उभरी हुई गांठें या नोड्यूल दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर पशुपालकों को बिना देरी किए पशु को अलग कर पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
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वर्तमान में जिले में करीब 61 एक्टिव केस हैं। बीमारी के बढ़ते मामलों ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग ने टीकाकरण और निगरानी अभियान तेज कर दिया है।
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पशुपालन विभाग अब तक करीब 13 हजार पशुओं का टीकाकरण कर चुका है। प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने के साथ जिले के अन्य हिस्सों में भी पशुओं की निगरानी की जा रही है। विभाग ने पशुपालकों से पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
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विभाग के अनुसार किसी पशु में लंपी स्किन डिजीज के लक्षण दिखाई देने पर उसे तुरंत अन्य पशुओं से अलग कर देना चाहिए और नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करना चाहिए।
पशुपालन विभाग हमीरपुर के उपनिदेशक डॉ. सुजय शर्मा ने बताया कि संक्रमित पशु को अलग रखने से बीमारी के दूसरे पशुओं में फैलने की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। पशुपालकों को पशुओं की नियमित निगरानी करने और किसी भी असामान्य लक्षण की स्थिति में तत्काल पशु चिकित्सक से सलाह लेने की हिदायत दी गई है।
ऐसे फैलता है लंपी वायरस
लंपी स्किन डिजीज गोवंश में होने वाली संक्रामक वायरल बीमारी है। यह कैप्रिपॉक्स वायरस से होती है। मुख्य रूप से मच्छर, काटने वाली मक्खियां तथा टिक जैसे रक्त चूसने वाले कीट इसके प्रसार में भूमिका निभा सकते हैं। संक्रमण की स्थिति में पशु को बुखार आ सकता है और त्वचा पर गोल, उभरी हुई गांठें या नोड्यूल दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर पशुपालकों को बिना देरी किए पशु को अलग कर पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।